कुलभूषण जाधव मामले में जिस सबूत पर पाकिस्तान ICJ में ठोक रहा था ताल, उल्टी पड़ गई वो चाल

आईसीजे ने मई 2017 में भारत की याचिका पर जाधव की फांसी की सजा पर मामले में अंतिम फैसला होने तक रोक लगा दी थी.

नई दिल्ली: पाकिस्तान की जेल में कैद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव के मामले में भारत की जबर्दस्त राजनयिक जीत हुई है. नीदरलैंड के हेग स्थित अंतर्राष्ट्रीय न्याय न्यायालय (आईसीजे) ने बुधवार को न केवल जाधव की फांसी की सजा पर रोक को बरकरार रखा बल्कि पाकिस्तान से इस पर पुनर्विचार करने के लिए भी कहा.

आईसीजे ने मामले में पाकिस्तान की तमाम आपत्तियों को खारिज कर दिया जिनमें इस मामले को सुनने की उसकी ग्राह्यता के खिलाफ दी गई दलील भी शामिल है. साथ ही अदालत ने पाकिस्तान के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि भारत ने जाधव की वास्तविक नागरिकता की जानकारी नहीं दी है.

अदालत का विस्तृत फैसला इसके अध्यक्ष ने पढ़ा. अदालत ने कहा कि उसे यह स्पष्ट है कि जाधव भारतीय नागरिक हैं और पाकिस्तान ने भी माना है कि जाधव भारतीय नागरिक हैं.

दरअसल, पाकिस्तान की तरफ से लगातार एक स्लाइड दिखाई जा रही थी, जिसमें वो जाधव का पासपोर्ट होने का दावा कर रहे थे. अब यहीं पर कोर्ट ने पाकिस्तान का तर्क खारिज कर दिया. खुद ‘पासपोर्ट’ दिखा रहे पाकिस्तान का तर्क था कि जाधव की नागरिकता अनिश्चित है. ऐसे में कोर्ट ने पाकिस्तान का तर्क खारिज कर दिया. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ये साफ है कि जाधव भारतीय नागरिक हैं और पाकिस्तान ने भी माना है कि जाधव भारतीय नागरिक हैं.

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में कुलभूषण जाधव का मुकदमा लड़ने वाले भारत के जानेमाने वकील हरीश साल्वे ने पाकिस्तान को आज चेतावनी दी कि अगर उसने जाधव के मामले में फिर कोई फजीर्वाड़ा करने की कोशिश की तो उसे फिर अंतरराष्ट्रीय अदालत में घसीटा जाएगा.

हरीश साल्वे ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का फैसला आने के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वह भारत की ओर से अंतरराष्ट्रीय अदालत का आभार व्यक्त करते हैं जिसने इस मामले में हस्तक्षेप करके चंद दिन पहले जाधव को फांसी पर चढ़ने से बचा लिया.

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने बार बार जाधव के पास से बरामद कथित पासपोर्ट की स्लाइड प्रदर्शित की. अदालत ने न सिर्फ इस पर ध्यान दिया बल्कि पाकिस्तान के उस तर्क को खारिज कर दिया कि जाधव की नागरिकता अनिश्चित है.

अदालत ने पाकिस्तान से कहा है कि वो संविधान के मुताबिक एक निष्पक्ष मुकदमा चलाए. अगर यह मुकदमा सैन्य अदालत पर उन्हीं नियमों एवं कानूनों के आधार पर चलाया जाता है जहां बाहर के वकीलों को अनुमति नहीं है, हमें अनुमति नहीं है, मिलने की छूट नहीं है, सबूत नहीं दिये जाते तो यह अपेक्षित मानदंडों के अनुरूप नहीं होगा.

साल्वे ने कहा कि उन्हें निजी तौर पर संतोष है कि पाकिस्तान द्वारा इस्तेमाल किये गये विशेषण और अदालत में दिये गये जवाब को उन्होंने अफसोसनाक करार दिया और कहा कि उनके संस्कार एवं भारत की परंपरा के मुताबिक ऐसी भाषा में जवाब नहीं दिया जाता.

पाकिस्तान ने अपने आरोप प्रक्रिया के दुरुपयोग के आधार पर लगाये थे और कहा था कि ये वे आधार हैं जिन पर भारत के पक्ष में निर्णय नहीं किया जाना चाहिए. पाकिस्तान के तर्क खारिज हो गये और अदालत ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय तौर पर गलत काम करने का दोषी ठहराया.

साल्वे ने कहा, ‘हम पाकिस्तान से अपेक्षा करते हैं कि वह एक निष्पक्ष मुकदमे की गारंटी के लिए समुचित कानूनी उपाय करे. पाकिस्तान का आचरण दुनिया देख रही है और अगर वे एक और फजीर्वाड़ा करने का प्रयास करते हैं, तो हम फिर अंतरराष्ट्रीय अदालत का रुख करेंगे.’

जाधव को पाकिस्तान ने मार्च 2016 में पकड़ा था और अप्रैल 2017 में पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने उन्हें भारतीय जासूस व आतंकवादी बताकर मौत की सजा सुनाई थी.

आईसीजे ने 15-1 के बहुमत से कहा कि जाधव की मौत की सजा पर उसके द्वारा लगाई गई रोक बरकरार रहेगी और उन्हें दोषी ठहराने और उन्हें दी गई सजा पर पुनर्विचार करने की जरूरत है.

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आईसीजे ने अपने फैसले में कहा, “इस मामले में वाजिब सुधार इस रूप में उपलब्ध है कि इस्लामिक रिपब्लिक आफ पाकिस्तान अपने तरीके से श्री कुलभूषण सुधीर जाधव को दोषी ठहराए जाने और उन्हें दी गई सजा पर पुनर्विचार करे. इससे यह साबित हो सकेगा कि राजनयिक पहुंच के लिए वियना संधि के उल्लंघन के प्रभाव को दूर करने के लिए पर्याप्त बल दिया गया है.”

आईसीजे ने मई 2017 में भारत की याचिका पर जाधव की फांसी की सजा पर मामले में अंतिम फैसला होने तक रोक लगा दी थी.

आईसीजे ने जाधव तक राजनयिक पहुंच दिए जाने की भारत की मांग के पक्ष में फैसला सुनाया है. अब भारतीय उच्चायोग जाधव से मुलाकात कर सकेगा और उन्हें वकील और अन्य कानूनी सुविधाएं दे पाएगा.

अदालत ने कहा कि पाकिस्तान ने जाधव से हिरासत में संपर्क कर उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के अधिकार से भारत को वंचित किया और ऐसा कर उसने राजनयिक संबंधों पर वियना संधि के प्रावधानों का उल्लंघन किया.

आईसीजे ने कहा कि पाकिस्तान बिना किसी देर के कुलभूषण जाधव को उनके अधिकारों से अवगत कराने और भारत को उन तक राजनयिक पहुंच देने के लिए वियना संधि के प्रावधानों के तहत ‘वचनबद्ध’ है.

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जाधव को पाकिस्तान ने भारतीय जासूस बताते हुए मौत की सजा सुनाई हुई है. पाकिस्तान का कहना है कि वह आतंकी गतिविधि में शामिल थे. जबकि भारत ने इसे गलत बताते हुए इसके खिलाफ आईसीजे में अपील की हुई है. भारत का कहना है कि जाधव को पाकिस्तान ने ईरान से पकड़ा और जासूस तथा आतंकवादी बता दिया.