उधार की शायरी और बेढंग अंदाज… पाकिस्तान की बदजुबान एंकर को एक हिंदुस्तानी का जवाब

सोशल मीडिया में एक पाकिस्तानी न्यूज़ चैनल की एंकर का वीडियो वायरल हो रहा है. मोहतरमा इस वीडियो में हिंदुस्तान के लिए खूब अपशब्दों का इस्तेमाल कर रही है, लेकिन मोहतरमा ने इसके लिए जिस शायरी का सहारा लिया वो हिंदुस्तान के ही शायर द्वारा लिखीं गई.

नयी दिल्ली: बात ये है कि साहब पड़ोसी मुल्क तो मानता नहीं. 1947, 1965, 1971, 1999 और हाल ही में 2016 में खूब समझाया गया, लेकिन हमारे यहां एक कहावत है कि ‘कुत्ते की पूछ सीधी नहीं होती’. सो अब इस बात में चर्चा करना तो मैं मुनासिब नहीं समझता. दरअसल, यहां बात हो रही है उस मोहतरमा की जिसने हिंदुस्तान को खूब गालियां बकीं. हिंदुस्तान की कौम को हिंदुस्तान के निज़ाम को और हिंदुस्तान की सेना को.  इस मोहतरमा को शायद एक नजर अपने मुल्क के इतिहास और भूगोल में डालनी चाहिए. केवल इतिहास से काम नहीं मोहतरमा, आपको अपना भूगोल भी समझना चाहिए.

मैं जिस मोहतरमा का जिक्र कर रहा हूं, वह पाकिस्तान के एक न्यूज चैनल की एंकर है. पत्रकारिता के माध्यम से वो हिंदुस्तान पर ऐसा बयान दे रही थी, मानों जैसे वो किसी सियासती दल की हिस्सा हों. ये बात भी मैं कम कह रहा हूं, कोई सियासती दल का नुमाइंदा भी ऐसी बातें नहीं बोलता जैसा की एंकर बोल रही थी. फिलहाल मैडम आपके यहां हो सकता है कि ऐसी बयानबाजी होती हो लेकिन फिलहाल हिंदुस्तान की तालीम ऐसी नहीं है कि सियासतदान एक दूसरे के साथ आपके जैसी अमर्यादित भाषा का प्रयोग करते हों.

अब मैं आता हूं पूरे मुद्दे की जड़ में

मोहतरमा आप एक पत्रकार के ओहदे में विराजमान है. हमारे हिंदुस्तान की तालीम में तो सिखाया गया है कि एक पत्रकार समाज का आईना होता है. सच्चाई के साथ हमारा सरोकार होता है. गलत को गलत और सही को सही दिखाना ही हमारा पहला धर्म होता है. पाकिस्तान में जाकर मुझे पत्रकारिता का इल्म सीखने का मौका नहीं मिला पता नहीं इसको मैं अपना दुर्भाग्य समझूं कि सौभाग्य. शायद सौभाग्य ही समझ लेता हूं वरना मैं मेरी भी जुबान आपके जैसी हो जाती. आपने चंद लोगों की खुशी के लिए अपने ही धर्म ( पत्रकारिता ) से समझौता कर लिया.

खैर कोई बात नहीं किया तो किया. आपकी जम्हूरियत अगर इस बात से खुश है तो कोई बात नहीं, लेकिन एक बात जिसको सुनकर मुझे फक्र हो रहा है वो ये है कि आपने अपने प्रवचन की शुरुआत हिंदुस्तान के ही एक मशूहर शायर राहत इंदौरी के काव्य संकलन से चुरा ली. मतलब आप यहीं से अपना आकलन कर लीजिए कि हिंदुस्तान को गाली देने के लिए भी आपको हिंदुस्तान के शायर का ही सहारा लेना पड़ रहा है. यही हमारी ताकत है.

चलिए हमारा दिल बहुत बड़ा है चुरा लिया तो चुरा लिया लेकिन कम से कम उस शायर का जिक्र तो कर देती. आप जानते हुए भी जिक्र नहीं कर पाई क्योंकि उसी शायर ने आपके मुल्क को बहुत खरी खोटी सुनाई है. जिस शेर का आपने जिक्र किया वो शेर राहत इंदौरी साहब ने आपके मुल्क के लिए ही कहा था. अगर मोहतरमा आपने पूरा शेर पढ़ा होगा तो शायद आपको इस बात की जानकारी भी होगी लेकिन आपको पढ़ने का इतना वक्त कहां होगा कि आप उस शख्सियत को पढ़ पाते और अगर पढ़ा होता तो आपकी जुबान भाषा की मर्यादा को न लांघती.

सोशल मीडिया में वायरल हो रहा आपके वीडियो में आप ये बोलती हुई दिख रहीं हैं, ‘सुना है सरहदों में तनाव है, जी हां भारत में चुनाव है. आपका चेहरा तमाम सुंदरता क्रत्रिम संसाधनों के बावजूद भी लालिमा से भरा हुआ है. पता नहीं आपके स्टूडियों की लाइटिंग की खराबी थी या फिर आपके मेकअप आर्टिस्ट में कला नहीं थी लेकिन मुझे लगता है कि शायद आप के आक्रोश के कारण ऐसा हो रहा था. कोई बात नहीं इंदौर में जन्में हमारे लोकप्रिय शायर राहत इंदौरी साहब की लाइनें हम आपको बता देते हैं और उम्मीद करते हैं कि आप अगली दफे किसी और शायर का सहारा लें..

‘सरहदों पर बहुत तनाव है क्या, कुछ पता तो करो चुनाव है क्या, 

और खौफ बिखरा है दोनों समतो में, तीसरी समत का दबाव है क्या’

‘दुनिया का उसी तौर में बोला करे, बहरों का इलाका है जरा जोर से बोलो, 

दिल्ली में हम ही बोला करें अमन की बोली, यारों तुम भी कभी लाहौर से बोलो.’

 

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