नागरिकता कानून पर हिंसा भड़काने वाले PFI को ममता सरकार ने दी रैली की इजाजत, फिर मारी पलटी

पश्चिम बंगाल में नागरिकता कानून के विरोध प्रदर्शन को हिंसक बनाने में पीएफआई के हाथ होने की बात कही जा रही है. इसके साथ ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) की मिलीभगत की बात भी सामने आई है.

नागरिकता संशोधन कानून ( Citizenship amendment act) के विरोध प्रदर्शन में हिंसा भड़काने के आरोपी कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) को पश्चिम बंगाल में रैली की इजाजत ने सियासी पारा बढ़ा दिया है. हालांकि कुछ ही देर बाद सरकार बैकफुट पर आ गई और अनुमति वापस ले ली. दो दिन बाद होने वाली इस रैली में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस सांसद अबू ताहिर खान के शामिल होने की बात कही जा रही है. इसको लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से सवाल पूछा जा रहा है.

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राजधानी दिल्ली सहित देश भर में हिंसा भड़काने के पीछे पीएफआई के हाथ होने का खुलासा किया था. वहीं इंटेलीजेंस इनपुट के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने गृह मंत्रालय से इस संगठन पर बैन लगाने की सिफारिश की है. इसके बाद मामले की उच्च स्तरीय जांच जारी है.

दूसरी ओर पश्चिम बंगाल में ममता सरकार ने पीएफआई को 5 जनवरी को रैली करने की इजाजत दी थी. पश्चिम बंगाल में नागरिकता कानून के विरोध प्रदर्शन को हिंसक बनाने में भी इस संगठन के हाथ होने की बात कही जा रही है. इस प्रदेश में पीएफआई के साथ ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) की मिलीभगत की बात सामने आई है.

इस बीच पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद से तृणमूल कांग्रेस सांसद अबू ताहिर ने कहा कि पीएफआई की रैली या उसमें शामिल होने के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है. ताहिर ने कहा कि पीएफआई ने अगर नागरिकता कानून के खिलाफ होनेवाली रैली के पोस्टर में उनका फोटो तो वो क्या कर सकते हैं.

दूसरी ओर एनआरसी, सीएए और एनपीआर के खिलाफ रैली के बारे में पीएफआई नेता हसीबुल इस्लाम ने कहा, ‘हम 5 जनवरी को मुर्शिदाबाद में सीएए के खिलाफ एक प्रदर्शन आयोजित कर रहे हैं. सांसद अबू ताहिर खान भी इस प्रदर्शन का हिस्सा होंगे.’

क्या है पीएफआई

पीएफआई एक कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन है. यह खुद के पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के हक में संघर्ष करने वाला संगठन होने का दावा करता है. इसकी स्थापना 2006 में नेशनल डेवलपमेंट फ्रंट (NDF)के उत्तराधिकारी के रूप में हुई. इसकी जड़ें केरल के कालीकट में और इसका मुख्यालय दिल्ली के शाहीन बाग में स्थित है. इस संगठन की ज्यादातर गतिविधियां मुस्लिमों के आसपास रहती है.
साल 2006 में दिल्ली के राम लीला मैदान में इसके नेशनल पॉलिटिकल कांफ्रेंस के वक्त यह संगठन सुर्खियों में आया था.

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