Fani तूफान में गिरने वाली थी छत, 7 नर्सों ने यूं बचाई 22 नवजातों की जान

स्टाफ ने अपनी जान की परवाह किए बिना बच्चों की ढाल बनगए और उन्हें सुरक्षित ग्राउंड फ्लोर तक पहुंचाया.

ओडिशा में आए अब तक के सबसे तेज तूफान फोनी 3 मई को राज्य की सीमा से टकराया था. इस तूफान के दौरान भुवनेश्वर के कैपिटल अस्पताल की सिक एंड न्यू बॉर्न केयर यूनिट में 22 नवजात बेड में पड़े थे. इन बच्चों की देखरेख के लिए अस्पताल में 7 नर्से और 2 मेडिकल ऑफिसर समेत दो सहायकों की ड्यूटी लगाई गई थी.

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक ये केयर यूनिट बिल्डिंग की पहली मंजिल पर मौजूद थी. फोनी की वजह से केयर यूनिट की छत गिरने लगी. इस दौरान नर्सों और स्टाफ के दूसरे लोगों ने मिलकर बच्चों को अपने शरीर से ढंककर सुरक्षित बचा लिया.

स्वास्थ्य विभाग ने बताया- दोपहर को फोनी की तेज हवाओं के कारण छत गिरने लगी. इसके साथ ही एसएनसीयू में रखे डिवाइस और बिजली का सामान गिरने लग गए. इस मौके पर कोई और होता तो अपनी जान की परवाह करता मगर स्टाफ ने अपनी जान की परवाह किए बिना बच्चों की ढाल बनगए और उन्हें सुरक्षित ग्राउंड फ्लोर तक पहुंचाया.

समझदारी दिखाते हुए स्टाफ के लोगों ने आईसीयू में रखे वॉर्मर को डिस्कनेक्ट कर दिया और इलेक्ट्रिक स्विच को भी बंद कर दिया ताकि शॉर्ट सर्किट से बचा जा सके. स्टाफ की बहादुरी और सूझबूझ के चलते 22 नवजातों की जान बच गई.

बता दें कि इससे पहले ओडिशा के पूर्वी तट पर फोनी तूफान आने के दौरान एक बच्ची ने जन्म लिया था. भुवनेश्वर के मनचेश्वर अस्पातल में इस बच्ची का जन्म हुआ. फोनी की वजह से इस बच्ची का नाम भी फोनी ही रख दिया गया था.