मुस्लिम युवक ने रोजा तोड़ किया रक्तदान, बचाई महिला की जान

मन्नु अंसारी को फोन से पता चला कि एक महिला को खून की जरूरत है. तो मन्नु अपने रोजा की परवाह किए बिना खून देने अस्पताल पहुंच गए.

असम: रमजान के इस पाक महीने में एक मुस्लिम युवक ने इंसानियत और भाईचारे की वाकई एक अनूठी मिसाल पेश की है. ये मामला असम के शोणितपुर जिला के ढेकियाजुली का है. जहां पर एक रोजेदार ने ये साबित करके दिखा दिया कि इंसानियत से बढ़कर कोई धर्म नहीं होता है.

युवक के इस काम के लिए उनकी हर जगह प्रशंसा हो रही है.जानकारी के मुताबिक बिश्वनाथ जिले के ईटाखोला निवासी रेवती बोरा नामक एक महिला को गंभीर अवस्था में इलाज के लिए एक सप्ताह पूर्व बिश्वनाथ जिला सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

महिला को बी नेगेटिव खून की बहुत जरूरत थी. ब्लड बैंक व अन्य स्थानों पर परिजनों ने काफी तलाश की लेकिन सफलता नहीं मिली. हॉस्पिटल की ओर से मन्नु अंसारी को फोन किया गया और बताया गया कि एक महिला को खून की सख्त जरूरत है.

अंसारी ने बिना टाइम गंवाए हॉस्पिटल पहुंचकर महिला के लिए रक्तदान किया. इस महिला की पहचान रेवती बोरा जिनकी उम्र 85 है के तौर पर की गई है. रेवती बोरा को करीब एक हफ्ते पहले गाल ब्लेडर संबंधी बीमारी की वजह से हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था.

बी नेगेटिव ग्रुप का रक्त बहुत कम लोगों में पाया जाता है. मन्नु अंसारी ने अस्पताल पहुंचकर अपना खून दिया. रेवती बोरा के पुत्र अनिल बोरा को जब इसकी जानकारी मिली तो वह मुन्ना अंसारी का इस उपकार के लिए दिल से आभार व्यक्त किया.

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