Nripendra Mishra Ram temple in Ayodhya, नृपेंद्र मिश्र को मिली अयोध्या में राम मंदिर बनाने की जिम्मेदारी, पढ़ें- क्यों हैं पीएम मोदी की पहली पसंद
Nripendra Mishra Ram temple in Ayodhya, नृपेंद्र मिश्र को मिली अयोध्या में राम मंदिर बनाने की जिम्मेदारी, पढ़ें- क्यों हैं पीएम मोदी की पहली पसंद

नृपेंद्र मिश्र को मिली अयोध्या में राम मंदिर बनाने की जिम्मेदारी, पढ़ें- क्यों हैं पीएम मोदी की पहली पसंद

प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव का पद छोड़ने के अपने फैसले के बाद नृपेंद्र मिश्र ने एक बयान में कहा था कि अब उनके लिए आगे बढ़ने और सार्वजनिक ध्येय और राष्ट्रीय हित के लिए समर्पित रहने का समय है.
Nripendra Mishra Ram temple in Ayodhya, नृपेंद्र मिश्र को मिली अयोध्या में राम मंदिर बनाने की जिम्मेदारी, पढ़ें- क्यों हैं पीएम मोदी की पहली पसंद

प्रसिद्ध वकील के परासरण के दिल्ली स्थित निवास पर राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट की बुधवार को पहली बैठक में नृपेंद्र मिश्र को मंदिर निर्माण कमिटी का चेयरमैन बनाया गया. इसके बाद वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नृपेंद्र मिश्र एक बार फिर चर्चा में आ गए. आइए, जानते हैं कि नृपेंद्र मिश्र कौन हैं और उनकी क्या खूबियां हैं?

सार्वजनिक ध्येय और राष्ट्रीय हित के लिए समर्पित रहने का समय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल में भी उनके प्रधान सचिव यानी देश के सबसे बड़े नौकरशाह के पद और कैबिनेट रैंक से सेवा मुक्त होते वक्त नृपेंद्र मिश्र ने इसके साफ संकेत दिए थे. प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव का पद छोड़ने के अपने फैसले के बाद नृपेंद्र मिश्र ने एक बयान में कहा था कि अब उनके लिए आगे बढ़ने और सार्वजनिक ध्येय और राष्ट्रीय हित के लिए समर्पित रहने का समय है. तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिश्र से दो सप्ताह और अपना काम जारी रखने का अनुरोध किया था.

जम्मू-कश्मीर या दिल्ली के उप राज्यपाल बनाने की अटकलें

साल 2014 में बीजेपी की अगुवाई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के सत्ता में आने के बाद मिश्रा को मोदी टीम में शामिल किया गया था. वह राजग के 2019 में और भी बड़े बहुमत के साथ सत्ता में लौटने के बाद भी मोदी की प्रमुख टीम में बने रहे. उसके बाद उन्हें नए बनाए गए केंद्र शासित प्रदेश जम्मू एवं कश्मीर या दिल्ली के उप-राज्यपाल बनाने की अटकलें भी सामने आई थी.

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पद छोड़ते वक्त पीएम मोदी ने योगदान को सराहा

पांच साल तक देश के सबसे बड़े और बेहद अहम पद संभालने वाले नृपेंद्र मिश्र के बारे में प्रधानमंत्री मोदी ने उनके सेवा मुक्त होने के वक्त कहा था, “साल 2019 के चुनाव नतीजे आने के बाद प्रिंसिपल सेक्रेटरी नृपेंद्र मिश्रा ने खुद को पद से सेवामुक्त किए जाने का अनुरोध किया था. तब मैंने उनसे वैकल्पिक व्यवस्था होने तक पद पर बने रहने का आग्रह किया था. साल 2014 में जब मैंने प्रधानमंत्री के रूप में दायित्व संभाला, तब मेरे लिए दिल्ली भी नई थी और नृपेंद्र मिश्र जी भी नए थे. लेकिन दिल्ली की शासन-व्यवस्था से वे भली-भांति परिचित थे. उस परिस्थिति में उन्होंने प्रिंसिपल सेक्रेटरी के रूप में अपनी बहुमूल्य सेवाएं दीं.”

पीएम मोदी ने कहा कि उस समय उन्होंने न सिर्फ व्यक्तिगत रूप से मेरी मदद की, बल्कि 5 साल देश को आगे ले जाने में, जनता का विश्वास जीतने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. एक साथी के रूप में 5 साल तक हमेशा उन्होंने साथ दिया. उन्होंने बताया कि अब नृपेंद्र मिश्र के सेवामुक्त होने के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है. आगे के लिए उन्हें बहुत-बहुत शुभकामनाएं.

