‘मुस्लिम रेजिमेंट पर रुकें झूठी खबरें’, पूर्व नेवी प्रमुख समेत सेना में रहे 120 लोगों ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र

सोशल मीडिया पर एक फर्जी खबर चलती है कि 1965 की लड़ाई में मुस्लिम रेजिमेंट (Muslim Regiment in Indian Army) ने पाकिस्तान से युद्ध लड़ने से इनकार कर दिया था. जबकि भारत में कोई मुस्लिम रेजिमेंट है ही नहीं.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 9:48 am, Thu, 15 October 20
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भारतीय सेना के जवान (सांकेतिक फोटो)

सोशल मीडिया पर इन दिनों फिर से मुस्लिम रेजिमेंट के नाम पर एक फर्जी खबर चलाई जा रही है. इसे लेकर बड़ी संख्या में सेना के रिटायर्ड अफसरों और जवानों ने आपत्ति जाहिर करते हुए राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को पत्र लिखा है. दरअसल, सोशल मीडिया पर यह फर्जी खबर चलती है कि 1965 की लड़ाई में मुस्लिम रेजिमेंट (Muslim Regiment in Indian Army) ने पाकिस्तान से युद्ध लड़ने से इनकार कर दिया था. जबकि सच्चाई यह है कि भारत में कोई मुस्लिम रेजिमेंट है ही नहीं, तो युद्ध के लिए लड़ने से इनकार करने की तो बात ही नहीं आती.

अब पत्र में भारतीय सेना के गैर-राजनीतिक और धर्मनिरपेक्ष चरित्र की रक्षा करने की जरूरत पर बल देते हुए मांग की गई है कि इस मामले में त्वरित और कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए. राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद से फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को भी चेतावनी जारी करने की अपील की गई है.

चीन-पाकिस्तान से तनाव के बीच रिटायर्ड अफसरों ने जताई चिंता

सेना के रिटायर्ड अफसरों ने राष्ट्रपति को भेजे पत्र में कहा है कि भारत में कभी मुस्लिम रेजिमेंट रही ही नहीं है. यह भी बताया गया है कि ऐसा झूठ 2013 से फैलाया जा रहा है और अबतक जारी है. चीन और पाकिस्तान दोनों देशों से चल रहे तनाव के बीच ऐसी फर्जी खबरों के लेकर चिंता जाहिर की गई है.

पत्र पर सेना में रहे 120 लोगों के साइन

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को भेजे गए पत्र पर कुल 120 रिटायर्ड जवानों के साइन हैं. इसमें पूर्व नेवी चीफ एडमिरल एल रामदास, सेना के 24 दो और तीन स्टार वाले जनरल भी शामिल हैं. पत्र में लेफ्टिनेंट जनरल अता हसैन (सेवा निवृत्त) के एक ब्लॉग का भी जिक्र है जिसमें वो कहते हैं कि यह फेक न्यूज पाकिस्तानी सेना के साई ऑप्स ( मनोवैज्ञानिक ऑपरेशन) का हिस्सा हो सकता है.

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पत्र में कहा गया है, ‘हम साफ करना चाहते हैं कि मुस्लिम लोग भारतीय सेना की कई रेजिमेंट का हिस्सा हैं, और देश के लिए उन्होंने पूरी तत्परता से काम किया है.’ पत्र में कहा गया है कि इस तरह की फर्जी खबरों से लोगों के दिमाग में शक पैदा होता है कि अगर मुसलमान सैनिकों पर भरोसा नहीं किया जा सकता है तो दूसरे मुसलमान भी उनसे अलग नहीं होंगे. लिखा गया है कि इससे समुदायों के बीच अविश्वास और नफरत बढ़ती है.

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