मंदी के साइड इफेक्ट्स: मारुति सुजुकी में गईं 3 हजार नौकरियां

मारुति सुजुकी में 3 हजार कर्मचारियों का कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू नहीं किया गया है.

मारुति सुजुकी में 3 हजार कर्मचारियों का कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू नहीं किया गया है. ये बात मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन आरसी भार्गव ने मंगलवार को बताई. ऑटो इंडस्ट्री इस समय डिमांड क्राइसिस से जूझ रही है, ऐसे समय में ये फैसला आना चौंकाता नहीं है. कंपनी की वार्षिक शेयरहोल्डर्स मीटिंग में भार्गव ने बताया कि कारों की कीमत में सुरक्षा मानदंड और भारी टैक्स जोड़ दिए गए हैं. इस वजह से ग्राहकों की खरीद क्षमता प्रभावित हो रही है.

13 लाख नौकरियां खतरे में

ऑटो मैनुफैक्चरर्स संगठन सियाम का कहना है कि मंदी के कारण ऑटो कंपनियां 20 हजार लोगों को निकाल चुकी हैं. अगर यही हाल रहा तो 13 लाख लोग जॉब से हाथ धो सकते हैं. जुलाई में लगातार 9वें महीने ऑटो सेल्स में गिरावट देखी गई. ऐसे में कई निर्माता उत्पादन को अस्थाई रूप से रोक रहे हैं या कीमतों पर कंट्रोल रखने के लिए कर्मचारियों को निकाल रहे हैं.

ऑटो सेक्टर में मंदी के कारण

देश में तेजी से उपभोग की चीजों की मांग घट रही है. जुलाई में वाहन उत्पादन 17 परसेंट घट गया. NBFC यानी नॉन बैंक फाइनेंसियल इंस्टीट्यूशन खुद आर्थिक तंगी से जूझ रहा है इसलिए ऑटो डीलर्स और खरीदारों को कर्ज नहीं दे पा रहा है. नतीजतन बड़ी संख्या में डीलरशिप बंद हो गई हैं. GST की बढ़ी दरें, नोटबंदी, बीमा लागत में बढ़ोत्तरी आदि अन्य कारण भी हैं.

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