नियम में बदलाव कर पीएम मोदी ने बुलाया था

नृपेंद्र मिश्र मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान भी पीएम मोदी के प्रमुख सचिव बनाए गए थे. हालांकि उस समय उनकी नियुक्ति को लेकर विपक्ष ने जमकर हंगामा किया था. विपक्ष का तर्क था कि ट्राई के नियमों के मुताबिक इसका अध्यक्ष रिटायर होने के बाद सरकार से जुड़े किसी पद पर नियुक्त नहीं किया जा सकता, चाहे वह केंद्र की सरकार हो या राज्य की. हालांकि मोदी सरकार ने इस नियम को अध्यादेश लाकर संशोधित कर दिया था. जिसके बाद उनकी नियुक्ति की राह आसान हो गई थी.

शानदार शैक्षणिक जीवन

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में कसिली गांव निवासी सिवेशचंद्र मिश्रा के बड़े बेटे नृपेंद्र आठ मार्च 1945 को जन्मे. वह तीन-तीन विषयों से मास्टर्स हैं. इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से उन्होंने कैमेस्ट्री, राजनीतिक विज्ञान और लोक प्रशासन विषय से पोस्ट ग्रेजुएट किया. उन्होंने विदेश में भी पढ़ाई की. पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन(लोक प्रशासन) विषय से उन्होंने जॉन एफ केनेडी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से मास्टर्स डिग्री ली. फिर 1967 में यूपी काडर के आईएएस बने.

लंबा और असाधारण कॅरियर

नृपेंद्र मिश्रा 75 साल के हो चुके हैं. देश के शीर्ष स्तर के नौकरशाह के रूप में उनका लंबा और असाधारण कॅरियर रहा है. देश के नीति निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं. मिश्रा को एक सक्षम और व्यवसाय समर्थक प्रशासक होने का श्रेय जाता है. वह दयानिधि मारन के मंत्री के कार्यकाल के दौरान दूरसंचार सचिव रह चुके हैं और उनको ब्राडबैंड नीति का श्रेय जाता है.

उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव और कल्याण सिंह सरकार में नृपेंद्र मिश्र प्रमुख सचिव रह चुके हैं. इस बड़े राज्य में काम करते हुए उन्होंने तेजतर्रार और ईमानदार अफसर की पहचान बनाई. जिसके इनाम के तौर पर उन्हें प्रतिनियुक्ति पर केंद्र में काम करने का मौका मिला. केंद्र में कई अहम पदों पर उन्होंने काम किया. दयानिधि मारन के मंत्री के कार्यकाल के दौरान दूरसंचार सचिव रह चुके हैं और उनको ब्राडबैंड नीति का श्रेय जाता है.

डिपार्टमेंट ऑफ फर्टिलाइजर्स में भी 2002 से 2004 के बीच सचिव रहे. रिटायर होने के बाद मनमोहन सरकार में वह 2006 से 2009 के बीच टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) के भी चेयरमैन रहे.

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बड़े थिंक टैंक्स से भी रहा जुड़ाव

ट्राई के चेयरमैन पद से रिटायर होने के बाद नृपेंद्र मिश्र पब्लिक इंटरेस्ट फाउंडेशन (PIF) से जुड़े. दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित दफ्तर में वह कुछ रिसर्च स्कॉलर्स के साथ काम करते थे. यह फाउंडेशन समाज में हाशिए पर पहुंचे लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए एक थिंकटैंक के रूप में काम करने के लिए जाना जाता है. कुछ समय तक वह मशहूर थिंक टैंक विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन (VIF) में भी प्रमुख पद पर रहे थे.

विदेश में भी काम करने का अनुभव

नृपेंद्र मिश्रा ने विदेश में भी काम करने का अनुभव हासिल किया है. उन्होंने विश्व व्यापार संगठन(डब्ल्यूटीओ) में स्पेशल सेक्रेटरी के तौर पर काम करते हुए देश से जुड़े मामलों में मजबूती से पक्ष रखा. इसके अलावा वह मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स में ज्वाइंट सेक्रेटरी रहे. इसके अलावा वर्ल्ड बैंक, एशियन डिवेलपमेंट बैंक, नेपाल सरकार में सलाहकार के रूप में भी उन्होंने काम किया हुआ है.

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