तस्करी से परमाणु हथियार बनाने वाले इमरान अपने गिरेबान में झांके

पाकिस्तान आज जिस परमाणु हथियार पर इतरा रहा है दरअसल उसे बनाने की ख़ुफिया तकनीक चुराई गई थी.

नई दिल्ली: आर्टिकल 370 में संशोधन के बाद से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है. पाकिस्तान ने पहले कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने की कोशिश की लेकिन जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएसी) ने भी इसे भारत-पाक का द्विक्षीय मामला बताते हुए किसी तरह की हस्तक्षेप से इनकार कर दिया तो इमरान और बौखला गए.

इससे पहले रविवार को इमरान ख़ान ने एक ट्वीट करते हुए लिखा “फांसीवादी, हिंदू सुप्रीमो मोदी सरकार को पता होना चाहिए कि सेनाओं और आतंकवादियों को बेहतर ताकतों द्वारा हराया जा सकता है. इतिहास गवाह है कि जब कोई राष्ट्र स्वतंत्रता संग्राम में एकजुट होता है और उसे मृत्यू का भय नहीं होता तो कोई भी ताकत उसे अपने लक्ष्य को हासिल करने से नहीं रोक सकती है. यही कारण है कि हिंदुत्व वाली मोदी सरकार का यह रवैया कश्मीरी मुक्ति संघर्ष को दबाने में फेल हो जाएगा.”

उन्होंने मोदी सरकार को फासीवादी और नस्लवादी बताते हुए कहा कि हिंदुत्ववादी विचारधारा के लोगों के नेतृत्व ने भारत पर कब्जा कर लिया है, ये कब्जा ठीक वैसा ही है जैसा जर्मनी में नाजियों किया था. इस नेतृत्व ने दो सप्ताह से ज्यादा समय तक के लिए जम्मू कश्मीर में पाबंदी लगा कश्मीरियों को धमकाया है. इमरान ने इसे पाकिस्तान, अल्पसंख्यकों और गांधी-नेहरू के विचार के लिए भी चेतावनी बताया.

सवाल यह उठता है कि भारत को नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाले इमरान पाकिस्तान की नैतिकता पर बात कब करेंगे?

पाकिस्तान आज जिस परमाणु हथियार पर इतरा रहा है दरअसल उसे बनाने की ख़ुफिया तकनीक चुराई गई थी. पाकिस्तान में परमाणु हथियार के जनक माने जाने वाले वैज्ञानिक अब्दुल कादिर खान ने न केवल परमाणु हथियारों के व्यापार से जुड़ी ख़ुफ़िया जानकारी चुराई, बल्कि इसे उन देशों को बेचा जो उस दौर में राजनीतिक तौर पर अस्थिर थे. पाकिस्तान ने अनाधिकृत तौर पर उत्तर कोरिया को परमाणु हथियार मुहैया कराया. भारत बार-बार इस मामले में जांच की मांग करता रहा है.

अपनी इन्हीं हरकतों की वजह से डॉ ख़ान को पश्चिमी देशों में एक बदनाम परमाणु वैज्ञानिक माना जाता है.

अब्दुल कादिर खान ने इसी महीने पाकिस्तानी मीडिया से बातचीत में कहा था कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव में पाकिस्तान की जीत होगी क्योंकि उसके पास परमाणु शक्ति है.

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के कागजात बताते हैं कि पाकिस्तान की पूर्व पीएम बेनजीर भुट्टो के कार्यकाल में उत्तर कोरिया से लंबी दूरी के रोडोंग मिसाइल खरीदने के बदले परमाणु हथियारों से जुड़ी तकनीकी का लेन-देन हुआ था.

पाकिस्तान के वैज्ञानिक अब्दुल कादिर खान ने उत्तर कोरिया को परमाणु हथियारों से जुड़ी तकनीकी मुहैया कराने में काफी अहम भूमिका निभाई थी. ब्रिटानिका एन्साइक्लोपीडिया के अनुसार, डॉ. ख़ान ने तक़रीबन 13 बार उत्तर कोरिया का दौरा किया. माना जाता है कि इसी दौरान उन्होंने उत्तर कोरिया को यूरेनियम संवर्धन की तकनीक दी.

डॉ. ख़ान ने उत्तर कोरिया के अलावा लीबिया को भी परमाणु तकनीक बेची थी. लेकिन अमेरिका ने साल 2003 में लीबिया के परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगा दी.

इसके बाद अमेरिका ने डॉ ख़ान और उनकी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए. दरअसल 1980 के दशक में डॉ. ख़ान ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में ज़िप्पी सेंट्रीफ्यूज के डिज़ाइन और पुर्जों की कई कंपनियां खड़ी की थी.

4 फ़रवरी 2004 को टेलीविज़न पर प्रसारित एक कार्यक्रम में उन्होंने परमाणु तकनीक के अंतर्राष्ट्रीय तस्करी की “पूरी जिम्मेदारी” स्वीकार की.

बीबीसी से बातचीत के दौरान डॉ. ख़ान ने ख़ुद को क़ुसूरवार मानते हुए बिना शर्त माफी भी मांगी थी. बातचीत के दौरान उन्होंने माना कि उत्तर कोरिया, ईरान और इराक़ को परमाणु तकनीक दी गई.

फॉरेन पॉलिसी पत्रिका के अनुसार डॉ ख़ान ने ने साल 2009 में एक साक्षात्कार में कहा था, “अफ़ग़ानिस्तान में युद्ध ने हमें अपनी परमाणु क्षमता और बढ़ाने का मौक़ा दे दिया. ये हालात न होते तो हम इतनी जल्दी बम नहीं बना सकते थे जैसा हमने किया.”

पाकिस्तान आज के समय में पूरे विश्व के लिए एक ख़तरा है क्योंकि परमाणु संपन्न देश होने के नाते आपसे जिस तरह के ज़िम्मेदार व्यवहार की उम्मीद की जाती है वैसा निभा पाने में पाकिस्तान हमेशा असफ़ल रहा है.

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