Kartarpur Corridor: ‘इमरान खान के निमंत्रण पर पाकिस्तान जाने के लिए सिद्धू को लेनी होगी परमिशन’

रवीश कुमार ने कहा कि करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह में शामिल होने वाले तीर्थयात्रियों, आमंत्रितों और राजनीतिक हस्तियों से जुड़े नाम बता दिए जाएंगे.
navjot singh sidhu permission for Kartarpur Corridor, Kartarpur Corridor: ‘इमरान खान के निमंत्रण पर पाकिस्तान जाने के लिए सिद्धू को लेनी होगी परमिशन’

कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने भले ही करतारपुर गलियारे के उद्घाटन समारोह के लिए पाकिस्तानी आमंत्रण स्वीकार कर लिया हो. लेकिन भारतीय विदेश मंत्रालय का कहना है कि इसके लिए सिद्धू को ‘राजनीतिक मंजूरी’ लेनी होगी. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि जहां तक मैं जानता हूं कि इस प्रक्रिया के लिए सामान्य नियम ही लागू होते हैं.

‘जिन्हें बुलाना चाहते हैं पाकिस्तान…’
रवीश कुमार ने नौ नवंबर के उद्घाटन समारोह में भाग लेने के लिए इमरान खान द्वारा भेजे गए निमंत्रण को सिद्धू द्वारा स्वीकार करने पर पूछ गए एक सवाल का जवाब दिया. उन्होंने कहा, “जिन्हें पाकिस्तान बुलाना चाहते हैं, उन्हें राजनीतिक मंजूरी लेनी होगी.”

उन्होंने कहा कि ननकाना साहिब की भी डेली लिमिट 3,000 श्रद्धालुओं से बढ़ाकर 10,000 करने की मांग पाकिस्तान से की गई है. इस पर पाकिस्तान से अब तक जवाब नहीं आया है.


‘पाकिस्तान को 480 तीर्थयात्रियों की सूची दी’
रवीश कुमार ने यह भी कहा कि भारत ने उद्घाटन जत्थे के लिए पाकिस्तान को 480 तीर्थयात्रियों की एक सूची दी है और पाकिस्तान की ओर से मंजूरी मिलने का इंतजार है. उन्होंने कहा कि करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह में शामिल होने वाले तीर्थयात्रियों, आमंत्रितों और राजनीतिक हस्तियों से जुड़े नाम पहले ही बता दिए जाएंगे. इसमें किसी तरह का सरप्राइज नहीं है.

यूरोपियन यूनियन (ईयू) के सांसदों के भारत और कश्मीर दौरे पर उन्होंने कहा कि भारत सरकार के संज्ञान में लाया गया था कि विदेशी सांसदों का एक दल भारत दौरे पर आना चाहता है. सभी सांसद भारत को जानने को लेकर उत्सुक थे. इस मुलाकात का मकसद परिचय मात्र था. सभी विदेशी सांसद अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों और देशों से थे.


‘चीन के सामने भारत की स्थिति स्पष्ट’
रवीश कुमार ने चीन पर पलटवार करते हुए कहा कि चीन के सामने भारत की स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट है. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर फैसला लेना भारत का आंतरिक मामला है. चीन ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बड़े हिस्से पर कब्जा कर रखा है.

उन्होंने कहा कि 1963 के तथाकथित चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते के तहत पीओके के हिस्से को भी नियंत्रण में ले रखा है. उम्मीद है कि चीन समेत दूसरे देश भी भारत की अखंडता का सम्मान करेंगे.

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