जम्मू कश्मीर में स्थितियां सामान्य होने तक नहीं देंगे विरोध प्रदर्शन की अनुमति: DGP दिलबाग सिंह

बीते मंगलवार को जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम फारुक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) की बहन और बेटी समेत एक दर्जन से ज्यादा महिलाओं को श्रीनगर में धरना देने की वजह से गिरफ्तार कर लिया गया था.

श्रीनगर: जम्मू कश्मीर से अब लगभग सभी तरह के प्रतिबंधों को हटा दिया गया है. लेकिन अभी किसी भी तरह के विरोध प्रदर्शनों की अनुमति नहीं दी जा रही है. ऑन लाइन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जम्मू कश्मीर पुलिस प्रमुख दिलबाग सिंह ने कहा है कि जब तक घाटी में स्थितियां सामान्य नहीं हो जाती तब तक किसी तरह के प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलेगी.
उन्होंने कहा, ‘जब तक स्थिति बेहतर नहीं हो जाती तब तक किसी तरह के प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलेगी फिर चाहें वो धरना ही क्यों ना हो.’ उन्होंने कहा कि कश्मीर घाटी में प्रतिबंधों को पूरी तरह से हटा दिया गया है.

बीते मंगलवार को जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम फारुक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) की बहन और बेटी समेत एक दर्जन से ज्यादा महिलाओं को श्रीनगर में धरना देने की वजह से गिरफ्तार कर लिया गया था. ये महिलाएं विशेष राज्य का दर्जा खत्म होने की वजह से प्रदर्शन कर रही थीं. इन महिलाओं में अधिकतर की उम्र 60 से 80 साल थी और उन्हें पर्सनल बॉन्ड भरने के बाद गुरुवार को रिहा कर दिया गया.

दिलबाग सिंह ने कहा, ‘इस तरह के किसी भी प्रदर्शन को मंजूरी देने से पहले हमारा प्रयास पहले शांति कायम करना है.’ उन्होंने कहा कि कुछ महिलाओं के हाथ में जो पोस्टर थे, वह बहुत अच्छे नहीं थे और वे निश्चित रूप से कानून और व्यवस्था के हित में नहीं थे. इसके बाद ही प्रभावी कार्रवाई की गई.’

जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया उनमें डॉ अब्दुल्ला की बहन सुरैया अब्दुल्ला, उनकी बेटी साफिया अब्दु्ल्ला खान और हवा बसीर, चीफ जस्टिस बशीर अहमद खान की पत्नी थीं. ये महिलाएं पोस्टर लेकर श्रीनगर के लाल चौक के पास प्रताप पार्क में इकट्ठा हुए थे. इन्होंने जब प्रदर्शन शुरू किया तो पुलिस ने उन्हें कस्टडी में ले लिया. उन्हें पास के पुलिस स्टेशन में ले जाया गया और फिर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

दिलबाग सिंह ने कहा, ‘भड़काऊ चीजें केवल कहे गए शब्दों से नहीं फैलतीं बल्कि भड़काऊ चीजें पोस्टर से भी फैलती हैं.’ सिंह ने कहा, ‘जिन प्रतिबंधों को श्रीनगर में लगाया गया था उनका सम्मान करना चाहिए था. महिला प्रदर्शनकारियों को सलाह दी गई थी कि वे डिप्टी कमीशन के पास जाएं और अनुमति मांगें.’