नीदरलैंड में इस तरह आ गया ‘रामराज्य’ !

राम के देश में तो नहीं लेकिन हिंदुस्तान से हजारों किलोमीटर दूर नीदरलैंड में ज़रूर रामराज्य उतर आया है. नीदरलैंड में अगर सुशासन स्थापित हो गया तो आखिर कैसे.. जानिए..

अगर आपसे कहा जाए कि नीदरलैंड में रामराज्य आ गया है  तो आप भरोसा करेंगे?

कर लीजिए, क्योंकि वाकई ऐसा हो गया है. पौने 2 करोड़ की आबादी वाले देश में जेल की ज़रूरत ही नहीं बची है. दरअसल देश में क्राइम का आंकड़ा ऐसा गिरा कि पहले से बनी जेलों के इस्तेमाल का नया रास्ता खोजा गया.

2013 में पूरे नीदरलैंड की जेलों में महज़ 19 कैदी ही थे. 2018 आते-आते वो भी नहीं बचे. देश का न्याय मंत्रालय कह रहा है कि अगले पांच सालों में कुल अपराध में 0.9% की गिरावट तय है. इसके बाद सारी जेलें बंद करने की प्लानिंग चल रही है. वैसे जेलें तो यहां 2016 से ही बंद होनी शुरू हो गई थीं जब एम्सटर्डम और बिजल्मबर्ज की जेलों पर ताले पड़ गए थे. इन जेलों को तोड़कर शरणार्थियों के लिए एक बड़ा सेंटर खोला गया जहां स्किल डेवलेपमेंट की क्लासें लगनी शुरू हो गईं.

 

वैसे अपराध कम होने से जेलों का बंद होना अच्छा है, लेकिन इसके साइड इफेक्ट्स भी हैं. जेलों में काम करनेवाले लोगों की नौकरियां जा रही हैं. करीब दो हजार लोगों का रोजगार दांव पर लग गया. सात सौ का तबादला किसी दूसरे विभाग में करके उनकी नौकरियां बचाई गईं लेकिन बचे हुए करीब 1300 लोगों के लिए काम तलाशने का काम ज़ोरशोर से चल रहा है.

 

हालात ये हो चले थे कि अपने लोगों की नौकरी बनी रहे इसके लिए नीदरलैंड ने नॉर्वे से ही कैदी इंपोर्ट कर लिए थे. ये जेल बेहद आधुनिक हैं. इलेक्ट्रॉनिक एंकल मॉनिटरिंग सिस्टम के ज़रिए कैदियों के पांव में ऐसी डिवाइस पहनाई जाती हैं कि कैदी एक सीमा से बाहर नहीं जा पाते. अगर वो जाते हैं तो पुलिस को सूचना मिल जाती है और उन्हें वापस लाया जाता है.

नीदरलैंड की जेलें पहले से ही आदर्श जेलें मानी जाती रही हैं जहां कैदियों को सजा देने पर ज़ोर नहीं रहता बल्कि उन्हें काम करने और मुख्यधारा में लौटाने की कोशिश की जाती हैं. लगता है नीदरलैंड का जेल सिस्टम अब अतीत की बात हो जाएगी क्योंकि जब ना रहेगा अपराध, तो ना होगा अपराधी और ना रहेंगी जेल.