PMO में बोलती है इनकी तूती, जानिए नरेंद्र मोदी के लिए कितने अहम हैं ये तीन अधिकारी

नरेंद्र मोदी लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री बने हैं. उनके भरोसेमंद अधिकारियों को भी एक्‍सटेंशन मिल सकता है.
PM, PMO में बोलती है इनकी तूती, जानिए नरेंद्र मोदी के लिए कितने अहम हैं ये तीन अधिकारी

नई दिल्‍ली: ऊपर लगी तस्‍वीर देख रहे हैं आप? यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकारी टीम है. मोदी के हर फैसले के पीछे इन तीनों की अहम भूमिका रहती है. प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में इनकी मर्जी के बिना कुछ नहीं होता. एक तरह से यह तिकड़ी PM मोदी को हर कदम के पीछे के नफे-नुकसान से अपडेट रखती है. आइए जानते हैं कि इस तस्‍वीर में PM मोदी के साथ दिख रहे अधिकारी कौन हैं और वे मोदी के लिए कितनी अहमियत रखते हैं.

प्रमोद कुमार मिश्रा

सबसे बाईं ओर खड़े हैं पीके मिश्रा. PM मोदी इनपर बेहद भरोसा करते हैं. मिश्रा ने मोदी को RSS प्रचारक से गुजरात का मुख्‍यमंत्री बनने में अहम भूमिका निभाई. 2001 से 2004 के बीच मोदी के गुजरात सीएम रहते हुए मिश्रा उनके प्रधान सचिव हुआ करते थे. मिश्रा के 2008 में सेवानिवृत्त होने के एक दिन बाद मोदी ने उनको गुजरात विद्युत विनियामक आयोग का अध्यक्ष बना दिया. बतौर प्रशासक अपने चार दशक के लंबे कॅरियर में मिश्रा केंद्र सरकार और गुजरात सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे.

शरद पवार के कृषि मंत्री के कार्यकाल के दौरान वह एक दिसंबर, 2006 से लेकर 31 अगस्त, 2008 तक कृषि सचिव थे और उनको राष्ट्रीय कृषि विकास कार्यक्रम और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन लागू करने का श्रेय जाता है. उनके कार्यकाल में कृषि क्षेत्र की जीडीपी में काफी वृद्धि हुई. बाद में वह नेशनल कैपिटल रीजन प्लानिंग बोर्ड के सदस्य सचिव और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सचिव रहे.

मोदी जब प्रधानमंत्री बने तो PMO में मिश्रा को लाने के लिए बाकायदा एडिशनल प्रिंसिपल सेक्रेट्री का पद सृजित किया गया. मिश्रा के पास स्‍वच्‍छ गंगा राष्‍ट्रीय मिशन के निदेशक का प्रभार भी है.

अजीत डोभाल

अजित डोभाल 1968 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और उन्‍होंने लगभग अपना पूरा कॅरियर IB (इंटेलीजेंस ब्यूरो) में बिताया है. वह पूर्व आईबी प्रमुख हैं. वह छह साल पाकिस्तान में रहे हैं. वह पहले पुलिस अधिकारी हैं, जिनको 1988 में कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया था. सुरक्षा से संबंधित मसलों में वह कई मायने में PM मोदी की आंख और कान हैं.

नृपेंद्र मिश्रा

तस्‍वीर में सबसे दाईं ओर मौजूद नृपेंद्र मिश्रा का शीर्ष स्तर के नौकरशाह के रूप में लंबा और असाधारण कॅरियर रहा है. वह ऊर्वरक सचिव से लेकर दूरसंचार सचिव और विनियामक निकाय ट्राई के प्रमुख रहे हैं. उत्तर प्रदेश काडर के 1967 बैच के आईएएस अधिकारी मिश्रा हार्वर्ड विश्वविद्यालय के जॉन एफ कैनेडी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट से लोक प्रशासन में एमपीए हैं. उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से रसायन विज्ञान, राजनीतिशास्त्र और लोक प्रशासन में पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री हासिल की है.

प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा नीति निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. मिश्रा को एक सक्षम और व्यवसाय समर्थक प्रशासक होने का श्रेय जाता है. वह दयानिधि मारन के मंत्री के कार्यकाल के दौरान दूरसंचार सचिव रह चुके हैं और उनको ब्राडबैंड नीति का श्रेय जाता है.

नृपेंद्र मिश्रा 74 साल के हो चुके हैं. 2014 में अध्यादेश के जरिए उनको इस पद पर लाया गया था, लेकिन 75 साल की उम्र सीमा के साथ उनकी संभावना पर विराम लगता है. PM एक आचार संहिता का पालन करते हैं, जहां उनकी मंत्रिपरिषद में 75 साल से अधिक उम्र के नेता नहीं होते हैं. लेकिन मिश्रा को अभी 75 साल पार करने में एक साल बाकी है, इसलिए वह पद पर बने रह सकते हैं. नृपेंद्र मिश्रा को पद छोड़ने की स्थिति में यह तय है कि 70 वर्षीय पीके मिश्रा प्रिंसिपल सेक्रेट्री का पदभार ग्रहण कर सकते हैं.

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