कैलाश मानसरोवर लिंक रोड: अब Coronavirus से उबरने के बाद होगी भारत-नेपाल वार्ता

भारत और नेपाल के बीच की 'विदेश सचिव स्तर की वार्ता' को कोरोनावायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) से निपटने के बाद आयोजित किया जाएगा. यह बातचीत मार्च में होने वाली थी, लेकिन महामारी के संकट को देखते हुए इसमें बदलाव किए गए हैं.

भारत ने उत्तराखंड (Uttarakhand) में धारचूला को लिपुलेख दर्रे (Lipulekh Pass) से जोड़ने वाली 80 किलोमीटर लंबी एक सड़क का उद्घाटन किया था, जिसे लेकर नेपाल में बहस तेज हो गई है. नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प दहल (Pushp Dahal) ने कहा है कि भारत अगर कूटनीतिक तरीके से सीमा विवाद के हल को नहीं सुलझाता है, तो नेपाल फैसला करेगा कि उसे किस रास्ते पर चलना है.

विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक इस मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों की ‘विदेश सचिव स्तर की वार्ता’ को दोनों सरकारों द्वारा कोरोनावायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) से निपटने के बाद आयोजित किया जाएगा. यह बातचीत मार्च में होने वाली थी, लेकिन महामारी के संकट को देखते हुए इसमें बदलाव किए गए हैं.

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भारत में किया गया था ‘लिंक रोड’ का उद्घाटन

भारत ने कैलाश मानसरोवर (Kailash Mansarovar) यात्रियों के लिए शुक्रवार को पिथौरागढ़-धारचूला से लिपुलेख दर्रे को जोड़ने वाली सड़क ‘लिंक रोड (Link Road)’ का उद्घाटन किया था. भारत (India) इसे उत्तराखंड का हिस्सा मानता है जबकि नेपाल (Nepal) इसे अपने नक्शे में दिखाता है. नेपाल के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारत ने जिस लिंक रोड का उद्घाटन किया है, वह नेपाल से होकर गुजरती है. नेपाल की ओर से इस क्षेत्र को अपना हिस्सा बताते हुए कोई भी गतिविधि करने से मना किया था. इस पर भारत ने जवाब देते हुए कहा था कि यह क्षेत्र भारतीय इलाके में ही आता है.

नेपाल ने जताई थी आपत्ति

नेपाल ने इस उद्घाटन को एकपक्षीय कार्रवाई बताए हुए कहा था कि यह इस नियम के खिलाफ है कि दोनों देश आपसी बातचीत और सहमति से सीमा विवादों को निपटाएंगे. नेपाल यह दावा करता है कि वह इस विवाद को ऐतिहासिक समझौतों, दस्तावेजों, तथ्यों और नक्शों के जरिए सुलझाना चाहता है.

नेपाल की बैठक में उठाए गए ये मुद्दे

रविवार को राज्य और सुशासन समिति की एक बैठक में भारत के साथ सीमा विवाद का मुद्दा उठाया गया. बैठक में नेपाल के पूर्व पीएम पुष्प दहल ने कहा कि भारत के साथ सीमा विवाद सुलझाने के लिए नेपाल को पहले उच्च स्तरीय राजनीतिक और कूटनीतिक चैनलों का इस्तेमाल करना चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि इससे समस्या का समाधान निकलता है, तो नेपाल को आगे की कार्रवाई तय करनी होगी.

नेपाल चीन के साथ मिलकर उठाना चाहता है यह मुद्दा

रविवार को हुई बैठक में दहल ने यह भी कहा कि इस मुद्दे को नेपाल के साथ चीन के सामने भी उठाया जाना चाहिए, क्योंकि अब यह तीन देशों के बीच का मामला बन चुका है. उन्होंने कहा कि भारत कैलाश मानसरोवर लिंक रोड के जरिए धारचूला से तिब्बत को जोड़ना चाहता है, जिसके लिए वह बीजिंग के संपर्क में भी आता है. इसलिए तीनों देशों को मिलकर लिपुलेख विवाद का हल निकालना चाहिए.

हालांकि, इस बयान को लेकर खुशी जताई गई और ऐक्शन लेने पर जोर भी दिया गया. लेकिन, फिलहाल दहल ने इस मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने की दिशा में कोई कदम उठाने से मना कर दिया है. भारत और नेपाल ने सभी सीमा मामलों से निपटने के लिए एक व्यवस्था बना रखी है.

इस मुद्दे पर क्या कहा नेपाल के विदेश मंत्री ने

वहीं, नेपाल के विदेश मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय संबंध समिति की बैठक में सवाल उठाते हुए कहा कि भारत ने लिंक रोड बनाते हुए नेपाल के 19 किलोमीटर के भाग पर अतिक्रमण (बिना अनुमति के प्रवेश) कर लिया है. वह कई सालों से सड़क निर्माण कर रहा है, तो उसके बाद भी सरकार ने कोई ऐक्शन क्यों नहीं लिया. उन्होंने कहा कि नेपाल सरकार सभी मुद्दे कूटनीतिक तरीकों से ही सुलझाना चाहती है. सड़क का निर्माण भारत के ही क्षेत्र में किया गया है, फिर भी भारत ने कहा है कि कोरोनावायरस महामारी का संकट खत्म होते ही वह नेपाल के साथ इस मुद्दे पर बातचीत करेगा.

नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री ने भी जताई आपत्ति

इसी बीच नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री माधव कुमार (Madhav Kumar) ने भी कैलाश मानसरोवर सड़क के उद्घाटन को लेकर आपत्ति जताते हुए कहा कि जब पूरी दुनिया कोरोनावायरस से जूझ रही है तब भारत ने नेपाली क्षेत्र से गुजरने वाली सड़क का उद्घाटन किया. उन्होंने कहा कि इससे भारत ने नेपाल की संप्रुभता और अखंडता पर हमला किया है. इस कदम से दोनों देशों के द्विपक्षीय समझौतों और आपसी समझ का उल्लंघन हुआ है. सुगौली समझौते (1816) के तहत काली नदी के पूर्व का इलाका, लिंपियादुरा, कालापानी और लिपुलेख को नेपाल अपने हिस्से बताता है.

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