दो फिल्में भी बना चुके हैं नोबेल पाने वाले अभिजीत बनर्जी, 26 साल में 3 से 17 पेज का हुआ CV

साल 1993 में वह दुनिया के जाने-मानें संस्थान मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी (MIT) में फैकल्टी की नौकरी पाने पहुंचे थे. तब उन्होंने तीन पेज का CV दिया था.

अर्थशास्त्र का नोबेल पाने वाले अभिजीत बनर्जी की इस बात को जानकर आपको हैरानी होगी. दरअसल अभिजीत बनर्जी का सीवी 2-4 पेज का नहीं बल्कि 17 पेज का है. साल 1993 में वह दुनिया के जाने-मानें संस्थान मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी (MIT) में फैकल्टी की नौकरी पाने पहुंचे थे. तब उन्होंने तीन पेज का CV दिया था.

इसके बाद जैसे-जैसे अभिजीत नई उपलब्धियां हासिल करते रहे और उनका सीवी लंबा होता गया. आज उनका CV 17 पेज का हो चुका है. इस डॉक्युमेंट को MIT की वेबसाइट पर देखा जा सकता है.

ये हैं फिल्में

CV में उन्होंने सबसे दिलचस्प जानकारी दी है कि वह दो डॉक्युमेंट्री फिल्म का डायरेक्शन कर चुके हैं. उन्होंने वर्ष 2006 में ‘द नेम ऑफ द डिसीज’ और 2019 में ‘टाइम्स ऐंड टेल्स ऑफ डेमोक्रसी’ फिल्में बनाईं.

10 दिन तक तिहाड़ जेल में रह चुके

अभिजीत बनर्जी की इस बात को भी जानकर आपको हैरानी होगी कि वह 10 दिन तक तिहाड़ जेल में रह चुके हैं. लेकिन इस बात का जिक्र खुद उन्होंने अपने एक लेख में किया था. 58 वर्षीय अभिजीत बनर्जी वर्तमान में अमेरिका के मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी (MIT) में अर्थशास्त्र पढ़ाते हैं.

बनर्जी ने साल 1981 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से विज्ञान में स्नातक की डिग्री (बीएससी) लेने के बाद 1983 में जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) से एमए की पढ़ाई की. इसके बाद 1988 में उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पीएचडी पूरा किया.

ये लिखा था लेख में

फरवरी 2016 में जब JNU को लेकर हंगामा शुरू हुआ तभी अभिजीत बनर्जी ने एक लेख लिखा था-“वी नीड थिंकिंग स्पेसेज़ लाइक जेएनयू एंड द गर्वनमेंट मस्ट स्टे आउट ऑफ़ इट” यानि हमें जेएनयू जैसे सोचने-विचारने वाली जगह की जरूरत है और सरकार को निश्चित तौर पर वहां से दूर रहना चाहिए.

इसी लेख में उन्होंने ये भी बताया था कि उन्हें किस तरह से 1983 में अपने दोस्तों के साथ तिहाड़ जेल में रहना पड़ा था, तब JNU के वाइस चांसलर को इन छात्रों से अपनी जान को खतरा हुआ था.

अपने लेख में उन्होंने लिखा था, “ये 1983 की गर्मियों की बात है. हम JNU के छात्रों ने वाइस चांसलर का घेराव किया था. वे उस वक्त हमारे स्टुडेंट यूनियन के अध्यक्ष को कैंपस से निष्कासित करना चाहते थे. घेराव प्रदर्शन के दौरान देश में कांग्रेस की सरकार थी पुलिस आकर सैकड़ों छात्रों को उठाकर ले गई. हमें दस दिन तक तिहाड़ जेल में रहना पड़ा था, पिटाई भी हुई थी. लेकिन तब राजद्रोह जैसा मुकदमा नहीं होता था. हत्या की कोशिश के आरोप लगे थे. दस दिन जेल में रहना पड़ा था.”

दूसरी पत्नी हैं एस्थर डुफ्लो

अभिजीत बनर्जी ने MIT में साहित्य की लैक्चरार अरुंधति तुली से शादी की. अभिजीत और अरुंधति दोनों कोलकाता में एक साथ ही बड़े हुए. 1991 में उनका एक बेटा भी हुआ जिसका नाम कबीर बनर्जी है. मार्च 2016 में कबीर का निधन हो गया. अभिजीत और अरुंधति ने बाद में तलाक ले लिया. इसके बाद अभिजीत ने MIT में ही प्रोफेसर एस्थर डुफ्लो से शादी कर ली.

महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं

  • ब्यूरो ऑफ रिसर्च इन द इकोनॉमिक एनालिसिस ऑफ डेवलपमेंट के पूर्व अध्यक्ष
  • एनबीईआर के रिसर्च एसोसिएट, सीईपीआर के रिसर्च फेलो, अमेरिकन एकेडमी ऑफ आर्ट्स एंड साइंसेज के अध्यक्ष

शैक्षणिक परिचय

  • कोलकाता के साउथ प्वाइंट से प्रारंभिक शिक्षा
  • 1981 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से बीएससी
  • 1983, जेएनयू से पीजी
  • 1988, हार्वर्ड विश्वविद्यालय से पीएचडी

उपलब्धियां

  • प्रोफेसर: मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी (MIT)
  • इंफोसिस अवॉर्ड: 2009, सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में गेराल्ड लैब अवॉर्ड: 2012
  • संयुक्त राष्ट्र टीम में शामिल : 2013, चयन महासचिव बान की मून ने किया था
  • बर्नहार्ड अवॉर्ड: 2014, कील इंस्टीट्यूट फॉर वल्र्ड इकोनॉमिक्स की ओर से

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