संसद में मखौल उड़ाने के लिए पप्पू, दामाद-बहनोई और गोडसेपंथी जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर लगा बैन

संसद में अब इन शब्दों का इस्तेमाल तंज कसने के लिए किया तो वह संसद की कार्यवाही से हटा दिया जाएगा.

संसद में न बोले जाने वाले हजारों शब्दों में अब वो शब्द भी शामिल हो गया है जो सोशल मीडिया पर बहुत चलता है, यानी ‘पप्पू.’ शर्त ये है कि इसका प्रयोग दूसरों का मखौल उड़ाने के लिए किया गया हो. अगर किसी का नाम पप्पू है या कोई सदस्य अपने लिए इस विशेषण का इस्तेमाल करता है तो वह संसद की कार्रवाई का हिस्सा बना रहेगा. 16वीं लोकसभा में कई बार पप्पू शब्द का इस्तेमाल किया गया. स्पीकर ने विवेकाधिकार से इसे हटाया था लेकिन अब इसे असंसदीय शब्द घोषित कर दिया गया है.

असंसदीय शब्दों की लिस्ट संसद में 2009 में प्रकाशित हुई थी तब पप्पू शब्द उस लिस्ट में नहीं था. 2019 में जो शब्द असंसदीय करार दिए गए हैं उनमें बहनोई और दामाद भी हैं. ये भी सिर्फ उस स्थिति में असंसदीय माने जाएंगे जब आरोप लगाने में इनका दुरुपयोग किया जा रहा हो. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने सख्ती से इसका पालन करने को कहा है. उन्होंने कहा है कि अगर उपहास या अपशब्द के लिए ये शब्द सदन में निकाले जाएं तो उनसे बिना पूछे उन्हें संसद की कार्यवाही से निकाल दिया जाए. अगर उनके मुंह से भी कोई असंसदीय शब्द निकले तो उसे भी हटा दिया जाए.

कुछ ही दिन पहले लोकसभा स्पीकर ने ‘यह बंगाल असैंबली नहीं है’ बोल दिया था, इस वाक्य को हटा दिया गया था. महाराष्ट्र के एक सांसद ने कई साल पहले प्रार्थना पत्र दिया था कि गोडसे को असंसदीय शब्दों की लिस्ट से हटाया जाए क्योंकि उनके क्षेत्र में अनेक लोगों का सरनेम गोडसे है. तब गोडसे को उस लिस्ट से हटा दिया था. जारी सत्र में भी गोडसे को लेकर विवाद हुआ तो इसे कार्यवाही से नहीं निकाला गया. वहीं किसी सदस्य द्वारा ‘गोडसेपंथी’ कहने पर हटा दिया गया था. एक खास बात और, संसद में ‘झूठ’ शब्द की जगह ‘असत्य’ को मान्यता दी जाती है.

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