गृह मंत्रालय के इस फैसले से बढ़ेगा गांवों में रोजगार, बदले दिखेंगे 10 लाख पैरा मिलिट्री जवान

गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि सीआरपीएफ, बीएसएफ, एसएसबी, आईटीबीपी, सीआईएसएफ, एनएसजी और असम राइफल्स के दस लाख से अधिक अधिकारी और कर्मचारी यूनिफार्म के लिए टेरी-खादी का इस्तेमाल करेंगे.

पैरा मिलिट्री फोर्स ( अर्ध सैनिक बल ) जल्दी ही हथकरघे से बने या खादी की यूनिफार्म में सजे नजर आएंगे. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने यह फैसला लिया है. उन्होंने केंद्रीय बलों के प्रमुखों से कहा है कि ‘मेक इन इंडिया’ उत्पादों का इस्तेमाल करें और उसे बढ़ावा दें. इसमें यूनिफार्म के लिए खादी का इस्तेमाल शामिल है.

गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि सीआरपीएफ, बीएसएफ, एसएसबी, आईटीबीपी, सीआईएसएफ, एनएसजी और असम राइफल्स के दस लाख से अधिक अधिकारी और कर्मचारी यूनिफार्म के लिए टेरी-खादी का इस्तेमाल करेंगे. इन सारे सुरक्षा बलों में फिलहाल कॉटन और टेरी कॉटन के अलावे सुविधा के मुताबिक कपड़ों का इस्तेमाल किया जा रहा है.

इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक केंद्रीय सुरक्षा बलों की ओर से इस बाबत खादी और ग्रामोद्योग कमीशन (केवीआईसी ) के साथ बातचीत आगे बढ़ी है. इनमें यूनिफार्म के लिए सूती और ऊनी कपड़ों के नमूने देखने के साथ ही चादर और कंबलों के स्टॉक की बात हो रही है. जल्द ही इसके आखिरी नतीजों पर पहुंचने की उम्मीद है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बार खादी को बढ़ावा देने के लिए इसे मंत्रालयों और सरकारी विभागों में मिशन के तौर पर अपनाने की वकालत की है. इसके बाद खादी को अपनाने की मुहिम ने तेजी पकड़ ली है. मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सीमा पर तैनात जवानों के हथियारों के साथ चौकसी करने की वजह से उनके लिए अलग तरह के कपड़ों की जरूरत होती है. हमने संबंधित विभागों को इसके बारे में जानकारी दी है.

कमीशन के चैयरमैन विनय कुमार सक्सेना के मुताबिक इससे न सिर्फ हमारा टर्नओवर दोगुना हो सकता है, बल्कि हमें लाखों अतिरिक्त कामगारों की तैनाती भी करनी पड़ेगी. कमीशन का मौजूदा टर्नओवर 75 हजार करोड़ रुपये का है. अनुमान है कि पारा मिलिट्री फोर्सेस की ओर से केवीआईसी को 150 से 200 करोड़ रुपये का पहला ऑर्डर मिल सकता है. अकेले बीएसएफ को ही खादी के 11 लाख मीटर कपड़ों की जरूरत है.

गृह मंत्रालय इन फोर्सेस के कैंटीन को भी खादी के उत्पादों के इस्तेमाल के लिए कह सकता है. इनमें अचार, पापड़, शहद, साबुन, डिटर्जेंट, शैंपू, फिनाइल, चाय पत्ती, खाद्य तेल वगैरह की बड़े पैमाने पर खरीद हो सकेगी.

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