दिल्ली नहीं मध्य प्रदेश है रेप कैपिटल, महिलाओं के लिए उत्तर प्रदेश सबसे असुरक्षित: NCRB 2017

महिलाओं की सुरक्षा की स्थिति को बताते हुए नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) ने उत्तर प्रदेश को महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित राज्य करार दिया है. साथ ही NCRB ने मध्य प्रदेश को रेप कैपिटल बताया है.

महिलाओं की सुरक्षा की स्थिति को बताते हुए नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) ने उत्तर प्रदेश को महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित राज्य करार दिया है. साथ ही NCRB ने मध्य प्रदेश को रेप कैपिटल (बलात्कारों की राजधानी) बताया है.

आंकड़ों को उजागर करते हुए NCRB ने बताया कि साल 2017 में देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 3.59 लाख मामले दर्ज कराए गए. महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में उत्तर प्रदेश शीर्ष पर है, जहां साल 2017 में 56,011 मामले दर्ज कराए गए थे. वहीं मध्य प्रदेश बलात्कारों के मामले में सबसे ऊपर है, जहां बलात्कार के 5562 मामले साल 2017 में दर्ज हुए.

उत्तर प्रदेश के बाद सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में दर्ज कराए गए. साल 2017 में महाराष्ट्र में महिलाओं के खिलाफ हुए अपराधों के 31,979 तो पश्चिम बंगाल में 30,002 मामले दर्ज हुए.

दिल्ली में लगातार घट रहे महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले

रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली 2012 में निर्भया गैंगरेप मामले के बाद से देशभर में रेप कैपिटल के तौर पर बदनाम हो गया था. हालांकि तभी से राज्य में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में कमी दर्ज की गई है. दिल्ली में साल 2017 में महिलाओं के खिलाफ हुए अपराधों के 13,076 मामले दर्ज हुए, जो कि साल 2016 में 15,310 और साल 2015 में 17,222 थे.

अपराध, दिल्ली नहीं मध्य प्रदेश है रेप कैपिटल, महिलाओं के लिए उत्तर प्रदेश सबसे असुरक्षित: NCRB 2017

रिपोर्ट के मुताबिक, ‘महिलाओं के खिलाफ अपराध’ की परिभाषा में हत्या, बलात्कार, दहेज के लिए हत्या, आत्महत्या, एसिड अटैक, महिलाओं के खिलाफ क्रूरता और अपहरण शामिल हैं. 2016 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 3.38 लाख मामले दर्ज किए गए, जबकि 2015 में 3.2 लाख मामले दर्ज किए गए थे.

2016 में, उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ सबसे अधिक अपराध हुए थे. जबकि राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के कुल मामलों का 14.5 प्रतिशत ही दर्ज किया गया था. देश में हुए बलात्कारों में से 12.4 प्रतिशत उत्तर प्रदेश में हुए. ये मध्य प्रदेश के बाद दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा था, मध्य प्रदेश में कुल आंकड़ों के 12.5 प्रतिशत बलात्कार के मामले ​​दर्ज किए गए थे.

ज्यादातर मामलों में अपनों पर ही लगे बलात्कार के आरोप

साल 2017 में मध्य प्रदेश में बलात्कार के सबसे ज्यादा मामले (5,562) दर्ज हुए थे, जिनमें से 97.5 प्रतिशत जान-पहचान के लोगों द्वारा किए गए थे. राजस्थान 3,305 मामलों के साथ दूसरे नंबर पर था, जिनमें से 87.9 प्रतिशत अपराधियों को पीड़ित के जान-पहचान वाला बताया गया. महाराष्ट्र में 98.1 प्रतिशत बलात्कार के मामले दोस्तों, सहयोगियों या रिश्तेदारों के खिलाफ थे.

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रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2017 में 32,559 बलात्कार हुए और इनमें से 93.1 प्रतिशत आरोपी, पीड़ितों के परिचित थे. परिवार के दोस्तों, नौकरी देने वालों, पड़ोसियों या अन्य जान-पहचान वाले व्यक्तियों के खिलाफ 16,591 बलात्कार के मामले दर्ज किए गए थे और 10,553 मामलों में बलात्कार के आरोपी, पीड़ित के दोस्त, ऑनलाइन बने दोस्त (Online Friend), लिव-इन पार्टनर या अलग हो चुके पति (Separated Husband) थे.

विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक मामलों का दर्ज होना और परिवारों का बलात्कार को सामाजिक कलंक के तौर पर दरकिनार करते हुए मामले को पुलिस के ध्यान में ला रहे हैं. यही कारण है कि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश आंकड़ों में 2016 के मुकाबले आंकड़े बढ़े हैं और यह महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित दिख रहे हैं.

सबसे कम मामले नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में हुए दर्ज

आठ राज्यों – अरुणाचल प्रदेश, गोवा, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा में “महिलाओं के खिलाफ अपराध” के सबसे कम आंकड़े दर्ज किए गए. जबकि केंद्र शासित प्रदेशों में, चंडीगढ़ में 453 मामले दर्ज किए. इसके बाद 132 अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में, पुडुचेरी में 147, दमन और दीव में 26, दादरा और नगर हवेली में 20 और लक्षद्वीप में 6 मामले दर्ज किए गए.

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