VIDEO: गर्भवती महिला के 11 किमी के सफर की ये कहानी आपको रुला देगी

आजादी के 72 साल बाद भी उत्तराखंड और असम में कुछ जगहों का हाल ऐसा है जहां लोगों को इलाज के लिए न अस्पताल हैं न अस्पताल तक पहुंचने के लिए सड़कें हैं.

आज से ठीक हफ्तेभर बाद देश में लोकसभा चुनाव की हार-जीत का फैसला हो जाएगा. जनता से नए वादे और दावे किए जाएंगे. मगर इन सब को पीछे छोड़ कर एक भारत ऐसा भी है जो रो रहा है.

सैकड़ों चुनाव होने और कई सारी सरकारें बदलने के बावजूद उत्तरकाशी के सरबडियार इलाके का हाल जस का तस है. जहां एक गर्भवती महिला को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए उसे कंधे पर लाद कर ले जाना पड़ा. इस महिला को 4 महीने का गर्भ है. अचानक पेट में दर्द उठने पर महिला को कंधे पर लादकर अस्पताल ले जाया गया.

सरबडियार और अस्पताल बीच की दूरी लगभग 11 किलोमीटर है. इस तरह के हालातों से गुजर रहा सरबडियार अकेला इलाका नहीं है, बल्कि उत्तराखंड में ऐसी बहुत सी जगहें हैं, जहां न अस्पताल है न सड़कें हैं. जब भी कोई बीमार पड़ता है उसे ऐसे ही अस्पताल ले जाया जाता है.

उत्तरकाशी के रहवासियों ने बताया कि “यहां पर अस्पताल पहुंचने का कोई इंतजाम नहीं है. मौके पर कोई नहीं मिलता है. कुछ नहीं है हमारा. इन हालातों के कल यहां पर एक व्यक्ति पशु की तरह तड़प कर मर गया. आज दूसरी डांडी तैयार हो गई है. हर दिन इस तरह की घटना होती है. हम लोग पशु की तरह जी और मर रहे हैं. हमारे लिए कोई शासन नहीं है”.

इस पूरे मामले को लेकर उत्तरकाशी के जिलाधिकारी डॉक्टर आशीष चौहान का कहना है कि “मैं इस पूरे एरिया का एक बार और सर्वे कराकर क्या बेहतर सुविधा वहां पर दी जा सकती है, देखूंगा. साथ ही वहां पर ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं देने की कोशिश की जाएगी”.

उत्तरकाशी के बाद असम के शिवसागर जिले का हाल भी ऐसा ही है. शिवसागर जिले के खोरहाट गांव में भी एक गर्भवती महिला को लादकर अस्पताल ले जाया गया. वजह थी गांव में पक्की सड़क का न होना, जिसके कारण गांव में एम्बुलेंस पहुंचना मुमकिन नहीं है.

ऐसे में सवाल ये उठता है कि प्रशासन क्या कर कर रहा है? इतने समय से किसी भी सरकार की नजर इन गांवों पर नहीं पड़ी. यही नहीं पीएम मोदी के स्वच्छता और सड़क सुविधा देने वाले वादे भी इन गांवों के लिए झूठे पड़ गए. बता दें कि असम में 3 साल से और उत्तराखंड में 2 साल से बीजेपी सरकार का राज है. इसके अलावा केंद्र सरकार में भी पिछले 5 सालों से सत्ता भाजपा के हाथों में है.