पाकिस्‍तान के कटास राज मंदिर पहुंचा भारतीय हिंदुओं का जत्‍था, महाशिवरात्रि पर किया शिव का अभिषेक

बताया जाता है कि इस स्थान को शिव नेत्र माना जाता है. जब पार्वती सती हुईं तो भगवान शिव की आंखों से दो आंसू टपके, एक आंसू कटास पर टपका जहां अमृत बन गया और यह आज भी महान सरोवर अमृत कुंड तीर्थ स्थान कटास राज के रूप में है

महाशिवरात्रि के अवसर पर भारत से हिंदुओं का एक समूह पाकिस्तान के कटास राज मंदिर पूजा-अर्चना करने पहुंचा हैं. इसमें 24 लोग शामिल हैं. सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के एक अधिकारी ने बताया कि इस समूह का नेतृत्व पंजाब के प्रतिनिधि सभा के एक नेता सुनील कुमार खन्ना ने कर रहे हैं. यह समूह अटारी वाघा बॉर्डर से पाकिस्तान गई है.

तीर्थयात्रियों में से एक हरिओम वर्मा ने कहा कि हम महाशिवरात्रि मनाने के लिए कटास राज मंदिर जा रहे हैं. तीर्थयात्री मंगलवार को अमृतसर पहुंचे थे और यहां दुर्गियाना मंदिर में रुके थे. जत्था सात दिनों तक पाकिस्तान में रहेगा. पाकिस्तान उच्चायोग ने 25 भारतीय तीर्थयात्रियों को 19 से 25 दिसंबर तक पंजाब प्रांत के चकवाल जिले के कटास राज मंदिर में दर्शन करने के लिए वीजा जारी किया था. इसमें एक महिला की तबीयत खराब होने के कारण 24 भारतीय तीर्थयात्रा ही जा पाएं हैं.

भगवान शिव की आंखों से टपके दो आंसू 

कटास राज मंदिर को किला कटास के रूप में भी जाना जाता है. यहां एक प्राचीन शिव मंदिर है. इसके अतिरिक्त और भी मंदिरों की श्रृंखला है जो दसवीं शताब्दी के बताये जाते हैं. बताया जाता है कि इस स्थान को शिव नेत्र माना जाता है. जब पार्वती सती हुईं तो भगवान शिव की आंखों से दो आंसू टपके, एक आंसू कटास पर टपका जहां अमृत बन गया और यह आज भी महान सरोवर अमृत कुंड तीर्थ स्थान कटास राज के रूप में है. दूसरा आंसू अजमेर राजस्थान में टपका जहां पुष्करराज तीर्थ स्थान है.

तीर्थयात्रियों ने कहा कि कटास राज में शिवरात्रि समारोह में भाग लेने के अलावा वे आसपास के अन्य हिंदू मंदिरों में भी जाएंगे. 1974 के भारत-पाकिस्तान प्रोटोकॉल के तहत भारत से हर साल बड़ी संख्या में सिख और हिंदू तीर्थयात्री धार्मिक त्यौहारों के लिए पाकिस्तान जाते हैं.

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