UP में नागरिकता कानून की आड़ में हिंसा के पीछे PFI को विदेशों से फंडिंग!

उत्तर प्रदेश पुलिस ने 19 दिसंबर को 25 PFI कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था. इन्हें कथित रूप से मेरठ, शामली, मुजफ्फऱनगर और लखनऊ में नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिंसा फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया है
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उत्तर प्रदेश में नागरिकता कानून को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों के पीछे कथित रूप से पीपुल्स फ्रंट ऑफ इंडिया(पीएफआई) का हाथ माना जा रहा है. इस मामले में अब गृह मंत्रालय के एक डोजियर में खुलासा हुआ है कि पीएफआई को UAE, सऊदी अरब, बहराइच कुवैत, कतर और ओमान से फंडिंग होती है.

गृह मंत्रालय के डोजियर के अनुसार, PFI के सदस्य UAE में रिहैब फाउंडेशन, इंडियन सोशल फोरम और इंडियन फ्रेटरनिटी फोरम जैसे फ्रंट संगठनों के माध्यम से सक्रिय रूप से काम करते है. डॉजियर के अनुसार PFI नेताओं का दुबई के अल-ऐन में लुलु हाइपरमार्केट के पीछे मुरबा में एक कार्यालय है जहां से धन जुटाया जाता है और भारत में कट्टरवाद फैलाने के लिए भेजा जाता है.

डोजियर के मुताबिक PFI बहरीन, यूएई, कुवैत और सऊदी अरब से  भी धन जुटाने में लगा है. एक वरिष्ठ   PFI नेता इन देशों का दौरा करते है और सदस्यों से भारतीय मुसलमानों को नौकरियों में सुविधा देने का अनुरोध करते हैं ताकि संगठन मजबूत हो सके.

उत्तरप्रदेश पुलिस ने 19 दिसंबर को 25 PFI कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था. इन्हें कथित रूप से मेरठ, शामली, मुजफ्फऱनगर और लखनऊ में नागरिकता बिल के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिंसा फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया है. PFI की पॉलिटिकल विंग सोशल डेमॉक्रैटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) के प्रदेश अध्यक्ष नूर हसन को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है. लखनऊ पुलिस ने PFI के प्रदेश संयोजक वसीम अहमद और अनय अधिकारियों को शहर में बड़े पैमाने पर हिंसा फैलाने और आगजनी करने केआरोप में गिरफ्तार किया था.

उत्तरप्रदेश में पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़प के दौरान कई लोग मारे गए थे. पिछले हफ्ते ही कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने उत्तर प्रदेश के अलग अलग हिस्सों में नागरिकता कानून के विरोध में होने वाले प्रदर्शनों की आड़ में होने वाली हिंसा के पीछे PFI का हाथ होने की आशंका जताई है. उन्होंने कहा कि सबूतों के आधार पर संगठन पर उचित कार्यवाई की जाएगी. उन्होने PFI और भारत में बैन स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के संबंधों पर भी चर्चा की.

उत्तरप्रदेश सरकार ने गृह मंत्रालय को एक चिठ्ठी लिखी है और PFI को बन करने की मांग की है. जानकारी के मुताबिक कर्नाटक और असम सरकारों ने भी PFI को बान करने की मांग की है. PFI की टॉप लीडरशिप ज्यादातर केरल से आती है. ये संगठन कथित रूप से मुसलमानों को कट्टरपंथ की ओर ढ़केलने का काम करता है.

यूपी के मंत्री मोहसिन रजा ने दावा किया है कि PFIके पीछे आईएसआई का हाथ है. उन्होंने कहा कि सिमी पर बैन लगने के बाद संगठन ने नया संगठन PFI बना लिया. ये संगठन युवाओं को आतंकवाद की ओर धकेल रहा है. इसके पहले उत्तरप्रदेश के उपमुख्यमंत्री दिनेश मौर्य ने नागरिकता कानून के विरोध में होने वाले प्रदर्शनों की आड़ में होने वाली हिंसा के पीछे PFI का हाथ बताया था. संगठन के केरल इकाई के प्रवक्ता सीए रउफ ने संगठन पर लग रहे आरोपों को नकार दिया है. संगठन के वरिष्ठ सदस्य मुजाहिद पाशा ने दावा किया है कि समाज में व्याप्त हर बुराई के लिए PFI पर आरोप लगाना बड़ा आसान है. लेकिन हम अल्पसंख्यकों के लिए काम करते हैं.

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