भारत में Lockdown में ढील पर नोबेल पुरस्कार विजेता ने जताई चिंता, कहा- आने वाले दिनों में बढ़ सकते हैं केस

पीटर चार्ल्स डोहर्टी (Peter Charles Doherty) ने चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में Covid-19 मामलों की संख्या में वृद्धि होगी. उन्होंने कहा कि वैक्सीन मिल जाने तक लॉकडाउन (Lockdown) के अलावा इसे रोकने का कोई और रास्ता नहीं है.

Nobel laureate Peter Charles Doherty concern, भारत में Lockdown में ढील पर नोबेल पुरस्कार विजेता ने जताई चिंता, कहा- आने वाले दिनों में बढ़ सकते हैं केस

नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize) विजेता पीटर चार्ल्स डोहर्टी (Peter Charles Doherty) ने भारत और अन्य घनी आबादी वाले देशों को कोरोनावायरस लॉकडाउन (Coronavirus Lockdown) में ढील देने पर चिंता जताई है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पूरी तरह से लॉकडाउन करना आर्थिक और सामाजिक दोनों ही रूप से असंभव है.

दरअसल PTI न्यूज एजेंसी को दिए एक ई-मेल इंटरव्यू में डोहर्टी ने चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में कोरोनोवायरस मामलों की संख्या में वृद्धि होगी. उन्होंने कहा, “अगर यह पूरी तरह से कठिन विज्ञान की बात है, तो हर जगह बंद रहना चाहिए, लेकिन आर्थिक और सामाजिक रूप से यह असंभव है.”

भारत में क्यों मुश्किल है संक्रमण को रोकना?

नोबेल पुरस्कार विजेता ने कहा कि आने वाले दिनों में संक्रमण की मामले बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन इसे फैलने से तभी रोका जा सकता है, जब लोग अपनी जिम्मेदारी समझें और सूझबूझ के साथ काम करें. उन्होंने आगे कहा, “हालांकि, भारत जैसे घनी आबादी वाले देश में मुझे लगता है कि यह बहुत मुश्किल होगा.”

जब तक वैक्सीन नहीं, तब तक लॉकडाउन ही एक रास्ता

डोहर्टी ने कहा कि जब तक हमारे पास इसका कोई प्रभावी वैक्सीन नहीं आ जाता, तब तक लॉकडाउन के अलावा और कोई विकल्प नहीं है. उन्होंने कहा कि बॉर्डर बंद करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है. साथ ही उन्होंने दक्षिण कोरिया (South Korea) का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे उस एक देश ने बड़े अनुशासित ढंक से बड़े स्तर पर टेस्टिंग और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की है.

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HCQ के इस्तेमाल पर लगे रोक

आस्ट्रेलिया के वैज्ञानिक डोहर्टी ने Covid-19 के इलाज के लिए मलेरिया की दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (HCQ) के इस्तेमाल के खिलाफ भी चेतावनी दी और कहा कि इस बीमारी के लिए वर्तमान किए जा रहे मलेरिया की दवा के परीक्षण को रोक देना चाहिए.

प्लाज्मा थेरेपी हो सकता है प्रभावी इलाज

यह पूछे जाने पर कि क्या प्लाज्मा थेरेपी (Plasma Therapy) Covid-19 के लिए एक प्रभावी उपचार हो सकता है? डोहर्टी ने कहा, “हमारे पास अच्छी तरह से नियंत्रित परीक्षणों की कमी है, लेकिन, खासकर अगर प्लाज्मा का एंटीबॉडी स्तर के लिए परीक्षण किया गया है और उसका अच्छा रिजल्ट मिला है, तो यह मददगार हो सकता है.” उन्होंने कहा कि अगर मुझे यह बीमारी हो जाती है और मुझे प्लाज्मा थेरेपी की पेशकश की गई, तो मैं निश्चित रूप से इसे स्वीकार करूंगा, लेकिन मैं हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन नहीं लूंगा.

मालूम हो कि पीटर चार्ल्स डोहर्टी वर्तमान में मेलबर्न विश्वविद्यालय के डोहर्टी संस्थान में माइक्रोबायोलॉजी एंड इम्यूनोलॉजी डिपार्टमेंट में सेवाएं दे रहे हैं. उन्हें मेडिकल साइंस में उनकी खोज के लिए 1996 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

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