पाकिस्तान ने भारत को सौंपे 325 करोड़ रुपये, निजाम फंड केस में मिली थी मात, जानें क्या है पूरा मामला

इंग्लैंड एंड वेल्स के हाईकोर्ट ने 71 साल पुराने केस में निजाम के 35 मिलियन पाउंड की रकम पर पाकिस्तान का दावा खारिज कर भारत और निजाम के दो वंशजों के पक्ष में फैसला सुनाया था.

इंग्लैंड एंड वेल्स के हाईकोर्ट में 71 साल पुराने निजाम फंड केस हारने के बाद पाकिस्तान ने भारत को 35 मिलियन पाउंड (325 करोड़ रुपये) सौंप दिए हैं. पाकिस्तान ने यह रकम ब्रिटेन में भारतीय दूतावास को दे दी है.

जस्टिस स्टिस स्मिथ ने अक्टूबर 2019 में 71 साल पुराने केस में निजाम के 35 मिलियन पाउंड की रकम पर पाकिस्तान का दावा खारिज कर भारत और निजाम के दो वंशजों के पक्ष में फैसला सुनाया था.

हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए पाकिस्तान को आदेश दिया था कि वह दशकों चली इस कानूनी कार्रवाई के दौरान आए खर्चे का 65 फीसदी हिस्सा भारत और रियासत के दोनों पक्षों को चुकता करे. पाकिस्तान ने 65 फीसदी पैसा (26 करोड़ रुपये) भी भारत को सौंपे हैं.

भारत-पाक विभाजन से जुड़ा है किस्सा

कहा जाता है कि जब भारत-पाकिस्तान के बीच बटवारा हुआ तब हैदराबाद के तत्कालीन निजाम उस्मान अली खान ने लंदन के बैंक में पैसे जमा करवाए थे. निजाम को पाक से बेहद लगाव था. उन्होंने पाक की मदद के तौर पर भेजने चाहे लेकिन उस वक्त के नियमों के मुताबिक भारत से सीधे पाकिस्तान पैसे नहीं भेज सकते थे. इसलिए निजाम ने ये रकम ब्रिटेन में पाक उच्चायुक्त के खाते में जमा करवाई थी.

इस बात की भनक भारत सरकार को लगने के बाद पाकिस्तान के उच्चायुक्त निजाम के पैसों का इस्तेमाल नहीं कर सके. इसके बाद निजाम के वंशजों ने इन पैसों पर अपना दावा ठोंक दिया. इस तरह से इस रकम के तीन दावेदार तैयार हुए पाकिस्तान, भारत और निजाम के वंशज. खजाने को लेकर पाकिस्तान ने दावा किया था कि निजाम ने उन्हें ये रकम हथियारों के बदले में दी थी. इस दावे को यूके कोर्ट ने खारिज कर दिया और आखिर में यूके कोर्ट का फैसला भारत सरकार के पक्ष में गया.

संपत्ति से जुड़ी खास बातें

  • ब्रिटेन के एक बैंक में जमा निजाम हैदराबाद के खजाने को लेकर भारत-पाकिस्तान के बीच दशकों से लड़ाई चल रही थी, जिस पर यूके कोर्ट ने ये फैसला सुनाया था.
  • हैदराबाद के निजाम उस्मान अली खान ने देश के विभाजन के बाद लंदन स्थित नेटवेस्ट बैंक में 1,007,940 पौंड यानि करीब 8 करोड़ 87 लाख रुपये जमा कराए थे. आज के डेट में इन रुपयों की कीमत 35 मिलियन पौंड यानि लगभग 3 अरब 8 करोड़ 40 लाख रुपये हो चुकी है.
  • इस भारी भरकम रकम पर भारत और पाकिस्तान दोनों ही देश अपना हक जता रहे थे.
  • रुपयों को लेकर पाकिस्तान के खिलाफ चल रही इस कानूनी लड़ाई में निजाम के वंशज प्रिंस मुकर्रम जाह और उनके छोटे भाई मुफ्फखम जाह ने भारत सरकार का साथ दिया.
  • 1948 में हैदराबाद के तत्कालीन निजाम ने ब्रिटेन में ये रकम पाकिस्तान के उच्चायुक्त को भेजी थी. तब से ये रकम यूके रहीमटोला के अकाउंट में जमा है.

ये भी पढ़ें-

इमरान संग गलबहियां कर तुर्की के राष्‍ट्रपति ने की कश्‍मीर पर उलटबांसी, MEA ने कहा- तथ्‍य जान लें फिर बोलें

भारत से खाली हाथ जाने की तैयारी में नहीं डोनाल्‍ड ट्रंप, पढ़ें क्‍या है उनका प्‍लान