परीक्षा पे चर्चा : PM मोदी की क्‍लास में स्‍टूडेंट्स और पेरेंट्स को मिले ये टिप्‍स

पीएम मोदी ने ISRO के चंद्रयान मिशन, क्रिकेटर राहुल द्रविड़-वीवीएस लक्ष्‍मण की ऐतिहासिक पारी और अनिल कुंबले की चोट के बावजूद खेल जारी रखने के जीवट का जिक्र कर बच्‍चों में उत्‍साह भरा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘परीक्षा पे चर्चा’ के तीसरे एडिशन में स्‍टूडेंट्स को कई टिप्‍स दिए. उन्‍होंने ISRO के चंद्रयान मिशन, क्रिकेटर राहुल द्रविड़ और अनिल कुंबले की चोट के बावजूद खेल जारी रखने के जीवट का जिक्र कर बच्‍चों में उत्‍साह भरा. अपने सेशन में प्रधानमंत्री ने स्‍टूडेंट्स के सवालों का आत्‍मीयता से जवाब दिया. पढ़ें पीएम मोदी के अहम टिप्‍स.

  • हम विफलताओं में भी सफलता की शिक्षा पा सकते हैं. हर प्रयास में हम उत्साह भर सकते हैं और किसी चीज में आप विफल हो गए तो उसका मतलब है कि अब आप सफलता की ओर चल पड़े हो. जाने अनजाने में हम लोग उस दिशा में चल पड़े हैं जिसमें सफलता -विफलता का मुख्य बिंदु कुछ विशेष परीक्षाओं के मार्क्स बन गए हैं.
  • सिर्फ परीक्षा के अंक जिंदगी नहीं हैं. कोई एक परीक्षा पूरी जिंदगी नहीं है. ये एक महत्वपूर्ण पड़ाव है. लेकिन यही सब कुछ है, ऐसा नहीं मानना चाहिए. मैं माता-पिता से भी आग्रह करूंगा कि बच्चों से ऐसी बातें न करें कि परीक्षा ही सब कुछ है.
  • को-करिकुलर एक्टिविटीज न करना आपको रोबोट की तरह बना सकता है. आप इसे बदल सकते हैं. हां, इसके लिए बेहतर समय प्रबंधन की आवश्यकता होगी. आज कई अवसर हैं और मुझे आशा है कि युवा इनका उपयोग करेंगे.
  • स्मार्टफोन जितना समय आपका समय चोरी करता है, उसमें से 10 प्रतिशत कम करके आप अपने मां, बाप, दादा, दादी के साथ बिताएं. तकनीक हमें खींचकर ले जाए, उससे हमें बचकर रहना चाहिए. हमारे अंदर ये भावना होनी चाहिए कि मैं तकनीक को अपनी मर्जी से उपयोग करूंगा.
  • क्या हम तय कर सकते हैं कि 2022 में जब आजदी के 75 वर्ष होंगे तो मैं और मेरा परिवार जो भी खरीदेंगे वो मेक इन इंडिया ही खरीदेंगे. मुझे बताइये ये कर्त्तव्य होगा या नहीं, इससे देश का भला होगा और देश की इकॉनमी को ताकत मिलेगी.
  • मैं किसी परिजन पर कोई दवाब नहीं डालना चाहता, और न किसी बच्चे को बिगाड़ना चाहता हूं. जैसे स्टील के स्प्रिंग को ज्यादा खींचने पर वो तार बन जाता है, उसी तरह मां-बाप, अध्यापकों को भी सोचना चाहिए कि बच्चे कि क्षमता कितनी है.
  • मां-बाप को मैं कहूंगा कि बच्चे बड़े हो गए हैं ये स्वीकार करें, लेकिन जब बच्चें 2-3 साल के थे और तब आपके अंदर उनको मदद करने की जो भावना थी उसे हमेशा जिंदा रखिए. बच्चों को उनकी रुचि के सही रास्ते में आगे बढ़ने के लिए हमेशा प्रेरित करना चाहिए.
  • जितना ज्यादा आप बच्चे को प्रोत्साहित करोगे, उतना परिणाम ज्यादा मिलेगा और जितना दबाव डालोगे उतना ज्यादा समस्याओं को बल मिलेगा. अब ये मां-बाप और अध्यापकों को तय करना है कि उन्हें क्या चुनना है.
  • संभव है कि सुबह उठकर आप पढ़ते हैं तो मन और दिमाग से पूरी तरह तंदुरुस्त होते होंगे. लेकिन हर किसी की अपनी विशेषता होती है, इसलिए आप सुबह या शाम जिस समय कंफर्टेबल हों, उसी समय में पढ़ाई करो. अगर हम प्रकृति के साथ तालमेल बनाकर जीवन जिएंगे, तो प्रकृति स्वयं आपको आगे ले जाने में सहायता करेगी. इसीलिए समय और परिस्थिति की पसंद में हमे, प्रकृति के अनुकूल समय खोजना चाहिए.
  • अगर आप बोझ लेकर परीक्षा हॉल में गए हैं तो सारे प्रयोग बेकार जाते हैं. आपको आत्म विश्वास लेकर जाना है. परीक्षा को कभी जिंदगी में बोझ नहीं बनने देना है. आत्मविश्वास बहुत बड़ी चीज है. साथ ही फोकस एक्टिविटी होनी जरूरी है.
  • हमने डर के कारण आगे पैर नहीं रखे, इससे बुरी कोई अवस्था नहीं हो सकती. हमारी मनोस्थिति ऐसी होनी चाहिए कि हम किसी भी हालत में डगर आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे, ये मिजाज तो हर विद्यार्थी का होना चाहिए.
  • विद्यार्थी कोई कालखंड के लिए नहीं होता। हमें जीवन भर अपने भीतर के विद्यार्थी को जीवित रखना चाहिए. जिंदगी जीने का यही उत्तम मार्ग है, नया-नया सीखना, नया-नया जानना.
  • कुछ करने के सपने हम पालेंगे तो जो भी करेंगे उसे अच्छा करने का मन करेगा. जीवन को कुछ बनने के सपने से जोड़ने के बजाय कुछ करने के सपने से जोड़ना चाहिए.
    अगर आप ऐसा करेंगे तो कभी आपको एग्जाम का दबाव नहीं होगा.

ये भी पढ़ें

ट्रंप ने कहा ‘भारत से नहीं लगी चीन की सीमा’ तो बीच मीटिंग से उठ गए मोदी, किताब में दावा