चीन को एक और झटका, तेल कंपनियों ने चीनी टैंकरों पर लगाया बैन!

तेल कंपनियां तेल व्यापारियों और आपूर्तिकर्ताओं से चीनी जहाजों का उपयोग करके भारत में शिपमेंट नहीं भेजने के लिए कहने की योजना बना रही हैं.
Oil Companies to stop chartering tankers, चीन को एक और झटका, तेल कंपनियों ने चीनी टैंकरों पर लगाया बैन!

तेल कंपनियों (Oil Companies) ने चीनी कंपनियों के स्वामित्व या उनकी तरफ से संचालित चार्टर टैंकरों की बुकिंग को रोकने का फैसला किया है. ये फैसला चीनी जहाजों के किसी तीसरे देश में रजिस्टर होने पर भी लागू होगा. यह कदम चीन सेना के लद्दाख (Ladakh) में सीमा पर किए हमले और गलवान घाटी (Galwan Valley) संघर्ष में 20 भारतीय सैनिकों की मौत के बाद में चीन के साथ व्यापारिक व्यवहार को रोकने के लिए जारी नियमों का पालन करते हुए उठाया गया है.

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक तेल कंपनियों के पास पहले से ही अपने वैश्विक निविदाओं में भारतीय जहाजों के पक्ष में फर्स्ट-राइट-ऑफ-रिफ्यूज खंड है. इस खंड के तहत, भारतीय टैंकरों को कॉन्ट्रैक्ट दिया जा सकता है यदि वे विदेशी जहाजों की विजेता बोली से मेल खाते हैं. भारत के इस कदम से किसी भी चीन कनेक्शन के साथ जहाजी कारोबार खत्म हो जाएगा. सीमित निविदाओं के लिए, कंपनियां पहले से रजिस्टर्ड चीनी शिपिंग संस्थाओं से बोलियों को आमंत्रित नहीं करेंगी.

चीनी जहाज, तेल कंपनियों की तरफ से चार्टर्ड जहाजों की संख्या का एक छोटा हिस्सा हैं. इसलिए इस प्रतिबंध का तेल कंपनियों के व्यापार पर अधिक प्रभाव नहीं पड़ेगा.

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि तेल कंपनियां तेल व्यापारियों और आपूर्तिकर्ताओं से चीनी जहाजों का उपयोग करके भारत में शिपमेंट नहीं भेजने के लिए कहने की योजना बना रही हैं. वहीं पावर मिनिस्ट्री ने पहलेही भारतीय प्रोजेक्ट्स के लिए आवश्यक चीनी उपकरणों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था. साथ ही सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कई सारे चाइनीज एप पर भी बैन लगा दिया है, जिसमें टिकटॉक, हेलो, शेयरइट और बिगो शामिल हैं.

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