‘जो गौमूत्र से कोरोना के इलाज का दावा करे, उस सरकार से क्या ही उम्मीद करें’, विपक्ष का केंद्र पर तंज

शुक्रवार को राज्यसभा (Rajyasabha) में होम्योपैथी केंद्रीय परिषद संशोधन विधेयक 2020 (Homeopath Central Council Amendment Bill, 2020) पर चर्चा शुरू हुई. विपक्षी दलों के सांसदों ने बिल को लेकर सरकार पर जमकर हमला बोला.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 4:37 pm, Fri, 18 September 20

राज्यसभा में होम्योपैथी केंद्रीय परिषद संशोधन विधेयक 2020 (Homeopath Central Council Amendment Bill, 2020) पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (All India Trinamool Congress) के सांसद शांतनु सेन ने केंद्र सरकार पर प्राइवेट संस्थानों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा कि आप उस सरकार से क्या उम्मीद करेंगे जो कहती हो कि गौमूत्र पीने से कोरोना को ठीक किया जा सकता है? सरकार अप्रत्यक्ष रूप से प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों को बढ़ावा दे रही है.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्ष वर्धन ने शुक्रवार सुबह राज्यसभा में होम्योपैथी केंद्रीय परिषद संशोधन विधेयक 2020 पर चर्चा शुरू की. उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय होम्योपैथी परिषद ने कर्तव्यों को निभाने में केंद्र का सहयोग नहीं किया.

उड़ीसा से बीजेपी सांसद प्रसन्ना आचार्य ने भी चर्चा में हिस्सा लिया. उन्होंने जरूरतमंदों के लिए होम्योपैथी सिस्टम को मजबूत बनाने पर अपनी सहमति जताई. राज्यसभा में चर्चा के दौरान आचार्य ने कहा होम्योपैथी चिकित्सा की एक पुरानी भारतीय प्रणाली है. ये गरीबों के लिए भी सुलभ है इसलिए हमें इसे मजबूत बनाना होगा.

DMK ने घेरा

द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK)के सांसद टी. सिवा ने दावा किया कि ज्यादातर बिल राज्य सरकारों से अधिकारों को छीनने के लिए लाए गए. उन्होंने कहा कि इस बिल से फेडरलिज्म की जड़ों को उखाड़ने की एक और कोशिश की जा रही है. जिस दिन से ये सरकार आई है, ज्यादातर पारित किए गए बिल राज्य सरकार से उनकी शक्तियों को छीन चुके हैं.

DMK सांसद ने कहा कि स्टैंडिंग कमेटी ने साफतौर पर कहा है कि एडवाइजरी काउंसिल में स्टेट मेडिकल काउंसिल का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है. उन्होंने सिफारिश करते हुए कहा कि स्टेट मेडिकल काउंसिल के निर्वाचित सदस्यों के प्रतिनिधित्व का भी प्रावधान होना चाहिए.

कांग्रेस ने लगाए आरोप

कांग्रेस नेता रिपुन बोरा ने परिषद के इतिहास को बताते हुए कहा कि सरकार का संस्थानों और संगठनों की ऑटोनॉमी छीनने का पुराना इतिहास है.

बता दें कि होम्योपैथी केंद्रीय परिषद (संशोधन) बिल 2020 राज्यसभा में 14 सितंबर 2020 को पेश किया गया था. ये बिल होम्योपैथी केंद्रीय परिषद कानून 1973 में संशोधन के लिए पेश किया गया है.

इस अधिनियम के तहत होम्योपैथी के केंद्रीय परिषद की स्थापना की गई थी, जो होम्योपैथिक की पढ़ाई और प्रैक्टिस को कंट्रोल करता है. ये बिल होम्योपैथी केंद्रीय परिषद संशोधन अध्यादेश 2020 की जगह लेगा, जो 24 अप्रैल 2020 को लाया गया था.