महाराष्ट्र में मंत्रालय बंटने के बाद NCP नेता जयंत पाटिल का बयान, कहा- आई थिंक…

एनसीपी नेता जयंत पाटिल द्वारा अपने ट्वीट में आज मंत्रियों को दिए गए पोर्टफ़ोलिओ पर "I Think " का इस्तेमाल करना सवाल खड़ा करता है. जयंत पाटिल ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि मुझे लगता है कि आज घोषित पोर्टफोलियो वितरण एक अस्थायी प्रकृति का है.

मुंबई: महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने बाद करीब एक महीने तक सियासी ड्रामा चला और फिर कांग्रेस-एनसीपी ने शिवसेना के साथ सरकार बनाई. सरकार बनने के बाद मंत्रियों ने शपथ तो ग्रहण कर ली लेकिन उन्हें मंत्रालय शपथ ग्रहण करने के 15 दिनों बाद आज यानी गुरुवार को मिले. सब कुछ सही था लेकिन रात होते-होते एनसीपी नेता जयंत पाटिल के एक ट्वीट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

एनसीपी नेता जयंत पाटिल द्वारा अपने ट्वीट में आज मंत्रियों को दिए गए पोर्टफ़ोलिओ पर “I Think ” का इस्तेमाल करना सवाल खड़ा करता है. जयंत पाटिल ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि मुझे लगता है कि आज घोषित पोर्टफोलियो वितरण एक अस्थायी प्रकृति का है. मंत्रिमंडल विस्तार के बाद महाराष्ट्र के लोगों के सामने पोर्टफोलियो के बारे में वास्तविक तस्वीर स्पष्ट होगी.

जयंत पाटिल के इस ट्वीट के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि महा विकास अघाड़ी (MahaVikasAghadi) में सबकुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा है. यहां कुछ सवाल जरुर खड़े हो रहे हैं.

क्या जयंत पाटिल और एनसीपी के नेता को उम्मीद के मुताबिक मंत्रालय नही मिला?

मंत्री मंडल बंटवारे में देरी को लेकर हो रही आलोचना के चलते कही उद्धव ठाकरे ने अपने सहयोगियों को बगैर बताया लिया फैसला?
या फिर गृह मंत्रलय के ना मिलने से के एनसीपी अंदर खाने नाराज़ है ?


शिवसेना को मुख्यमंत्री पद के साथ-साथ गृह मंत्रालय मिला है. शिवसेना के एकनाथ सिंदे महाराष्ट्र के गृह मंत्री होंगे. इसी के साथ सिंदे को नगर विकास मंत्रालय, पर्यावरण, पीडब्लूडी, पर्यटन और संसदीय कार्य मंत्रालय भी मिला है. वहीं एनसीपी के छगन भुजबल को नगर विकास मंत्रालय, सामाजिक न्याय, जल संसाधन मंत्रालय और स्टेट एक्साइज की जिम्मेदारी मिली है.

कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता बालासाहेब थोराट को राजस्व, स्कूल शिक्षा, पशुपालन और मत्स्य पालन विभाग मिला है. वहीं वित्त और योजना, आवास, खाद्य आपूर्ति और श्रम मंत्रालय एनसीपी के जयंत पाटिल को सौंपे गए हैं. मालूम हो कि महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद शिवसेना ने मुख्यमंत्री पद को लेकर अपनी चुनाव पूर्व सहयोगी बीजेपी से गठबंधन खत्म कर लिया था.

बीजेपी से गठबंधन खत्म करने के बाद शिवसेना ने एनसीपी और कांग्रेस के साथ हाथ मिला लिया था. इस गठबंधन को महा विकास अगाड़ी नाम दिया गया था. इस सरकार के गठन के बाद शिवसेना के उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की थी.