जिस नागरिकता कानून को बनाने में अंबेडकर को लगे 3 महीने, BJP ने उसे 3 दिनों में बदल दिया: चिदंबरम

पी. चिदंबरम ने कहा कि बीजेपी ने तीन देशों को अपने नागरिक के आधार पर चुना, पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, जो कि हमारे पड़ोसी हैं. अगर ऐसा है तो भूटान, म्यांमार, चीन, श्रीलंका और नेपाल क्या हमारे पड़ोसी देश नहीं हैं?
p chidambaram BJP changed citizenship law in 3 days, जिस नागरिकता कानून को बनाने में अंबेडकर को लगे 3 महीने, BJP ने उसे 3 दिनों में बदल दिया: चिदंबरम

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने नागरिकता कानून (CAA) पर कहा कि 8 दिसंबर को CAA ड्राफ्ट हुआ अगले दिन लोकसभा में और 11 दिसंबर को राज्यसभा में पास हो गया जबकि बाबा साहेब को संविधान में नागरिकता अनुच्छेद को बनाने में 3 महीने लगे थे.

चिदंबरम ने यह बयान JNU में साबरमती हॉस्टल के बाहर NSUI के एक कार्यक्रम में दिया है. NSUI ने CAA, NRC और NPR पर इस कार्यक्रम का आयोजन किया था. चिदंबरम ने आगे कहा कि NPR, NRC, CAA अलग हैं लेकिन तीनो इंटरकनेक्टेड हैं.

उन्होंने आगे कहा कि संविधान में नागरिकता का प्रावधान है. पूरे विश्व में हर जगह देश में रहने वाले नागरिकों को नागरिकता देने का प्रावधान होता है. अगर किसी के माता-पिता, दाद-दादी इंडिया में रह चुके हैं तो उनके बच्चे यहीं के नागरिक होते हैं.

कांग्रेस नेता ने कहा कि सिटिजनशिप टेरिटरी बेस की जगह रिलीजियस बेस पर दी जा रही है. कई देशों में धर्म के आधार पर नागरिकता दी जाती है लेकिन भारत इस आधार पर नहीं बना था. उन्होंने कहा कि अगर अल्पसंख्यकों के रिलिजियस पर्सीक्यूशन पर ही नागरिकता दे रहे हैं, तो फिर पाकिस्तान में अहमदिया मुसलमान, म्यांमार में रोहिंग्या और तमिल हिन्दू-तमिल मुसलमान के बारे में क्यों नहीं सोच रही सरकार?

‘सिर्फ तीन पड़ोसी देश के अल्पसंख्यकों को ही नागरिकता क्यों?’

पी. चिदंबरम ने कहा कि बीजेपी ने तीन देशों को अपने नागरिक के आधार पर चुना, पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, जो कि हमारे पड़ोसी हैं. अगर ऐसा है तो भूटान, म्यांमार, चीन, श्रीलंका और नेपाल क्या हमारे पड़ोसी देश नहीं हैं? उन्होंने कहा कि CAA बहुत ही बेकार ड्राफ्ट है, लेकिन हमारी आपत्ति है कि पर्सीक्यूशन केवल धार्मिक ही क्यों? भाषा, रेस, लिंग, राजनीतिक भेदभाव के आधार पर क्यों नहीं?

उन्होंने कहा कि कोई भी मुझे यह बता दे कि कांग्रेस के किसी नेता ने तीनों देशों के हिन्दू शरणार्थियों को नागरिकता देने से मना किया हो. हम तो स्वागत करते हैं लेकिन और भी जो अन्य तरीके से प्रॉसिक्यूटेड हैं, तो उनको भी तो बिल में शामिल कीजिए.

असम में NRC में हिंदुओं के ज्यादा नाम आने की वजह से CAA को लाया गया है. मैंने जब संसद में पूछा कि किसी देश से बात हुई कि इन्हें कहां और कैसे भेजेंगे? तो अमित शाह ने कहा कि हम 2024 से पहले सबको भेज देंगे.

‘मेरी पत्नी को नहीं पता मेरे स्कूल सर्टिफिकेट कहां हैं?’

पी. चिदंबरम ने बताया कि मैंने अपनी पत्नी से पूछा कि मेरे स्कूल के सर्टिफिकेट और SLC कहां हैं, तो उन्होंने कहा कि आपकी माता जी को तो पता था लेकिन मुझे नहीं पता है. अब मैं प्रधानमंत्री की तरह डिग्री तो प्रोड्यूस नहीं कर सकता. उन्होंने कहा कि CAA का विरोध शाहीन बाग के अलावा देश के कई हिस्सों में हो रहा है और यह विरोध इस कानून को लीगली डिफिट करने के लिए किया जा रहा है.

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