बिजली के झटके, जहरीले इंजेक्शन और गोली मारकर…कैदियों को यूं दी जाती है सजा-ए-मौत

अंग्रेजी हुकूमत के दौर से ही भारत में मृत्युदंड की सजा के तौर पर फांसी का चलन है. जल्लाद कैदी को फांसी के फंदे पर लटकाता है जबकि दुनिया के अलग-अलग देशों में मृत्युदंड के तरीके अलग हैं.
nirbhya gang rape, बिजली के झटके, जहरीले इंजेक्शन और गोली मारकर…कैदियों को यूं दी जाती है सजा-ए-मौत

दिल्ली में साल 2012 में निर्भया गैंगरेप को अंजाम देने वाले चार गुनाहगारों को फांसी की सजा सुनाई गई है. इनमें से मुकेश, विनय और पवन की पुनर्विचार याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया है वहीं अक्षय सिंह की पुनर्विचार याचिका कोर्ट में अभी पेंडिंग है. माना जा रहा है कि चारों दोषियों को दिसंबर के अंत तक फांसी दी जा सकती है.

अंग्रेजी हुकूमत के दौर से ही भारत में मृत्युदंड की सजा के तौर पर फांसी का चलन है. जल्लाद कैदी को फांसी के फंदे पर लटकाता है जबकि दुनिया के अलग-अलग देशों में मृत्युदंड के तरीके अलग हैं. जिसमें सिर कलम करना, गोली मारना, जहरीला इंजेक्शन देना, जहरीली गैस और इलेक्ट्रोक्यूशन जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर मृत्युदंड दिया जाता है. जानें मृत्यदंड को लेकर किस देश में किस तरह की सजा का प्रावधान है…

अमेरिका- जहरीली गैस, फांसी, गोली मारकर और इलेक्ट्रोक्यूशन (बिजली के झटके)

चीन- गोली मारकर और जहरीला इंजेक्शन देकर

फिलिपींस- जहरीला इंजेक्शन देकर

बांग्लादेश, सीरिया, कैमरून, कुवैत, मिस्र, ईरान और युगांडा- फांसी और गोली मारकर

सूडान और अफगानिस्तान- फांसी, पथराव कर और गोली मारकर

दक्षिण कोरिया, मलेशिया, जिम्बाम्बे, तंजानिया और बोत्सवाना- फांसी

थाईलैंड, टोगो, बहरीन, चिली, तुर्कमेनिस्तान, घाना, आर्मीनिया और इंडोनेशिया- गोली मारकर

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