बाजवा के कंधे पर पाक की आर्थिक नीति, बड़े कारोबारियों के साथ की मीटिंग, दिए निर्देश

सूत्रों के मुताबिक 'इस पर चर्चा की गई कि निवेश बढ़ाने के लिए कौन से कदम उठाए जा सकते हैं.' कुछ बैठकें ऐसी थीं जिनमें तुरंत फैसले लेकर सरकार के टॉप अफसरों को निर्देश जारी किए गए.

नई दिल्ली: ये बात तो किसी से छिपी नहीं है कि पाकिस्तानी हुकूमत वहां की सेना के अधीन है. इसका एक जीता जागता उदाहरण और देखने को मिला है. सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा ने डूबती इकॉनमी को रफ्तार देने के उपायों को लेकर पाकिस्तान के बड़े कारोबारियों से मुलाकात की.

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की वित्तीय राजधानी कराची और रावलपिंडी स्थित सैन्य दफ्तरों में बड़े कारोबारियों के साथ तीन हाई सिक्यॉरिटी बैठकें हो चुकी हैं. ये बैठकें आपसी संपर्कों के जरिए मुमकिन हुईं, जिनमें बाजवा ने इकॉनमी पर मंडरा रहे संकट से निपटने को लेकर चर्चा की.

सूत्रों के मुताबिक ‘इस पर चर्चा की गई कि निवेश बढ़ाने के लिए कौन से कदम उठाए जा सकते हैं.’ कुछ बैठकें ऐसी थीं जिनमें तुरंत फैसले लेकर सरकार के टॉप अफसरों को निर्देश जारी किए गए. इन बैठकों से वाकिफ लोगों ने बताया कि जनरल बाजवा बिजनस कम्युनिटी में भरोसा लौटाने को लेकर काफी चिंतित हैं. हालांकि सेना के प्रवक्ता ने इन बैठकों के बारे में कुछ बताने से इनकार कर दिया.

पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी है. देश को ऐसी विकराल स्थित से उबारने का जिम्मा देश के वित्त मंत्री को होता है. पाकिस्तान के वित्त मंत्री अब्दुल हफीज शेख को जो काम करना चाहिए वो काम वहां के आर्मी चीफ कर रहे हैं. पिछले एक दशक में ऐसा पहली बार हुआ है जब (2020 का) रक्षा बजट फ्रीज कर दिया गया है. ऐसा तब है जब पाकिस्तानी सैनिक अफगानिस्तान के आतंकियों और भारत के हालात के कारण हाई अलर्ट पर हैं.

पाकिस्तान में कई बिजनस लीडर और आर्थिक विश्लेषक देश को लेकर जनरलों की भूमिका का स्वागत कर रहे हैं. उनका मानना है कि प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी के पास सेना के मुकाबले काफी कम अनुभव है और सेना देश में सबसे ज्यादा सम्मानित भी है. वहीं कई लोग इस बात को लेकर चिंतित हैं कि पाकिस्तान के लोकतंत्र के लिहाज से सेना के लगातार बढ़ते रोल का क्या मायने होगा और उन नागरिक संस्थानों का क्या भविष्य क्या होगा जिन्हें अपनी जडें जमाने का कभी मौका नहीं दिया गया.

चालू वित्त वर्ष में पाकिस्तान के आर्थिक विकास की अनुमानित दर 2.4% है, जो पिछले एक दशक का सबसे निचला स्तर है. राजकोषीय घाटा बढ़ने के कारण पाकिस्तान ने मई 2019 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से 6 अरब डॉलर का कर्ज लिया था, ताकि इकॉनमी में स्थिरता लाई जा सके. इस वर्ष जून में खत्म हुए वित्त वर्ष में पाकिस्तान का बजट घाटा बढ़कर जीडीपी का 8.9% पर पहुंच गया था.