विदेशी राजनयिकों से बोले कश्मीरी, ‘पाकिस्तान को एक इंच जमीन नहीं देंगे’

जम्मू कश्मीर से विशेष राज्य दर्जा वापस लिए जाने और राज्य का दो केंद्र शाषित प्रदेश में विभाजन किए जाने के बाद यह सरकार द्वारा आयोजित राजनयिकों की पहली यात्रा थी.
Jammu Kashmir, विदेशी राजनयिकों से बोले कश्मीरी, ‘पाकिस्तान को एक इंच जमीन नहीं देंगे’

अमेरिका के राजदूत केनेथ जस्टर सहित पंद्रह विदेशी दूतों और वरिष्ठ राजनयिकों ने जम्मू और कश्मीर की स्थिति का आकलन करने के लिए गुरुवार को श्रीनगर का दौरा किया. जम्मू कश्मीर से विशेष राज्य दर्जा वापस लिए जाने और राज्य का दो केंद्र शाषित प्रदेश में विभाजन किए जाने के बाद यह सरकार द्वारा आयोजित राजनयिकों की पहली यात्रा थी. राजनयिकों के इस समूह के साथ विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने बताया कि ‘उनकी पहली मीटिंग सुरक्षा अधिकारियों के साथ हुई, जिसमें उन्हें जम्मू कश्मीर की सुरक्षा स्थिति और शांति बनाए रखने में आतंकवाद द्वारा उत्पन्न किए गए खतरे के बारे में पता चला. इस यात्रा का मकसद था कि राजनयिकों को सरकार द्वारा स्थिति सामान्य करने के लिए किए गए प्रयासों को बताया जा सके.’

अमेरिकी दूत के अलावा, समूह के अन्य प्रमुख सदस्यों में साउथ कोरियाई राजदूत शिन बोंग-किल, नॉर्वे के राजदूत हंस जैकब फ्राइडेनलुंड, वियतनामी राजदूत फाम सन चाऊ और अर्जेंटीना के दूत डैनियल चूबरू शामिल थे. समूह को श्रीनगर के आसपास ले जाया गया और पंचायत सदस्यों और स्थानीय निकायों और गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कराई गई.

दूतों से मिलने वाले प्रतिनिधियों ने उन्हें बताया कि वे कश्मीर में “रक्तपात” की पाकिस्तान की फर्जी खबरों को पूरी तरह से खारिज करते हैं और सरकार के पिछले साल 5 अगस्त को किए गए कार्यों को बिना खून-खराबे के संभालने की सराहना करते हैं. प्रतिनिधियों ने स्वीकार किया कि वे कुछ कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं, लेकिन कहा कि यह व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक था.

उन्होंने पाकिस्तान के आतंकवाद को फैलाने की हताशा और प्रयासों पर भी प्रकाश डाला और जम्मू-कश्मीर में हत्याओं के लिए पाकिस्तान को दोषी ठहराया और दूतों से इस्लामाबाद पर ऐसा न करने का दबाव डालने के लिए कहा. प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि कश्मीर के लोगों ने उनसे कहा है कि वह पाकिस्तान को एक इंच भी नहीं देंगे.

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