बुरहान वानी के गांव में नहीं पड़ा एक भी वोट, पुलवामा हमलावर के गांव में सिर्फ 15

साल 2016 में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में वानी के मारे जाने के बाद घाटी में लंबे समय तक अशांति रही थी जिसमें 100 लोगों की जान गई थी.

नई दिल्ली: सोमवार को हुई वोटिंग के दौरान आतंकवादी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन के पोस्टर ब्वाय रहे बुरहान वानी के गांव से किसी भी व्यक्ति ने मतदान नहीं किया. वहीं दूसरी तरफ पुलवामा में सेना के काफिले पर हुए आतंकी हमला करने वाले हमलावर के गांव में महज 15 लोगों ने वोट डाले.

अधिकारियों ने बताया कि घाटी में आतंकवाद का दबदबा वाले क्षेत्र दक्षिण कश्मीर में और कई अन्य आतंकवादी कमांडरों के गांवों में भी मतदान नहीं हुआ. त्राल क्षेत्र में वानी के शरीफाबाद गांव ने मतदान से दूर रहने का फैसला किया और गांव से किसी ने भी वोट नहीं डाला. गुंडीबाग जहां पुलवामा हमले का आत्मघाती हमलावर आदिल डार रहता था, महज 15 वोट पड़े. डार ने पुलवामा में विस्फोटकों से लदी एक कार CRPF के काफिल के वाहन से टकरा दी थी. उस हमले में CRPF के 40 जवान शहीद हो गए थे.

आतंकवादी संगठन अंसार-गजावत-उल हिंद के प्रमुख जाकिर मुसा के गांव नूराबाद, हिज्बुल मुजाहिदीन के कमांडर रियाज नाइकू के गांव बेघपुरा, और 14 फरवरी के आतंकवादी हमले के मास्टरमाइंड मुदासिर खान के गांव शेखपुरा में भी मतदान नहीं हुआ. 2016 में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में वानी के मारे जाने के बाद घाटी में लंबे समय तक अशांति रही थी जिसमें 100 लोगों की जान गई थी.

आतंकवादियों की पकड़ माने जाने वाले अनंतनाग लोकसभा क्षेत्र में भी सड़कें सूनी रहीं और यहां सिर्फ 3 फीसदी मतदान हुआ. किसी भी बूथ पर 25 फीसद से ज्यादा मतदान नहीं हुआ.