तो क्या गांधी परिवार के वफादार मोतीलाल वोरा होंगे कांग्रेस के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष?

बुधवार रात कांग्रेस नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद, मुकुल वासनिक, अहमद पटेल, एके एंटनी, अशोक गहलोत समेत कई अन्य वरिष्ठ नेता माथापच्ची करते रहे कि राहुल गांधी नहीं तो कौन?

नई दिल्ली: कांग्रेस के नए अध्यक्ष कौन होंगे? यह सवाल हवा में घूम ही रही थी कि बुधवार को मीडिया में एक ख़बर आई कि गांधी परिवार के वफ़ादार मोतीलाल वोरा पार्टी के अंतरिम अध्यक्ष होंगे.

हालांकि मोतीलाल वोरा का इस सवाल के जवाब में बस यही कहना है कि उन्हें ऐसी कोई जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा, ‘हम चाहते हैं कि राहुल गांधी ही पार्टी के अध्यक्ष बने रहें. इसीलिए उनका इस्तीफ़ा क़बूल नहीं किया गया है.’

बता दें कि इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे के अध्यक्ष बनने की भी ख़बर आ रही थी. राहुल गांधी का इस्तीफ़ा सार्वजनिक होने के बाद यह सवाल ज़रूर गलियारों में है कि कौन सा नेता कांग्रेस का अध्यक्ष हो सकता है.

इससे पहले, सुबह संसद भवन में राहुल ने पार्टी के शीर्ष नेताओं व सांसदों से साफ कर दिया था कि वह पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं और अब अध्यक्ष नहीं है, लिहाजा नए चीफ पर पार्टी जल्द फैसला ले.

इसी बीच, राहुल के टि्वटर अकाउंट पर भी पहचान बदल ली गई. पहले प्रोफाइल इंट्रो में कांग्रेस अध्यक्ष लिखा था, जिसे इस्तीफा सार्वजनिक करने के बाद कांग्रेस सांसद कर लिया गया.

मोतीलाल वोरा को क्यों बताया जा रहा है नया अध्यक्ष?

दरअसल राहुल गांधी ने इस्तीफ़े की बात सार्वजनिक करते हुए पार्टी नेताओं से नया अध्यक्ष चुनने को कहा है. कांग्रेस संविधान के मुताबिक ऐसी स्थिति में कांग्रेस का सबसे वरिष्ठ महासचिव अस्थायी तौर पर अध्यक्ष का काम-काम संभाल लेता है.

कांग्रेस में मोतीलाल वोहरा सबसे वरिष्ठ महासचिव हैं. ऐसे में जब तक नया अध्यक्ष नहीं चुना जाता मोतीलाल वोरा पार्टी की कमान संभालेंगे. हो सकता है  वो जल्द ही पार्टी कार्यसमिति की बैठक बुलाएं और उसमें ये तय हो कि पार्टी का अगला क़दम क्या होगा.

बुधवार रात कांग्रेस नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद, मुकुल वासनिक, अहमद पटेल, एके एंटनी, अशोक गहलोत समेत कई अन्य वरिष्ठ नेता माथापच्ची करते रहे कि राहुल गांधी नहीं तो कौन?

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बताया जा रहा है कि राहुल अपनी मां और यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी को मेडिकल चेकअप के लिए बाहर ले जाने वाले हैं. यानी कि अगले हफ़्ते होने वाली सीवीसी की बैठक राहुल गांधी की अनुपस्थिति में होगी और माना जा रहा है कि इस बैठक में राहुल गांधी के इस्तीफ़े को ख़ारिज़ कर दिया जाएगा.


क्या बोले राहुल?

चुनावी हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी की ‘‘भविष्य के विकास’’ के लिए उनका इस्तीफा देना जरूरी था.

गांधी ने एक बयान में कहा, ‘‘मेरे लिए कांग्रेस की सेवा करना सम्मान की बात है जिसके मूल्यों और आदर्शों ने हमारे सुंदर राष्ट्र की जीवनदायिनी के रूप में सेवा की है. मैं कृतज्ञता और असीम प्यार के लिए देश और अपने संगठन का कर्जदार रहूंगा.’’

उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर 2019 के चुनाव की हार की जिम्मेदारी मेरी है. हमारी पार्टी के भविष्य के विकास के लिए जवाबदेही होना महत्वपूर्ण है. इसी कारण से मैंने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया है.’’

गांधी ने कहा, ‘‘पार्टी को फिर से खड़ा करने के लिए कड़े फैसलों की जरूरत है और 2019 के चुनाव की विफलता के लिए कई लोगों को जवाबदेह होना होगा. यह उपयुक्त नहीं होता कि मैं दूसरों को जवाबदेह ठहरा देता, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर अपनी जिम्मेदारी को नजरअंदाज कर देता.’’

उन्होंने कहा, ‘‘मेरे कई साथियों ने सुझाव दिया कि मैं अगले कांग्रेस अध्यक्ष को नामित कर दूं. यह महत्वपूर्ण है कि कोई दूसरा हमारी पार्टी का नेतृत्व करे, लेकिन यह मेरे लिए उपयुक्त नहीं है कि मैं उस व्यक्ति का चयन करूं.’’

गांधी ने कहा, ‘‘हमारी पार्टी का गौरवशाली इतिहास और विरासत है. मैं इसके संघर्ष और गरिमा का बहुत सम्मान करता हूं. यह भारत के तानेबाने में समाहित है और मुझे विश्वास है कि पार्टी ऐसे व्यक्ति के बारे में बेहतरीन फैसला करेगी जो साहस, प्रेम और ईमानदारी के साथ नेतृत्व कर सके.’’

उन्होंने कहा, ‘‘इस्तीफा देने के तत्काल बाद मैंने अपने कांग्रेस कार्य समिति में अपने साथियों को सुझाव दिया कि नए अध्यक्ष को चुनने का काम आरंभ करने के लिए लोगों का एक समूह बनाया जाए. मैंने उन्हें ऐसा करने के लिए कहा और इस प्रक्रिया एवं सहज बदलाव के लिए अपना पूरा सहयोग देने का वादा किया.’’

गांधी ने कहा, ‘‘मेरी लड़ाई सिर्फ राजनीतिक सत्ता के लिए कभी नहीं रही है. बीजेपी के प्रति मेरी कोई घृणा या आक्रोश नहीं है, लेकिन मेरी रग-रग में भारत का विचार है.’’ उन्होंने आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘हमारे देश के संस्थागत ढांचे पर कब्जा करने का आरएसएस का घोषित लक्ष्य पूरा हो चुका है. हमारा लोकतंत्र बुनियादी तौर पर कमजोर हो गया है. अब इसका वास्तविक खतरा है कि आगे चुनाव महज रस्म अदायगी भर रह जाए.’’

गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद 25 मई को हुई पार्टी कार्य समिति की बैठक में राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पेशकश की थी. हालांकि कार्य समिति के सदस्यों ने उनकी पेशकश को खारिज करते हुए उन्हें आमूलचूल बदलाव के लिए अधिकृत किया था.

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इसके बाद से गांधी लगातार इस्तीफे पर अड़े हुए थे. हालांकि पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने उनसे आग्रह किया था कि वह कांग्रेस का नेतृत्व करते रहें.