कोर्ट ने कहा, ‘आधार और PAN कार्ड से साबित नहीं हो सकती नागरिकता’

नागरिकता से जुड़े एक मामल की सुनवाई के दौरान मुबंई की एक मैजिस्ट्रैट कोर्ट ने यह टिप्पणी की है. साथ ही कोर्ट ने इसमें एक बांग्लादेशी महिला को जेल भेजने का फैसला भी सुनाया है.
mumbai adhar card is not citizenship proof, कोर्ट ने कहा, ‘आधार और PAN कार्ड से साबित नहीं हो सकती नागरिकता’

नागरिकता से जुड़े एक मामल में मुबंई की एक अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आधार कार्ड नागरिकता का सबूत नहीं है. साथ ही कोर्ट ने बांग्लादेशी महिला को देश के अंदर अवैध तरीके से प्रवेश करने के मामले में एक साल कैद की सजा भी सुनाई है.

दरअसल, साल 2009 में मुंबई के दहिसर पूर्व इलाके में रहने वाली ज्योति गाजी उर्फ तस्लीमा रबीउल समेत 16 अन्य लोगों के खिलाफ पासपरोर्ट रूल्स एंड फॉरनर्स ऑर्डर के तहत केस दर्ज किया गया था

यहां की मैजिस्ट्रैट कोर्ट ने तस्लीमा रबीउल को इस मामले दोषी करार दिया है. इस केस के बाकी 15 आरोपी अभी भी फरार हैं.

कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए कही, “यह गौर करना उचित होगा कि पैन कार्ड, आधार कार्ड या सेल डीड जैसे दस्तावेज किसी व्यक्ति की नागरिकता को साबित करने के लिए काफी नहीं हैं. नागरिकता साबित करने के लिए आम तौर पर जन्मतिथि का प्रमाण, पैदा होने की जगह, माता-पिता का नाम, उनके पैदा होने का स्थान का सबूत होना जरूरी है. कई बार दादा-दादी के जन्म का स्थान भी उपयुक्त होता है.”

रबीउल ने कोर्ट में दावा किया था कि वह बांग्लादेश की रहने वाली है और 15 साल पहले शहर में आई थी. इसपर कोर्ट ने कहा, “यह साबित हो चुका है कि वह एक बांग्लादेशी नागरिक है और उसने बिना किसी वैध पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज का इस्तेमाल करते हुए भारत में प्रवेश किया है”

अदालत ने निर्देश दिया है कि एक साल की सजा काटने के बाद रबीउल को देश से बाहर भेजा जाए.

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