पीएम मोदी श्रीलंका के प्रधानमंत्री के साथ ई- शिखर सम्मेलन में लेंगे हिस्सा, संबंधों को मजबूत करने पर जोर

भारत (India) के पीएम नरेंद्र मोदी 26 सितंबर को श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के साथ ई- शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. भारत (India) इन दिनों नेपाल को छोड़कर सभी पड़ोसी देशों के साथ संंबंध मजबूत करने पर जोर दे रहा है, जिससे पड़ोसी देशों के साथ मिलकर चीन के संकट से निपटा जा सके.

भारत आजकल अपने पड़ोसी देशों से संबंध और भी मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 26 सितंबर को श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के साथ ई- शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे.  संयुक्त राष्ट्र महासभा में ई-शिखर सम्मेलन की शुरुआत पीएम मोदी के संबोधन के साथ हो सकती है. संयुक्त राष्ट्र में ई-शिखर सम्मेलन इसी हफ्ते शुरू हो रहा है.

वहीं विदेश मंत्री जयशंकर इस महीने के अंत तक भारत-बांग्लादेश के सलाहकारों के साथ बैठक कर सकते हैं, जिससे चीन के संकट से निपटने के लिए दोनों देशों के बीच राजनीतिक संबंधों को और मजबूत किया जा सके, और इसके लिए दो साल का रोडमैप भी तैयार किया जा सकता है. इस सूची में भारत-म्यांमार विदेशी कार्यालय से बातचीत भी शामिल है. विदेश सचिव हर्ष सिंघल को सेना प्रमुख जनरल नरवणे के साथ यंगून की यात्रा पर जाना था, लेकिन चीन के संकट की वजह से इसे टालना पड़ा था, राजनीति एजेंडा में यह भी शामिल है.

नेपाल के साथ बातचीत के मूड में नहीं है भारत

आने वाले दिनों में भारत अफगानिस्तान के साथ भी रिश्ते मजबूत करने पर बल देगा. पिछले हफ्ते हुई इंट्रा-अफगान बातचीत में भारत अफगानिस्तान के साथ खड़ा रहा. आने वाले दिनों में बातचीत आगे बढ़ाने के लिए भारतीय – अफगानिस्तान के बीच बड़े स्तर पर बातचीत भी हो सकती है. भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते मजबूत करने पर जोर दे रहा है. हैरानी की बात यह है कि भारत नेपाल के साथ बातचीत आगे बढ़ाने पर बिल्कुल भी जोर नहीं दे रहा है, जबकि पिछली बार भारत और नेपाल के बीच बड़े स्तर पर बातचीच हुई थी. स्वतंत्रता दिवस के मौके पर नेपाल के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली ने पीएम मोदी को आमंत्रित भी किया था.

कोविड-19 महामारी की वजह से आर्थिक तौर पर परेशानी का सामना कर रहे मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोहेल ने रविवार को अपने देश के लिए पीएम मोदी से मदद की मांग की थी, जिसके बाद भारत ने मालदीव को 250 मिलियन डॉलर की आर्थिक मदद दी है. एक आधिकारिक घोषणा के मुताबिक भारत द्वारा मालदीव को पारदर्शी सहायता बिना किसी शर्त के दी गई है. मालदीव सरकार इस धनराशि का इस्तेमाल अपने महत्वपूर्ण कार्यों के लिए कर सकती है.

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