जनसंख्या नियंत्रण कानून : RSS प्रमुख भागवत को NCP की चेतावनी, नवाब मलिक बोले- नतीजा देखेंगे

नवाब मलिक ने कहा कि अगर भागवत जी जबरन नसबंदी का कानून बनवाना चाहते हैं तो कानून बनने दें और उसका नतीजा देखें. मलिक ने याद दिलाया कि कोई भी कानून बनाने से पहले अतीत में हुए जबरन नसबंदी की घटना का हस्र भी देख लें.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत के जनसंख्या नियंत्रण कानून की पैरवी वाले बयान पर एनसीपी ने नतीजे भुगतने की चेतावनी दी है. एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा कि संघ प्रमुख भागवत देश में दो बच्चे का कानून चाहते हैं. उनको पता होना चाहिए कि महाराष्ट्र में पहले से इस पर कानून है. कुछ दूसरे राज्यों में भी इससे जुड़े कानून हैं.

नवाब मलिक ने कहा कि अगर भागवत जी जबरन नसबंदी का कानून बनवाना चाहते हैं तो कानून बनने दें और उसका नतीजा देखें. मलिक ने याद दिलाया कि कोई भी कानून बनाने से पहले अतीत में हुए जबरन नसबंदी की घटना का हस्र भी देख लें.

इस बारे में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह भी सामने आ गए. उन्होंने कहा कि देश में जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू करना बहुत जरूरी है. चीन अपने यहां कानून लेकर आया. वहां उसका फायदा साफ-साफ दिखता है. आज उसकी जीडीपी और अपनी जीडीपी की तुलना कर लीजिए. इसके अलावा 1960 के दशक में उसका जीडीपी देख लीजिए.

मंत्री ने कहा कि इसे धर्म के चश्मे से देखना नहीं चाहिए. दो बच्चों का कानून हिन्दू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सबके लिए लागू होना चाहिए. जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं उन्हें समझना होगा.

इससे पहले संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि दो बच्चों का कानून देश के हित में होगा. उन्होंने कहा कि संघ की अगली योजना में इसे शामिल किया जाएगा. देश में जनसंख्या विस्फोट ने विकराल रूप धारण कर लिया है. अगर जनसंख्या नियंत्रण कानून बनता है तो देश विकास के रास्ते पर तेज गति से चलेगा.

यूपी के मुरादाबाद में अपने चार दिनी प्रवास के दौरान एमआईटी सभागार में सवालों का जवाब देते हुए भागवत ने कहा कि हमने अपनी बात रख दी है. अब सरकार इस पर कोई नीति या कानून लेकर आए. हम इस बारे में जनजागरण करेंगे कि दो बच्चों का कानून कैसे देश के लिए फायदेमंद हो सकता है.

राम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि यह मामला तो सुप्रीम कोर्ट से हल हो चुका है. अब संघ की इसमें कोई भूमिका नहीं है. मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट का गठन होते ही संघ का काम पूरा हो जाएगा. इसके बाद संघ इस मामले से खुद को अलग कर लेगा. काशी और मथुरा को लेकर विवाद के बारे में उन्होंने कहा कि काशी और मथुरा कभी भी संघ के एजेंडे में नहीं रहा है.

वहीं नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हुई हिंसक घटनाओं के सवाल पर भागवत ने कहा कि यह कानून नागरिकता देने वाला है, इसका विरोध नहीं होना चाहिए. उन्होंने संघ के स्वयंसेवकों से नागरिकता कानून को लेकर फैल रहे अफवाहों को दूर करने और सही बात लोगों तक पहुंचाने की अपील की. उन्होंने सरकार से यह उम्मीद जताई कि विरोधों की वजह से वह इस पर कदम पीछे नहीं हटाएगी.

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