निर्भया केस: डेथ वारंट के बाद SC में क्यूरेटिव पिटिशन दाखिल, एक दोषी ने लगाई फांसी रोकने की गुहार

चारों दोषियों को नोटिस देकर समय दिया जा चुका है. मंगलवार को डेथ वॉरंट जारी होने के बाद भी इन्हें 14 दिन का पर्याप्त समय दिया जा रहा है. अगले दिन चारों दोषियों को सजा से संबंधित कागजात भी दे दिए गए थे.
Nirbhaya gang rape case one convict filed curative petition, निर्भया केस: डेथ वारंट के बाद SC में क्यूरेटिव पिटिशन दाखिल, एक दोषी ने लगाई फांसी रोकने की गुहार

दिल्ली के सात साल पहले हुए निर्भया गैंगरेप केस में फांसी की सजा पाए चार दोषियों में एक विनय कुमार शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटिशन दाखिल की है. पटियाला हाउस कोर्ट ने सात जनवरी को चारों हैवानों का डेथ वारंट जारी कर दिया था. विनय के वकील ने पिटिशन में फांसी की सजा पर रोक लगाने की मांग की है. कोर्ट ने चारों दोषियों को 22 जनवरी की सुबह सात बजे तिहाड़ जेल में एक साथ फांसी पर लटकाने का आदेश दिया था.

उत्तर प्रदेश प्रशासन की ओर से चारों को फांसी देने के लिए दिल्ली के तिहाड़ जेल को जल्लाद भेजे जाने के लिए हामी भर दी गई है. तिहाड़ जेल ने यूपी से दो जल्लाद की मांग की थी. वहां कानपुर में रहने वाला जल्लाद बूढ़ा हो गया है, इसलिए उम्मीद है कि मेरठ वाला जल्लाद ही इन चारों को फांसी पर लटकाएगा.

तिहाड़ जेल के अफसरों के मुताबिक 22 जनवरी की सुबह चारों दोषियों को फांसी पर लटकाया जाएगा. इससे पहले अगर सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटिशन या फिर राष्ट्रपति के नाम दया याचिका देते हैं, तो अंतिम फैसले के वक्त तक फांसी विचाराधीन रखी जाएगी. नियम के मुताबिक उस स्थिति में  इनकी दया याचिका खारिज हो जाएगी, क्योंकि 14 दिन का समय और दिया जाना अब मुश्किल लगता है.

इससे पहले इन्हें नोटिस देकर समय दिया जा चुका है. मंगलवार को डेथ वॉरंट जारी होने के बाद भी इन्हें 14 दिन का पर्याप्त समय दिया जा रहा है. अगले दिन बुधवार को ही चारों दोषियों को सजा से संबंधित कागजात भी दे दिए गए थे.

जेल अधिकारियों की ओर से बताया गया है कि इनके नाम डेथ वॉरंट जारी होते ही अब सारे संबंधित पत्राचार लाल रंग के लिफाफे में होगा. यह इसलिए किया जाता है ताकि लाल रंग देखते ही सब इसे अर्जेंट समझ जाएं. उन्हें पता चल जाए कि इसमें किसी भी तरह की कोई कोताही या देरी नहीं करनी है.

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