तात्या टोपे के वंशज चला रहे किराना दुकान, शहीद उधम सिंह के वंशज दिहाड़ी मजदूर

शिवनाथ झा (Shivnath Jha) ने कहा, "मैंने सत्येंद्र नाथ (Satyendra Nath) के अपाहिज पड़पोते और उनकी पत्नी अनिता बोस को भी खोज निकाला, जो मिदनापुर में लकवाग्रस्त हालत में थीं. मैंने उनसे बात की, वह बोलने में सक्षम थीं.''

Descendants of freedom movement heroes, तात्या टोपे के वंशज चला रहे किराना दुकान, शहीद उधम सिंह के वंशज दिहाड़ी मजदूर

देशभर में शनिवार को 74वें स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) का जश्न मनाया जाएगा. लेकिन हमें आजादी दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले स्वतंत्रता आंदोलन (Freedom Movement) के नायकों के वंशज अभी भी दयनीय हालत में रह रहे हैं. देश की आजादी के लिए अपने प्राणों को न्योछावर करने वाले शहीदों के कुछ वंशज जहां दैनिक मजदूरी के काम में लगे हैं, तो वहीं कुछ सड़कों पर भीख मांगने तक को मजबूर हैं.

उधम सिंह के भांजे के बेटे कर रहे दिहाड़ी मजदूरी

मिसाल के तौर पर, शहीद उधम सिंह (Udham Singh) के भांजे के बेटे जीत सिंह को पंजाब के संगरूर जिले में एक निर्माण स्थल (Construction Site) के पास देखा गया. जीत वहां पर दिहाड़ी मजदूरी कर रहे हैं.

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जलियावालां बाग नरसंहार (Jallianwala Bagh) का बदला लेने के लिए 1940 में उधम सिंह लंदन गए और पंजाब के तत्कालीन उपराज्यपाल माइकल ओ डायर की हत्या कर दी. लेकिन पंजाब में बाद की सरकारों ने शहीद उधम सिंह के परिवार की कोई सुध नहीं ली.

तात्या टोपे के वंशज कर रहे संघर्ष

इसी तरह 1857 के विद्रोह के नायकों में से एक तात्या टोपे (Tatya Tope) के वंशज बिठूर, कानपुर में संघर्ष कर रहे हैं. भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन (Indian Independence Movement) के 73 से ज्यादा भुला दिए गए नायकों के वंशजों पर चार किताबें लिखने वाले पूर्व पत्रकार शिवनाथ झा (Shivnath Jha) का कहना है, “मैंने तात्या के पड़पोते विनायक राव टोपे को बिठूर में एक छोटी सी किराने की दुकान चलाते हुए देखा.”

झा ने शहीद सत्येंद्र नाथ के पड़पोते की पत्नी अनिता बोस को भी खोजा और उन्होंने देखा कि मिदनापुर में अनिता की हालत भी दयनीय बनी हुई है. सत्येंद्र नाथ और खुदीराम बोस अलीपुर बम कांड में शामिल थे. दोनों को 1908 में फांसी दी गई थी. अंग्रेजों की दी गई फांसी के वक्त सत्येंद्र नाथ 26 वर्ष के थे और खुदीराम महज 18 साल के थे.

शिवनाथ झा कर रहे मदद करने की कोशिश

अपने जीवन में रोजाना संघर्ष कर रहे स्वतंत्रता आंदोलन के नायकों के वंशजों की मदद के लिए शिवनाथ झा हमेशा प्रयास करते रहते हैं. उन्होंने विनायक राव टोपे और जीत सिंह को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए पांच लाख रुपये भी कलेक्ट किए थे.

शिवनाथ झा ने कहा, “मैंने सत्येंद्र नाथ के अपाहिज पड़पोते और उनकी पत्नी अनिता बोस को भी खोज निकाला, जो मिदनापुर में लकवाग्रस्त हालत में थीं. मैंने उनसे बात की, वह बोलने में सक्षम थीं.” पूर्व पत्रकार झा ने कहा कि अब वह इस बुजुर्ग दंपति के पुनर्वास की कोशिश कर रहे हैं.

अपनी किताब को PM मोदी के सामने करना चाहते हैं पेश

शिवनाथ झा और उनके दोस्त एक NGO चलाते हैं और स्वतंत्रता सेनानियों की जीवन शैली (Lifestyle) का विस्तार से वर्णन करते हुए किताबें प्रकाशित करते हैं.

उनका संगठन 800 पेजों की एक नई किताब ‘1857-1947 के शहीदों के वंशज’ को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के सामने प्रस्तुत करने के विचार में है. इस पुस्तक में झांसी की रानी, जसपाल सिंह (बाबू कुंवर सिंह कमांडर-इन-चीफ), वाजिद अली शाह, मंगल पांडे, जबरदस्त खान, तात्या टोपे, बहादुर शाह जफर, दुर्गा सिंह, सुरेंद्र साई, उधम सिंह, अशफाकउल्ला खान, खुदीराम बोस, भगत सिंह, सत्येंद्र नाथ (खुदीराम बोस के गुरु), चंद्र शेखर आजाद, राम प्रसाद बिस्मिल, राज गुरु, सुखदेव, बटुकेश्वर दत्त, जतिंद्रनाथ मुखर्जी जैसे अन्य कई नायकों के वंशजों का उल्लेख किया गया है. (IANS)

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