फर्जी रिपोर्ट के आधार पर पूर्व सैनिक को घोषित कर दिया ‘विदेशी’? FIR दर्ज

सनाउल्‍लाह का सर्विस रिकॉर्ड दिखाता है कि मई 2008 से अगस्‍त 2009 के बीच वह मणिपुर में तैनात थे.
NRC, फर्जी रिपोर्ट के आधार पर पूर्व सैनिक को घोषित कर दिया ‘विदेशी’? FIR दर्ज

नई दिल्‍ली: असम में पूर्व सैनिक को ‘विदेशी’ घोषित किए जाने के मामले में नया मोड़ आया है. मोहम्‍मद सनाउल्‍लाह नाम के रिटायर्ड सैनिक की केस रिपोर्ट पर कथित रूप से हस्‍ताक्षर करने वाले तीन लोगों ने पुलिस के खिलाफ शिकायत की है. उनका दावा है कि मामले में कोई जांच नहीं की गई. तीनों ने बोको पुलिस थाने में जांच अधिकारी चंद्रमल दास पर जांच रिपोर्ट में छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज कराई है.

तीनों गवाहों ने कहा है कि दास ने उनके बयान नहीं लिए और रिपोर्ट पर उनके फर्जी हस्‍ताक्षर किए. इसी रिपोर्ट के आधार पर 30 साल सेना में रहे सनाउल्‍लाह को गिरफ्तार कर पिछले सप्‍ताह डिटेंशन सेंटर में बंद कर दिया गया था. सनाउल्‍लाह असम बॉर्डर पुलिस का हिस्‍सा भी रहे हैं.

क्‍या है मामला?

बोको की ट्रिब्यूनल ने पिछले माह मोहम्मद सनाउल्लाह को विदेशी घोषित करने का आदेश दिया था. इसके बाद 28 मई को पुलिस ने उन्हें उनके घर से हिरासत में ले लिया और फिर डिटेंशन कैम्प भेज दिया. सनाउल्लाह के वकील और उनके परिवार के सदस्यों का कहना है कि वह मूल रूप से भारत के नागरिक हैं. वह 2017 में कैप्टन के पद से रिटायर हुए.

सनाउल्‍लाह का सर्विस रिकॉर्ड दिखाता है कि मई 2008 से अगस्‍त 2009 के बीच वह मणिपुर में तैनात थे. पुलिस की जांच का समय इसी बीच का दिखाया गया है. इस बात को दास ने भी मान लिया है कि सनाउल्‍लाह उस समय असम में नहीं थे.

असम बॉर्डर पुलिस में ही अधिकारी रहे चंद्रमल दास अब रिटायर हो चुके हैं. उन्‍होंने NDTV से बातचीत में कहा कि मोहम्‍मद सनाउल्‍लाह वह व्‍यक्ति नहीं, जिसकी जांच उन्‍होंने की थी. दास का दावा है कि ‘जिस व्‍यक्ति की उन्‍होंने जांच की, उसका नाम भी सनाउल्‍लाह था. शायद प्रशासनिक स्‍तर पर रिपोर्ट्स में गड़बड़ी हुई होगी.’

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