देश के इन 10 राज्यों में Covid-19 संक्रमण के 90 फीसदी केस, महानगरों में सबसे बड़ा बदलाव

3 मई के बाद से भले ही मरीजों (Coronavirus Patients) की संख्या बढने में तेजी आई हो, लेकिन एक से दूसरे के बीच संक्रमण पहुंचने की आशंका कम हुई है.

देश में भले ही कोरोनावायरस (Coronavirus) से संक्रमित मरीजों की संख्या हर दिन तेजी से बढ़ रही हो, पर भौगौलिक स्थिति पर गौर करें तो 10 राज्यों में 90 फीसदी से ज्यादा मरीज हैं. गणितीय अध्ययन भी कुछ और ही स्थिति के बारे में बता रहे हैं. इनके अनुसार देश में कोरोना मरीज से अन्य लोगों के संक्रमित होने की आशंका कम हुई है. इसके पीछे लॉकडाउन (Lockdown) के साथ-साथ लोगों में कोरोनावायरस को लेकर आए व्यवहारिक बदलाव को बड़ी वजह माना जा रहा है.

क्या कहता है गणितीय अध्ययन

चेहरे पर मास्क लगाने के अलावा दो फुट की दूरी का पालन होने से संक्रमण के खिलाफ यह बदलाव देखने को मिल रहा है. चैन्नई स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ मैथेमेटिकल साइंसेज ने प्रभावी प्रजनन दर (आर) को लेकर एक अध्ययन किया है, जिसके अनुसार लॉकडाउन का पहला चरण पूरा होने तक देश में यह दर 1.83 थी, जो कि 16 से 25 मई के बीच 1.23 दर्ज की गई. 13 अप्रैल से 14 मई के बीच यह दर 1.29 थी.

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यह ऐसे भी समझ सकते हैं कि 4 मार्च से 11 अप्रैल के बीच देश में अगर 25 कोरोना संक्रमित मरीज हैं तो इनके जरिए 45 लोगों तक संक्रमण के पहुंचने की आशंका थी, लेकिन फिलहाल स्थिति यह है कि 25 लोग अगर कोरोना संक्रमित हैं तो इनसे 30 लोगों के चपेट में आने की आशंका है.

प्रोफेसर सिताभरा सिन्हा का कहना है कि दो सप्ताह पहले तक देश में एक अलग स्थिति देखने को मिल रही थी, लेकिन 3 मई के बाद से भले ही मरीजों की संख्या बढने में तेजी आई हो, लेकिन एक से दूसरे के बीच संक्रमण पहुंचने की आशंका कम हुई है. इसके पीछे कई वजह हो सकती हैं. लॉकडाउन के साथ-साथ लोगों का घरों पर रहना, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के अलावा चेहरे पर मास्क और बार-बार हाथ धोने की आदत डालना शामिल हैं.

नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने भी कहा था कि मार्च में जब कोरोनावायरस के मरीज मिलना शुरू हुए तब से अगर वर्तमान स्थिति की तुलना करें तो देश में एक जन आंदोलन देखने को मिला है. कोरोना वायरस को लेकर देश में तेजी से लोगों में व्यवहारिक बदलाव हो रहा है जो कि 137 करोड़ की आबादी वाले देश में काफी मुश्किल था.

महानगरों में सबसे ज्यादा हुआ है बदलाव

देश में सबसे ज्यादा कोरोना संक्रमित मरीज महाराष्ट्र में हैं, लेकिन वहां संक्रमण की प्रजनन दर को देखें तो 4 से 25 मई के बीच यह 1.49 से घटकर 1.27 दर्ज की गई है. ठीक इसी तरह दिल्ली में 20 से 25 मई के बीच यह दर 1.31 से घटकर 1.2 मिल रही है. सात से 10 मई के बीच गुजरात में 1.26 और तमिलनाडू में 1.31 है. यूपी में 1.33, एमपी में 1.23, राजस्थान में 1.27, पंजाब में 1.32, पश्चिम बंगाल में 1.22, आंध्रप्रदेश में 1.27 और कर्नाटक में 1.62 रिकॉर्ड की गई है. जबकि राष्ट्रीय औसत 1.23 है.

आगे बरकरार रखना बड़ी चुनौती

महामारी विशेषज्ञ डॉ. दिव्येंदु गुप्ता का कहना है कि कोरोनावायरस को लेकर देश में आए व्यवहारिक बदलाव से इंकार नहीं किया जा सकता है. खासतौर पर महानगरों में सबसे ज्यादा इसका असर देखने को मिल रहा है. ऐसे में संक्रमित मरीज से दूसरों में संक्रमण के प्रसार की आशंका कम मिल सकती है, लेकिन इसे आगे भी बरकरार रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी. 31 मई को लॉकडाउन का चौथा चरण भी पूरा हो रहा है. ऐसे में सरकार की आगामी योजना कोरोना काल में एक अहम भूमिका निभा सकती है.

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