कौन थे पेरियार? जिनके खिलाफ बोलने की हिमाकत तमिलनाडु में कोई नहीं करता

पेरियार ईवी रामास्वामी और विवादों का चोली-दामन का साथ रहा है. एक नजर उनसे जुड़ी कुछ विवादित बातों पर.
Periyar EV Ramasamy, कौन थे पेरियार? जिनके खिलाफ बोलने की हिमाकत तमिलनाडु में कोई नहीं करता

पेरियार ईवी रामास्वामी भारतीय राजनीति की सबसे विवादित हस्‍त‍ियों में से एक हैं. मंगलवार (24 दिसंबर) को उनकी पुण्‍यतिथि थी. इस मौके पर तमिलनाडु बीजेपी ने एक ट्वीट किया जिसपर बवाल हो गया. यह ट्वीट था पेरियार की निजी जिंदगी को लेकर. 70 साल की उम्र में पेरियार ने 32 वर्ष की मनियम्मई से शादी की थी. विवाद ज्‍यादा बढ़ा तो बीजेपी ने ट्वीट डिलीट कर दिया. पेरियार और विवादों का चोली-दामन का साथ रहा है.

तमिलनाडु के सामाजिक-राजनीतिक हालात पर पेरियार का गहरा असर है. तमिलनाडु के भीतर कोई भी पार्टी खुले रूप में पेरियार की आलोचना नहीं कर सकती. वो पेरियार ही थे जिन्‍होंने द्रविड़ आंदोलन की शुरुआत की. DMK, AIADMK और MDMK इसी आंदोलन की पैदाइश हैं.

‘एशिया का सुकरात’ कहे जाने वाले पेरियार 1879 में एक धार्मिक हिंदू परिवार में जन्‍मे. इसके बावजूद, ताउम्र उन्‍होंने धर्म का विरोध किया. हिंदू धर्म की कुरीतियों पर इतनी मुखरता से अपनी बात रखी कि बहुत से लोगों को यह उनकी ‘आस्‍था पर प्रहार’ लगा.

आक्रामक एंटी-ब्राह्मण स्‍टैंड ने बनाई राजनीतिक पहचान

महात्‍मा गांधी से प्रभावित होकर पेरियार ने कांग्रेस पार्टी ज्‍वॉइन की थी मगर ब्राह्मणों का वर्चस्‍व देखा तो छोड़कर आ गए. ब्राह्मणों के प्रति उनकी तल्‍खी अंत तक बरकरार रही. पेरियार का मानना था कि ब्राह्मणों ने अपने धार्मिक सिद्धांतों और कर्मकांडों के जरिए बाकी सब जातियों पर प्रभुत्‍व जमा रखा है. पेरियार का सोचना था कि निचली हिंदू जातियां इस्‍लाम और ईसाई धर्म अपना कर ब्राह्मणों के अत्‍याचार से बच सकती हैं.

1924 में पेरियार ने केरल के मंदिरों में दलितों की एंट्री के लिए आंदोलन किया. बतौर एक्टिविस्‍ट, पेरियार की सबसे बड़ी पहचान निचली जातियों को सम्‍मान दिलाना रही. तमिलनाडु में पेरियार ने हिंदी थोपे जाने के खिलाफ आंदोलन चलाया. पेरियार का सबसे विवादित आंदोलन हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों के खिलाफ था. इस आंदोलन में मूर्तियां तोड़ी गईं, जलाई गईं. कई जगह मूर्तियों को जूतों की माला पहनाकर जुलूस निकलवाया गया.

गांधी के शिष्‍य रहे पेरियार ने बाद में किया उन्‍हीं का विरोध

मोहम्‍मद अली जिन्‍ना और डॉ बीआर अंबेडकर के अलावा, पेरियार ही वो तीसरी बड़ी शख्सियत रहे जिन्‍होंने खुलकर महात्‍मा गांधी का विरोध किया. जब गांधी की हत्‍या हुई तो पेरियार बेहद दुखी थी और भारत का नाम ‘गांधी देश’ रखने की मांग की थी. लेकिन कुछ समय बाद ही, उन्‍होंने गांधी को भला-बुरा कहना शुरू कर दिया था. दिसंबर 1973 में दिए अपने आखिरी भाषण में भी पेरियार ने कहा था, “हम गांधी का संहार करते, उससे पहले ब्राह्मणों ने हमारा काम कर दिया.”

जिन्‍ना ने पाकिस्‍तान की मांग उठाई. उसी का सहारा लेकर पेरियार ने द्रविड़नाडु की मुहिम तेज कर दी थी. 1940 में पेरियार और जिन्‍ना के बीच इसे लेकर तीन मुलाकातें भी हुईं मगर गैर-मुस्लिम की मांग को सपोर्ट से जिन्‍ना ने इनकार कर दिया.

पेरियार शादी को पवित्र बंधन की जगह साझीदारी के रूप में देखते थे. उन्‍होंने इस विचार को दक्षिणी राज्‍यों में फैलाया. बाल विवाह खत्म करने, विधवा महिलाओं को दोबारा शादी का अधिकार देने को लेकर भी पेरियार ने आंदोलन चलाया. उनकी गिनती देश के बड़े समाज सुधारकों में होती है.

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