राफेल डील पर CAG की नई रिपोर्ट : चिदंबरम बोले- ‘क्या खुल गया मुसीबतों का पिटारा?’

राफेल (Rafale) सौदे पर CAG की नई रिपोर्ट आने के बाद कांग्रेस एक्शन मोड में आ गई है. गुरुवार को पी. चिदंबरम (P chidambaram) ने ट्वीट कर मोदी सरकार पर निशाना साधा.

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राफेल (Rafale) सौदे में फ्रेंच कंपनी दसॉ एविएशन को लेकर CAG (राष्ट्रीय नियंत्रण व महालेखा परीक्षक) की नई रिपोर्ट आई है. इस रिपोर्ट के आने के बाद से ही कांग्रेस (Congress) ने केंद्र सरकार पर हमला बोलना शुरू कर दिया है. 36 लड़ाकू विमानों को लेकर 58,000 करोड़ के राफेल सौदे को लेकर कांग्रेस नेता मोदी सरकार को एक बार फिर घेरने लगे हैं.

संसद में पेश की गई CAG की रिपोर्ट में कहा गया है कि रक्षा मंत्रालय की जिस ऑफसेट पॉलिसी के तहत राफेल डील हुई है, उसमें राफेल बनाने वाली दसॉ एविएशन के भारत को रक्षा क्षेत्र में तकनीकी सहायता दिए जाने का भी प्रावधान है, लेकिन फ्रेंच कंपनी ने अभी तक अपनी यह जिम्मेजारी नहीं निभाई है.

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कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने गुरुवार को इस मामले में मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए ट्वीट किए. उन्होंने लिखा, ‘CAG को पता चला है कि राफेल एयरक्राफ्ट के वेंडर्स ने अभी तक ऑफसेट समझौते के तहत टेक्निकल सहायता देने की शर्त को पूरा नहीं किया है.’

उन्होंने लिखा, ‘ऑफसेट दायित्व 23 सितंबर 2019 को शुरू हो जाने चाहिए थे और उन्हें 23 सितंबर 2020 तक पूरा हो जाना चाहिए था, जो कल था. क्या सरकार बताएगी कि वो दायित्व पूरा हुआ कि नहीं? क्या कैग ने ‘जटिल समस्याओं का पिटारा’ खोलने वाली रिपोर्ट दी है?

क्या है CAG की रिपोर्ट में?

अपनी रिपोर्ट में CAG ने कहा है कि 36 मीडियम मल्टी रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (MMRCA) से संबंधित चार समझौतों के ऑफसेट में वेंडर दसॉ एविएशन और MBDA ने सितंबर 2015 में यह प्रस्ताव रखा था कि वो अपने ऑफसेट दायित्वों में से 30 प्रतिशत दायित्वों का पालन DRDO को उच्च श्रेणी की तकनीक देकर पूरा करेगी.

रिपोर्ट में कहा गया है कि DRDO को हल्के लड़ाकू विमान के लिए कावेरी इंजन को देश में ही बनाने के लिए उनसे टेक्निकल मदद चाहिए थी लेकिन आज तक वेंडर ने इस तकनीक को ट्रांसफर करने को लेकर कुछ स्पष्ट नहीं किया है.

रक्षा मंत्रालय को सलाह

CAG ने अपनी रिपोर्ट में रक्षा मंत्रालय को सलाह दी है कि उसे अपनी ऑफसेट नीति और इसके कार्यान्वयन की समीक्षा करनी चाहिए. मंत्रालय को यह जानने की जरूरत है कि यह नीति दोनों पक्षों के लिए कहां मुसीबत पैदा कर रही है और इसे कैसे सुधारा जाए.

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