शिक्षा मंत्रालय ने कहा- छात्रों की सुरक्षा से समझौता नहीं, स्कूल खोलने से पहले पेरेंट्स की राय जरूरी

अभिभावक (Parents) चाहते हैं कि इस साल स्कूलों (Schools) में पूरे एकेडमिक सेशन को ही जीरो सेशन माना जाए. अभिभावकों ने सरकारों से मांग की है कि इस एकेडमिक सेशन को जीरो एकेडमिक ईयर घोषित किया जाए. सभी छात्रों (Students) को अगली कक्षा में प्रमोट किया जाए.

Government planning to open school, शिक्षा मंत्रालय ने कहा- छात्रों की सुरक्षा से समझौता नहीं, स्कूल खोलने से पहले पेरेंट्स की राय जरूरी

अभिभावकों (Parents) को अभी स्कूल (Schools) खोले जाने की आशंका है. अभिभावकों ने अपनी इस आशंका के बारे में केंद्र सरकार और अलग-अलग राज्य सरकारों को बताया है. ज्यादातर अभिभावक नहीं चाहते कि फिलहाल स्कूल खोले जाएं. वहीं सरकार ने भी अभिभावकों को छात्रों की सुरक्षा का भरोसा दिलाया है.

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कोरोना संकट के बीच स्कूलों के विषय पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक (Ramesh Pokhriyal Nishank) ने कहा, “अनलॉक-3 की गाइडलाइंस के तहत गृह मंत्रालय (Home Ministry) ने स्कूल, कॉलेज और सभी कोचिंग इंस्टीट्यूट 31 अगस्त तक बंद रखने का आदेश दिया है. आगे गृह मंत्रालय की जो भी गाइडलाइंस आएगी, हम उसके मुताबिक फैसला लेंगे.”

पैरेंट्स की राय लेने के बाद खोले जाएंगे स्कूल

वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि तेजी से फैल रहे कोरोनावायरस संक्रमण (Coronavirus) की वजह से अब स्कूलों को खोलने में और ज्यादा देरी की जा सकती है. केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय (Union Ministry of Education) पहले ही अभी के लिए स्कूल न खोलने का फैसला ले चुका है. स्कूल खोलने की प्रक्रिया पर केंद्र और अलग-अलग राज्य सरकार पेरेंट्स की भी राय ले रहे हैं.

पेरेंट्स चाहते हैं कि इस साल स्कूलों में पूरे एकेडमिक सेशन को ही जीरो सेशन माना जाए. इस मांग को लेकर कई पेरेंट्स ने सहमति जताई है. दरअसल, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने सभी राज्यों से कहा है कि वे स्कूल खोले जाने के विषय पर अभिभावकों की राय जानने की कोशिश करें.

अभिभावकों ने सरकारों से की यह मांग

ऑल इंडिया पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक अग्रवाल (Ashok Aggarwal) ने कहा, “हमने शिक्षा मंत्रालय और प्रधानमंत्री के सामने मुख्य रूप से तीन विषय रखे हैं. इनमें सबसे जरूरी टॉपिक यह है कि जब तक कोरोना संक्रमण पर पूरी तरह से काबू नहीं पा लिया जाता, तब तक स्कूल नहीं खुलने चाहिए.”

अग्रवाल ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के अलावा देशभर के सभी मुख्यमंत्रियों को हमने ऐसे ही पत्र लिखे हैं. अभिभावकों के इस संघ ने सरकारों से मांग की है कि इस एकेडमिक सेशन को जीरो एकेडमिक ईयर घोषित किया जाए. सभी छात्रों को अगली कक्षा में प्रमोट किया जाए. अगले साल का सिलेबस इस तरह से मॉडिफाई किया जाए कि छात्र उसे समझ सकें और अपनी पढ़ाई कर सकें.”

छात्रों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं

इस पूरे मामले पर शिक्षा मंत्रालय (Education Ministry) का कहना है कि पहले छात्रों की सुरक्षा है फिर शिक्षा. यानी छात्रों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा. कोई भी कदम उठाने से पहले छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी. सुरक्षित माहौल में ही छात्र कक्षा या फिर परीक्षा में शामिल हो सकते हैं. (IANS)

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