nirbhaya gang rape case, Nirbhaya Case: नया डेथ वॉरंट जारी, जानें दोषियों को कैसे दी जाएगी फांसी…
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Nirbhaya Case: नया डेथ वॉरंट जारी, जानें दोषियों को कैसे दी जाएगी फांसी…

डेथ वारंट जारी होने के बाद से ही कैदी से काम करवाना बंद कर दिया जाता है. उस पर 24 घंटे पैनी निगाह होती है. उसका दिन में 2 बार मेडिकल चेकअप भी होता है.
nirbhaya gang rape case, Nirbhaya Case: नया डेथ वॉरंट जारी, जानें दोषियों को कैसे दी जाएगी फांसी…

पटियाला हाउस कोर्ट ने दिल्ली में साल 2012 में निर्भया गैंगरेप को अंजाम देने वाले सभी दोषियों का नया डेथ वॉरंट जारी कर दिया है. नए डेथ वॉरंट के मुताबिक चारों दोषियों अक्षय, विनय, मुकेश और पवन को 3 मार्च की सुबह 6 बजे फांसी दी जाएगी. कोर्ट ने यह फैसला निर्भया के माता-पिता की उस याचिका पर सुनाया है, जिसमें उन्होंने चारों दोषियों का नया डेथ वॉरंट जारी करने की मांग की थी.

क्या है डेथ वारंट?

ब्लैक वारंट कोर्ट जारी करता है, इसे ही आम भाषा मे डेथ वारंट भी कहते हैं, कानून की भाषा मे फॉर्म नम्बर 44 होता है, ये ब्लैक वारंट जेल सुपरिटेंडेंट को भेजा जाता है. उसके बाद सुपरिटेंडेंट वक़्त तय करके कोर्ट को बताता है.

  • डेथ वारंट जारी होने के बाद से ही कैदी से काम करवाना बंद कर दिया जाता है. उस पर 24 घंटे पैनी निगाह होती है. उसका दिन में बार मेडिकल चेकअप भी होता है.
  • इसी बीच कैदी के डेढ़ गुना वजन की डमी से टेस्ट भी होता हैरस्सी और फांसी घर को चेक किया जाता है. जेल मैन्युअल में इस बात का कोई जिक्र नहीं है कि रस्सी नई ही होनी चाहिएलेकिन ये जरूर लिखा है कि रस्सी कैसी होगीकितनी लंबी होगीइसमे डॉक्टर की सलाह भी ली जाती है कि नोट कहां और कितनी लंबाई पर बांधा जाएगा. कुल मिलाकर रस्सी की जांच की जाती है.
  • तरह के फट्टे होते हैं यानी टेबलजिनपर फांसी दी जाती हैये कैदियों के वजन के हिसाब से होता है
  • आखिरी इच्छा जैसा कोई शब्द जेल मैन्युअल में नहीं लिखा है. ये एक ह्यूमन जेस्चर होता हैकैदी को जब उसके परिवार से मिलवाया जाता है तो कई बार फैमिली वाले भी ये सवाल कैदी से पूछते हैं. वैसे तो जो खाना बना होता है एक रात पहले वही दिया जाता हैलेकिन स्पेशल डिमांड पर खाना देना वो सुपरिटेंडेंट का निजी अधिकार है. उसका जेल के कानून से कोई लेना देना नहीं ये ह्यूमन जेस्चर पर निर्भर है.
  • जिस दिन फांसी दी जाती हैउस दिन जेल मैन्युअल के हिसाब से कैदी को सूरज निकलते ही उठाया जाता है. साथ हीसुपरिटेंडेंट उस दिन आई सारी मेलडाक चेक करता है कहीं कोई नया फरमान तो नहीं आया फांसी को लेकर.
  • ये चेक करने के बाद जेल का सुपरिटेंडेंट DM या उसके नुमाइंदे ADM, जल्लाद और मेडिकल टीम के साथ पहले ही फांसी घर में मौजूद होता है. वहां सब चेक किया जाता है. मेडिकल टीम की मदद से रस्सी की लंबाई तय की जाती है. अगर फांसी के दौरान कुछ भी गलती हुई तो जिम्मेदारी सिर्फ सुपरिटेंडेंट की होगी.
  • वहीं दूसरी तरफ डिप्टी सुपरिटेंडेंट कैदी के सेल में उसके साथ मौजूद होगा, 6 गार्ड भी वहां रहेंगे. जैसा ही सुपरिटेंडेंट डिप्टी सुपरिटेंडेंट को कैदी को फांसी घर में लाने का आदेश देगाफिर सेल से फांसी घर तक मार्च होगी. कैदी के दोनों हाथ पीछे की तरह बांध दिए जाते हैं. उस वक़्त बाकी सभी कैदियों को उनकी सेल में बंद कर दिया जाएगा. जेल में सन्नाटा पसर जाता है. हथियारों से लैस गार्ड्स की संख्या हर सेल और फांसी घर के आसपास बढ़ा दी जाती है.
  • मार्च के दौरान डिप्टी सुपरिटेंडेंट सबसे आगे चलता हैकैदी के आगे और पीछे दो- दो गार्ड होते हैंबाकी दो गार्ड उसके दोनों हाथ पकड़ कर चलते हैं.
  • फांसी घर के बाहर कैदी को रोका जाता है उसे काले रंग का नकाब पहनाया जाता हैताकि फांसी घर के अंदर का कोई दृश्य वो देख न पाएयानी डरे और घबराए नहींये जेल के कानून का हिस्सा है.
  • जैसे ही कैदी को फांसी के तख्ते पर खड़ा किया जाता है जल्लाद उसके दोनों पैर रस्सी से बांध देता हैं. जल्लाद कैदी के गले मे फांसी का फंदा डालता हैपहले वो ढीला रखा जाता हैउसके बाद मेडिकल टीम रस्सी चेक करती हैसब कुछ हो जाने के बाद जल्लाद और कैदी के अलावा फांसी के तख्ते पर मौजूद सभी को नीचे आने के आदेश दिए जाते हैं. जल्लाद फांसी के फंदे को कसता है और लीवर खींच देता है.
  • करीब आधे घंटे तक कैदी को फांसी पर लटकाया जाता हैफिर मेडिकल टीम जब तय कर लेती है कि वो मर चुका हैतो फिर उसका डेथ सर्टिफिकेट जारी कर सुपरिटेंडेंट को देती है. जिसे जेल की तरफ से ब्लैक वारंट के साथ अटैच कर वापस कोर्ट भेज दिया जाता है.
  • जेल मैन्युअल के हिसाब से बॉडी पूरे सम्मान के साथ कैदी के परिवार वालो तक एम्बुलेंस से भिजवाई जाती है. अगर सुपरिटेंडेंट को लगता है कि बॉडी परिवार को देने के बाद माहौल बिगड़ सकता है तो वो उसके हैंडओवर करने के लिए बाध्य नही है. जेल में अंतिम संस्कार कर सकते हैं.

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