जम्मू कश्मीर: विधान सभा चुनावों का कोई संकेत नहीं, स्थानीय स्तर पर चलेगी सरकार!

प्रत्येक जिले को 14 क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों में विभाजित किया जाएगा, जिसके लिए चुनाव होंगे. विजेता एक अध्यक्ष और एक उपाध्यक्ष का चुनाव कर सकेंगे.

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  • Publish Date - 11:33 am, Sun, 18 October 20
महबूबा मुफ्ती के घर फारूक और उमर अब्दुल्ला मीटिंग (File Photo)

महबूबा मुफ्ती समेत सभी वरिष्ठ राजनेताओं की रिहाई के बाद शनिवार को केंद्र ने जम्मू कश्मीर के पंचायती राज अधिनियम 1989 में संशोधन किया. ये संशोधन इसलिए किया गाय जिससे जिला विकास परिषद (डीडीसी) की स्थापना की जा सके. जिसके सदस्य सीधे केंद्रशासित प्रदेश के मतदाताओं के ज़रिए चुने जाएंगे.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक प्रत्येक जिले को 14 क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों में विभाजित किया जाएगा, जिसके लिए चुनाव होंगे. विजेता एक अध्यक्ष और एक उपाध्यक्ष का चुनाव कर सकेंगे. जिला विकास बोर्ड की जगह परिषद होंगी. पहले (जब जम्मू-कश्मीर एक राज्य था) बोर्ड की अध्यक्षता एक कैबिनेट मंत्री या एक राज्य मंत्री करते थे. साथ ही इसमें विधायक, एमएलसी और संसद सदस्य शामिल होते थे. जब जम्मू कश्मीर एक राज्य था, उस वक्त DDB योजना और विकास के एक केंद्र बिंदु था. सभी जिलों को वित्त पोषण बोर्ड द्वारा अनुमोदित विकास योजनाओं के ज़रिए किया जाता था. योजना के लिए संसाधन राज्य के बजट से तैयार किए जाते थे, और इसमें विभिन्न केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत किए गए आवंटन भी शामिल होते थे.

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10 दिनों के भीतर जारी हो सकती है अधिसूचना

प्रशासन के सूत्रों ने कहा कि प्रत्येक जिले में 14 क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव कराने की अधिसूचना एक सप्ताह या 10 दिनों के भीतर जारी की जा सकती है. केंद्र शासित प्रदेश के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इससे सरकार के त्रिस्तरीय – स्थानीय निकायों को सशक्त बनाया जाएगा. इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर राजनीतिक प्रक्रिया को गहरा करना है. वहीं कुछ अन्य पर्यवेक्षकों ने कहा कि यह अनिवार्य रूप से सरकार (राज्य या केंद्रशासित प्रदेश) के दूसरे स्तर को समाप्त करते हुए सुझाव देता है कि यूटी में विधानसभा चुनाव जल्द नहीं हो सकते.

राजनीति का अंत करने की कोशिश

नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला ने कहा कि पार्टी अभी संशोधन के उद्देश्य को समझ रही है. पीडीपी के वरिष्ठ नेता नईम अख्तर ने कहा कि इससे राजनीति का अंत हो जाएगा. उद्देश्य विध्वंसकारी हैं, जिससे कोई मिलकर आवाज़ न उठा सके. यह जम्मू और कश्मीर के लोगों के आवाज़ को दबाने की कोशिश है. नेशनल कांफ्रेंस के एक नेता ने कहा कि इसके दूरगामी परिणाम होंगे. ये विधायकों की भूमिका को कम करने के लिए किया गया है.

प्रशासन के अधिकारियों के मुताबिक इस वक्त में राजनीतिक प्रक्रिया शुरू करने के लिए स्थानीय स्तर पर एक संरचना की कल्पना करना महत्वपूर्ण हो गया था.एक अधिकारी ने कहा कि कुछ विधायकों ने डीडीसी चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है. 14 सीधे निर्वाचित प्रतिनिधियों के अलावा, DDC में जिले के भीतर विधायक (और जब विधानसभा चुनाव होते हैं) और ब्लॉक डेवलपमेंट काउंसिल के अध्यक्ष शामिल होंगे.

निर्वाचन क्षेत्र का परिसीमन पहला कदम

डीडीसी के संविधान की ओर पहला कदम 14 निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन होगा. उपायुक्त डीडीसी के अधिकार क्षेत्र के भीतर के क्षेत्र को 14 एकल सदस्यीय क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों में विभाजित करने के लिए जिम्मेदार होंगे. पंचायती राज अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं के लिए आरक्षण होगा. जिले की वार्षिक और पंचवर्षीय विकास योजनाओं को ग्राम पंचायतों, खंड विकास परिषदों और जिला विकास परिषदों की तीन स्तरीय प्रणाली द्वारा अंतिम रूप दिया जाएगा.

ऐसे होगा काम

डीडीसी खंड विकास परिषदों से योजनाएं प्राप्त करेंगे और जांच के बाद उन्हें “सरकारी दिशानिर्देशों, मानदंडों और नियमों के पालन के लिए” भेजेंगे और समेकित योजना जिला योजना समिति को सौंपेंगे. डीडीसी पांच साल की अवधि के लिए चुने जाएंगे और जिले के अतिरिक्त जिला विकास आयुक्त (एडीसी) जिला विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी होंगे. प्रत्येक डीडीसी पांच स्थायी समितियों का गठन करेगी जिसमें वित्त, विकास, सार्वजनिक कार्य, स्वास्थ्य, शिक्षा और कल्याण शामिल होगा. प्रत्येक जिले में एक जिला योजना समिति भी होगी, जिसमें संसद सदस्य चेयरपर्सन के रूप में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करेंगे.

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