1927 में बना था भारत का संसद भवन, जानिए कब बना दूसरे देशों का पार्लियामेंट?

दुनियाभर में समय-समय पर संसद भवन का री-डेवलपमेंट होता रहा है, पर कभी भी इन्हें ढहाया नहीं गया.

दुनिया की बाकी संसदों की तुलना में भारत का संसद भवन अभी भी नया है. नई दिल्ली के संसद मार्ग पर स्थित यह भवन आज से 92 साल पहले यानी 1927 में बना था. तत्कालीन भारत सरकार अब इस प्रतिष्ठित भवन के पुनर्विकास के बारे सोच रही है.

सूत्रों का कहना है कि सरकार स्वतंत्रता के बाद बनी कुछ इमारतों को ढहाने के बारे में सोच रही है, साथ ही भवन का नए सिरे से निर्माण करने के विकल्पों को भी तलाश रही है.

चलिए आपको बताते हैं दुनिया के बाकी देशों के संसद भवनों के बारे में आखिर वो कब बने और कैसे अपने देश के आइकॉनिक सिंबल बन गए. दुनियाभर में समय-समय पर संसद भवन का री-डेवलपमेंट होता रहा है, पर कभी भी इन्हें ढहाया नहीं गया.

डच पार्लियामेंट

डच पार्लियामेंट नेथरलैंड के द हेग में स्थित है.यह बिनहॉफ इमारत के नाम से भी प्रचलित है. यह दुनिया का सबसे पुराना संसद भवन है. यह 13वीं शताब्दी में बना था.

इटली का संसद भवन

इटली के दो सदनों में से एक, सीनेट ऑफ रिपब्लिक 1505 में बना था. तब यह मेडिसी परिवार का घर हुआ करता था. उसके बाद 1871 से इस इमारत का इस्तेमाल संसद भवन के र्रोप में होने लगा. यह इटली के रोम में स्थित है और पलाज़्ज़ो मदमा के नाम से जाना जाता है.

फ्रेंच पार्लियामेंट

फ्रांस का लक्सेम्बर्ग पैलेस 1615-1645 के दौरान बना था. उस वक़्त यह राजसी-गृह हुआ करता था. यह इमारत फ्रेंच पार्लियामेंट का अपर हाउस है. 19वीं शताब्दी में दुनिया के करीब 12 संसद भवनों का निर्माण हुआ था. उनमे से अधिकतर आज भी फंक्शनल है.

अमेरिका का संसद भवन

वाशिंगटन डीसी में स्थित अमेरिका का संसद भवन जो कैपिटॉल के नाम से जाना जाता है. सन 1800 में बनी यह इमारत पहले कांग्रेस के दोनों सदनों की मीटिंग प्लेस थी. कहा जाता है यह नार्थ और साउथ अमेरिका की सबसे पुरानी इमारत है.

इंग्लैंड का पार्लियामेंट हाउस

लंदन में स्थित यह भवन पैलेस ऑफ वेस्टमिनिस्टर के नाम से जाना जाता है. यह वो इमारत है जहां से हाउस ऑफ़ कॉमन्स और लॉर्ड्स काम करते हैं. इसका निर्माण 1870 में हुआ था. आग लगने के कारण इस इमारत का पुनर्निर्माण भी हुआ था.

चीन का संसद भवन

चीन के बीजिंग में स्थित यह भवन ग्रेट हॉल ऑफ़ थे पीपल के नाम से जाना जाता है. यह पहले नेशनल पीपल ऑफ कांग्रेस के मिलने का स्थल था. यह दुनिया की सबसे बड़ी पर्लिअमेंटरी बॉडी है जिसमे 2900 सदस्य हैं और इसका निर्माण 1959 में हुआ था.

भारत का संसद भवन

एडविन लुटयंस और हर्बर्ट बेकर ने इसे डिज़ाइन किया था. 1921 में इसका निर्माण शुरू हुआ था और 1927 में यह बनकर तैयार हुआ. 2.4 हेक्टेयर के क्षेत्र में फैले इस भवन के निर्माण में करीब 83 लाख रूपए लगे थे.

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