TDP के चार सांसदों के BJP में शामिल होने के बाद भी राज्यसभा में बहुमत से दूर NDA

TDP के कुल 6 राज्‍यसभा सांसद हैं, इनमें से 4 BJP में शामिल हो गए हैं. अब TDP के पास सिर्फ 2 राज्‍यसभा सांसद रह गए हैं.

नई दिल्ली. तेलगू देशम पार्टी (TDP) के चार राज्यसभा सांसदों ने गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) का हाथ थामा था, इससे BJP को राज्यसभा में नई मजबूती मिली है और अब उसे अपर हाउस में अटके बिलों को नए सिरे से पास कराने के प्रयास में भी आसानी होगी.

अभी भी बहुमत से दूर BJP 

हालांकि, BJP अभी भी अपर हाउस यानी राज्यसभा में बहुमत से 18 सीटें दूर है. BJP के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पास अभी राज्यसभा में TDP के चार सांसद मिलाकर 106 सीटें हैं, जोकि 245 सदस्यीय सदन में बहुमत से 18 कम है. वहीं, कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA के पास 66 सीटें हैं और NDA या UPA से अलग दलों के पास भी 66 सीटें हैं. मौजूदा समय में राज्यसभा की नौ सीटें खाली हैं.

राज्यसभा सांसद का चुनाव विधानसभा के सदस्यों की संख्या से होता है, इसलिए नवम्बर में खाली होने वाली उत्तर प्रदेश की सभी 10 राज्यसभा सीटें BJP के खाते में आ सकती हैं. BJP के पास उत्तर प्रदेश में 309 विधानसभा सदस्य हैं उसके बाद समाजवादी पार्टी (SP) के पास 48, बहुजन समाज पार्टी (BSP) के पास 19 और कांग्रेस के पास 7 सदस्य हैं.

अगले साल के अंत तक महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल, असम, राजस्थान और पंजाब सहित अन्य राज्यों में भी राज्यसभा चुनाव होने हैं, जो इससे अलग तस्वीर पेश कर सकते हैं.

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TDP के चार राज्यसभा सांसद गुरुवार को भाजपा में शामिल हुए थे. TDP सांसद वाई. एस. चौधरी, सी.एम. रमेश, टी.जी. वेंकटेश और जी. मोहनराव ने राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू से मुलाकात की और TDP से अपने इस्तीफे सौंपे थे. वेंकैया नायडू को संबोधित अपने पत्र में इन सांसदों ने कहा था कि वे नरेंद्र मोदी के शानदार नेतृत्व से प्रेरित और उत्साहित हुए हैं और अपने समूह का विलय भाजपा में कर रहे हैं.

दूसरी पार्टी में विलय करने के लिए कम से कम 1/3 सदस्यों को एक साथ दूसरी पार्टी में जाना होता है. वरना उनकी सदस्यता रद्द हो जाती है. राज्यसभा में TDP के 6 सदस्य थे, जिसमे से 4 ने BJP का हाथ थाम लिया है और अब TDP के राज्यसभा में सिर्फ दो सांसद बचे हैं.

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राज्यसभा में अटके बिलों को पास करना चाहती है BJP

सदन में बहुमत नहीं होने के कारण NDA की पिछली सरकार में कई बिल राज्यसभा में अटक गए थे. नागरिकता संशोधनऔर मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकारों का संरक्षण) जैसे  विवादास्पद बिल BJP अपने इस कार्यकाल में जरूर पास करना चाहेगी. इसके लिए वह राज्यसभा में जोड़तोड़ करने की कोशिश भी कर सकती है. दोनों बिल पिछले साल राज्यसभा में बहुमत न होने के कारण रोक दिए गए थे. 

सभी बिल जो कि लोकसभा द्वारा पारित किए गए थे, लेकिन पिछले संसद में राज्यसभा द्वारा नहीं, जिसमें ट्रिपल तालाक बिल और नागरिकता संशोधन बिल भी शामिल हैं – उनको अब नए सिरे से पास कराना होगा.