चौथी बार सीएम बने येदियुरप्‍पा ने D और Y से पीछा छुड़ाया!

बीएस येदियुरप्पा ने अमित शाह को लिखे लेटर और गवर्नर के समक्ष सरकार बनाने के लिए पेश किए गए दावे में नई स्‍पेलिंग का इस्तेमाल किया है.

नई दिल्ली: बीएस येदियुरप्पा‍ ने शुक्रवार शाम चौथी बार कर्नाटक के मुख्यंमंत्री के तौर पर शपथ ले ली. मौजूदा कर्नाटक विधानसभा में यह दूसरा मौका है, जब येदियुरप्पा ने सीएम पद की शपथ ली है, देखना रोचक होगा कि सोमवार को वह बहुमत साबित कर पाते हैं या नहीं? इतिहास गवाह है येदियुरप्पा जब-जब सीएम बने हैं, उनके साथ किस्मत ने कोई न कोई खेल खेला. यही कारण है कि येदियुरप्पा ने नाम की स्पेलिंग बदल डाली है.

बीएस येदियुरप्पा ने अपने नाम की स्पेलिंग बदल ली है. पिछले साल कर्नाटक में विधानसभा चुनाव में जब येदियुरप्पा ने नामांकन भरा था, तब उन्होंने अंग्रेजी में नाम की स्पेलिंग BS Yeddyurappa लिखी थी, लेकिन अब मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले उनके नाम की स्पेलिंग बदल गई है. उन्होंने शुक्रवार को जब सरकार बनाने के लिए राज्यपाल को चिट्ठी लिखी, उसमें नाम की स्पेंलिग अलग दिखी. उन्होंने अपने नाम से अब एक d और y को बाहर निकाल दिया है. यानी अब अंग्रेजी में उनके नाम की स्पेनलिंग ‘BS Yediyurappa’हो गई है.

2007 से पहले भी बीएस येदियुरप्पा के नाम की स्पेलिंग ‘BS Yediyurappa’ यही थी, लेकिन उस वक्त समय ठीक नहीं चल रहा था, तो इस स्पेलिंग को ज्योतिषों के कहने पर बदल डाला था. येदियुरप्पा ने अमित शाह को लिखे लेटर और गवर्नर के समक्ष सरकार बनाने के लिए पेश किए गए दावे में नई स्पेलिंग का इस्तेमाल किया है.

येदियुरप्पा का किस्मत से छत्तीस का आंकड़ा रहा है

बूकानाकेरे सिद्धलिंगप्पा येदियुरप्पा मतलब बीएस येदियुरप्पा का जन्म 27 फरवरी 1943 को कर्नाटक के मांड्या जिले के बुक्कनकेरे में हुआ था. कर्नाटक के तुमकुर जिले में येदियुर स्थान पर संत सिद्धलिंगेश्वर द्वारा बनाए गए शैव मंदिर के नाम पर उनका नामकरण किया गया. लिंगायत समुदाय के येदियुरप्पा चार साल के थे, जब उनकी मां पुट्टतायम्मा का निधन हो गया था. पिता सिद्धलिंगप्पा ने ही उनका पालन-पोषण किया. येदियुरप्पा कर्नाटक में लिंगायत समुदाय के वे प्रभावशाली नेता माने जाते हैं. येदियुरप्पा ही वह नेता हैं, जिन्हें दक्षिण भारत में पहली बार कमल खिलाने का श्रेय जाता है.

एक जमाने में क्लार्क थे येदियुरप्पा

बीएस येदियुरप्पा आर्ट्स से ग्रेजुएट हैं. 1965 में वह समाज कल्याण विभाग में क्लर्क बने. बाद में वे शिकारीपुर चले गए, जहां उन्होंने वीरभद्र शास्त्री चावल मिल में क्लर्क की नौकरी मिल गई. 1967 में वीरभद्र शास्त्री यानी अपने मालिक की बेटी मैत्रोदेवी से उन्होंरने शादी कर ली. बाद में उन्होंने शिमोगा में हार्डवेयर की दुकान खोल ली येदियुरप्पा के दो पुत्र बीवाई राघवेंद्र और विजयेंद्र और तीन पुत्रियां अरुणा देवी, पद्मावती और उमादेवी हैं.

पत्नीं की रहस्यमयी मौत बनी परेशानी का कारण

2004 में येदियुरप्पा की पत्नी की कुएं में गिरने से मौत हो गई थी. बताया गया कि मैत्रो देवी की मौत पानी निकालते वक्त हो गई थी. संभवत: उनका पैर फिसल गया था. बाद में येदियुरप्पा के गृहनगर शिमोगा की अदालत ने इस मामले में नए सिरे से जांच करने का आदेश भी दिया था. कोर्ट ने यह आदेश एडवोकेट आर शेषाद्री की शिकायत पर सुनवाई के बाद दिया था. हालांकि, बाद में इस मामले की जांच हुई और केस बंद कर दिया गया.

येदियुरप्पाा पहली बार 2007 में, दूसरी बार 2008 में और अब तीसरी बार 2018 में सीएम बने, लेकिन किस्मत ने उनके साथ हर बार खेल किया. वह एक बार भी कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए. येदियुरप्पा अगर इस बार बने तो भी उनके लिए कार्यकाल पूरा मुमकिन नहीं है. देखना होगा कि 26 जुलाई 2019 को चौथी बार ली गई शपथ के बाद क्याा उन्हेंर किस्म त का सहारा मिलेगा.

येदियुरप्पा 2007 में जनता दल-सेक्यु लर के समर्थन से पहली बार कर्नाटक के सीएम बने थे, लेकिन तब उनके हाथ सत्ताप केवल 7 दिन तक रह सकी थी. 12 नवंबर 2007 को उन्होंने सीएम पद की शपथ ली और 19 नवंबर 2007 को पद से इस्तीेफा देना पड़ गया.

2008 विधानसभा चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी. इसके बाद येदियुरप्पा़ ने दूसरी बार कर्नाटक के सीएम पद की शपथ ली और 3 साल 62 दिन तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर रहे. 2018 में येदियुरप्पाब ने 17 मई को सीएम पद की शपथ ली, लेकिन 19 मई को उन्हें इस्तीफा देना पड़ा गया. 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी पर येदियुरप्‍पा बहुमत नहीं जुटा सके.

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