पाक सूफी संगठन ने 110 साल पुरानी सिख पांडुलिपियां सियालकोट गुरुद्वारे को सौंपीं

7 दशक से ज्यादा समय तक खराब स्थिति में रहने के बाद सियालकोट (Sialkot) के इस गुरुद्वारे (Gurudwara) की 2015 में मरम्मत की गई थी, जिसके बाद एक बार फिर सिख तीर्थयात्रियों और भक्तों का यहां आना शुरू हो गया है.

एक पीर के घर पर 90 साल तक सुरक्षित रखी गईं गुरु ग्रंथ साहिब की 110 साल पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियों को अब पाकिस्तानी सूफी संगठन (Pakistan Sufi organisation) ने सियालकोट (Sialkot) के एक गुरुद्वारे (Gurudwara) में स्थानांतरित करा दिया है. गुरुवार को मीडिया के जरिए यह जानकारी मिली है.

ऑनलाइन मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मित्र सांझ पंजाब संगठन के प्रमुख इफ्तिखार वाराइच कालरावी ने बताया कि 2 पांडुलिपियां लंबे समय से गुजरात जिले के कालरा दीवान सिंघाला के एक सूफी पीर सैयद मुनीर नक्शबंदी के घर पर सुरक्षित थीं.

आपसी सद्भाव की वकालत करने वाले नक्शबंदी ने विभाजन से पहले जातीय हिंसा से बचने की कोशिश कर रहे कुछ सिख परिवारों को अपने घर पर शरण दी थी. कालरावी ने बताया, ‘परिवार को आश्रय देने के अलावा उन्होंने उनके कुछ धार्मिक शास्त्रों को भी सुरक्षा दी थी और उन्हें अपवित्र होने से बचाया था. उनमें गुरु ग्रंथ साहिब की 2 पांडुलिपियां भी थीं. 1950 में जब सूफी बुजुर्ग का निधन हुआ तब उनके बच्चों ने इन्हें सुरक्षित रखा. तब से वे परिवार के पास ही थे.’

मुस्लिम-सिख दोस्ती की शानदार मिशाल

उन्होंने आगे कहा, ‘पीर के परिवार के पास 90 से अधिक सालों तक सुरक्षित रहने के बाद अब हमने फैसला किया है कि इन पांडुलिपियों को अब गुरुद्वारा बाबा दी बेरी में स्थानांतरित कर दिया जाना चाहिए. यह मुस्लिम-सिख दोस्ती का एक शानदार उदाहरण है और यह हमारे रिश्तों को और मजबूत बनाने में मदद करेगा.’

बता दें कि 7 दशक से ज्यादा समय तक खराब स्थिति में रहने के बाद सियालकोट के इस गुरुद्वारे की 2015 में मरम्मत की गई थी, जिसके बाद एक बार फिर सिख तीर्थयात्रियों और भक्तों का यहां आना शुरू हो गया है.

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