ओडिशा: खेत में गाय चराने का किया विरोध, पंचायत ने परिवार का किया बहिष्कार

गांव की पंचायत (Village Court) ने एक परिवार का इसलिए बहिष्कार (Ostracised) कर दिया, क्यों कि उसने अपने दबंग पड़ोसी की गाय का उसके खेत में नुकसान पहुंचाए जाने पर आपत्ति जताई थी.

ओडिशा में पड़ोसी की गाय को अपने खेत में चराने से मना करने पर परिवार का गांव से बहिष्कार किया गया.

ओडिशा (Odisha) के बलांगीर (Balangiri) जिले में अफरमेर नाम के एक शख्स और उसके परिवार का गांव से इसलिए बहिष्कार (Ostracised) कर दिया गया, क्यों कि उसने अपने पड़ोसी की गाय (Neighbour’s Cow) को अपने खेत में चराने पर आपत्ति जाहिर की थी. ओडिशा के बनहरपल्ली गांव से यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना सामने आई है.

पीड़ित (Victim) जुबाक कांडा ने बलांगीर सदर पुलिस स्टेशन (Sadar Police Station) में जाकर मामला दर्ज कराया. उसने आरोप लगाया कि, उसके पड़ोसी की गाय उसके खेत में फसलों को नुकसान पहुंचा (Devouring Crops) रही थी, इस बात की शिकायत करने पर उसके  परिवार का बहिष्कार कर दिया गया. यह घटना 11 अक्टूबर की है.

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गाय को फसल खराब करने से रोकने पर परिवार का बहिष्कार

गांव के एक शख्स राधाकांत प्रधान की एक गाय कथित रूप से जुबाक कांडा के खेतों में घुसकर उसकी लहलहाती फसल को नुकसान पहुंचा रही थी, जब उसने इस पर आपत्ति जताई, तो गाय के मालिक दबंग राधाकांत प्रधान और जुबाक कांडा के परिवार के बीच बहस शुरू हो गई.

दबंग राधाकांत प्रधान के साथ बहस के बाद गांव की पंचायत ने एक फरमान जारी किया, जिसमें ग्रामीणों से पीड़ित परिवार का बहिष्कार करने के लिए कहा गया. स्थानीय लोगों को चेतावनी दी गई कि अगर किसी को पीड़ित परिवार के साथ बातचीत करते हुए या उनकी राशन की दुकान से खरीदारी करते हुए पाया जाता है, तो उन्हें 10,000 रुपये का जुर्माना भरना होगा.

पीड़ित परिवार ने दबंगों के खिलाफ की FIR

डर की वजह से गांव वालों ने जुबाक कांडा की राशन की दुकान से सामान खरीदना बंद कर दिया. यहां तक कि मजदूरों ने उनके खेतों में काम करने से भी मना कर दिया. जुबाक कांडा ने अपनी शिकायत में उनके परिवार के बहिष्कार का आदेश पारित करने के मामले में राधाकांत प्रधान, सुभाष प्रधान, फकीरा प्रधान और दीपक प्रधान का नाम दर्ज कराया.

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पीड़ित ने एफआईआर में कहा कि गांव का कोई भी व्यक्ति उनकी दुकान से खरीदारी नहीं कर रहा है, जिसकी वजह से उनके लिए परिवार की रोजी रोटी चलाना मुश्किल हो रहा है. उनके परिवार को खेतों में भी नहीं घुसने दिया जा रहा है, सजा के डर से मजदूरों ने भी उनके खेतों में काम करने से इनकार कर दिया है.

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